करोगे याद तो हर बात याद आएगी
कहां तक मन को ये अंधेरे छलेंगे, उदासी भरे दिन कभी तो ढलेंगे। 29 मई की रात हरेंद्र भाई ने
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
कहां तक मन को ये अंधेरे छलेंगे, उदासी भरे दिन कभी तो ढलेंगे। 29 मई की रात हरेंद्र भाई ने
एक अच्छी नौकरी और अच्छा घर हर किसी का सपना होता है, इसके लिए अपना घर-बार छोड़ गांव से बड़ी
कोरोना काल को ‘रिवर्स पलायन’ के तौर पर भी याद किया जाएगा। शहर की चकाचौंध छोड़कर बड़ी संख्या में लोग
कोरोना का संकट काल और इस बीच अहंकार की लड़ाई। सुनकर आपको अचरज जरूर होगा लेकिन बिहार के पूर्णिया जिले
कोरोना ने पूरी दुनिया में उथल-पुथल मचा दी है । हिंदुस्तान भी उससे अछूता नहीं रहा है । कल तक
नीलू अखिलेश कुमार तुम थे, तुम हो ,तुम ही रहोगे । अच्छा किया तुमनेजो बीमारी की तरहपटे आ रहे अपने
मोना चौहान के फेसबुक वॉल से साभार मैं भारत का नागरिक हूँहाँ मैं थोड़ा स्वार्थी हूँआज मुझे मतलब है खुद
सुनील श्रीवास्तव की फेसबुक वॉल से साभार उसे आप ने शराबकी दुकान पर देखा,उसकी फटी कमीज़ देखी,फटा पैंट भी देखा
नीलू अखिलेश कुमार क्यों कर रही हो इतना चीं-चींकिमेरे सारे काम रुक गए हैं ।देखोशाम ढली। तुम्हारे जैसेकितने ही पक्षीलौट
अरुण यादव गांव की हरियाली और शुद्ध दाना-पानी छोड़कर युवा बड़ी उम्मीद लेकर शहरों की तरफ भागे चले आते हैं।