पिता का ‘जज बेटा’ क्यों बन गया पत्रकार ?
वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश के फेसबुक वॉल से साभार सुबह-सुबह आज ‘बाबू’ की याद आई ! मां-पिता के गये वर्षों गुजर
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश के फेसबुक वॉल से साभार सुबह-सुबह आज ‘बाबू’ की याद आई ! मां-पिता के गये वर्षों गुजर
पशुपति शर्मा के फेसबुक वॉल से साभार मेरे पापा। हर बेटे की तरह मेरा भी दावा है सबसे अलहदा हैं
पुष्यमित्र के फेसबुक वॉल से साभारइस किसान ने अपनी टूटी सायकिल में स्कूटी का टायर जोड़ कर इसे मोबाइल पम्पसेट
लॉक डॉउन के शुरुआती दिनों से ही मैं विभिन्न संचार माध्यमों से देश के अलग अलग हिस्सों में रह रहे
पुष्यमित्र बारिश से गीली हुई सुबह में जब टहलने निकला तो एक मैदान में मक्के यह ढेर पड़ा मिला। साफ
सुनील श्रीवास्तव रास्ते के पत्थरों को वह मारता है बहुत ताकत से। प्रतिदिन सुबह और शाम जैसे किसी के गुनाह
कोरोना काल -7 कोरोना के क्रांतिवीरहो सके तो माफ कर देनातुमक्रांति की बात करोगेऔर हम तलाशेंगेशांति के फायदे तुमअपना करियरदांव
कोरोना काल- 6 अपनी उदासियोंपर लगा लेनाएक मास्क! जो तुम्हारेशुभचिंतक हैंवो कर लेंगेउदासियों का हिसाब! तीन लेयर वाले मास्कके भीतर
अपन जैसे घुमक्कड़ के लिए इन दिनों घर की यह बालकनी सबसे प्रिय जगह है, जहां दिन भर में दसियों
कुछ लोग इतने अलहदा होते हैं कि उनके न होने की कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती। मगर ऐसे