विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति से दूर होता इंसान
ब्रह्मानंद ठाकुर गांधी और व्यावहारिक अराजकवाद सिरीज के अन्तर्गत अभी तक आप विभिन्न अराजकवादी चिंतकों के विचारों से अवगत
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
ब्रह्मानंद ठाकुर गांधी और व्यावहारिक अराजकवाद सिरीज के अन्तर्गत अभी तक आप विभिन्न अराजकवादी चिंतकों के विचारों से अवगत
प्रवीण कुमार लगातार बातों, गरमा-गरम बहसों के दौर मेंसबसे खतरनाक है, सब कुछ सुनकर भी चुप रह जाना ठोस अनुभवों
ब्रह्मानंद ठाकुर जाने – माने समाजवादी चिंतक सच्चिदानन्द सिन्हा की पुस्तक ‘ गांधी और व्यावहारिक अराजकवाद ‘ की शृंखला की तीसरी
बदलाव प्रतिनिधि, मुजफ्फरपुर महात्मा गांधी ने 1910 में दक्षिण अफ्रीका में टाल्सटाय आश्रम में जिस तरह की शिक्षा की शुरुआत
आज गांधी जयंती है और लोग गांधी को याद कर रहे हैं। मैं इस मौके पर एक ऐसी शख्सियत की
इस शृंखला के अन्तर्गत आप अभी तक अराजकवाद से सम्बंधित विभिन्न दार्शनिकों के विचारों से अवगत हो चुके हैं ।
गांधी और व्यावहारिक अराजकवाद भाग-2 औद्योगिक क्रांति के बाद यूरोप में मजदूर वर्ग की स्थिति को सुधारने के जो प्रारम्भिक
सत्य के प्रयोग पार्ट -2 पहली कड़ी में आपने पढ़ा कि महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में जेल की सजा
सच्चिदानन्द सिन्हा प्रख्यात समाजवादी चिंतक हैं। इस वर्ष वे अपनी जिंदगी के 90 वां वर्ष पूरा कर 91 वां वर्ष
बदलाव प्रतिनिधि ‘ढाई आखर फाउंडेशन’, ‘अंडर द ट्री’ और ‘बदलाव’ की पहल पर बच्चे, महिलाएं और गांधी की ‘नई तालीम’