अब न रहा वो फगुआ, अब न रहे वो हुरियारे
प्रशांत पांडेय ज़िंदगी की आपा धापी में प्राथमिकताएँ बदल जाती हैं। मनुष्य समय के चक्र में फँसकर उसी के इशारे
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
प्रशांत पांडेय ज़िंदगी की आपा धापी में प्राथमिकताएँ बदल जाती हैं। मनुष्य समय के चक्र में फँसकर उसी के इशारे
ब्रह्मानंद ठाकुर बदलाव का होली मिलन समारोह इस बार बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में आयोजित हुआ । मुजफ्फरपुर के पीयर
विकास मिश्रा 13 साल उम्र रही होगी, तब गांव में रेडियो ही मनोरंजन का पूर्ण साधन था। रेडियो सिलोन पर
ब्रह्मानंद ठाकुर मुजफ्फरपुर जिले में औराई प्रखंड का बेनीपुर गांव। आज से 119 साल पहले 23 दिसम्बर 1899 को इसी
शिरीष खरे “देश भर के गांवों में ऐसा स्कूल मिलना मुश्किल है।”– यह दावा है मादलमुठी शाला (सांगली, महाराष्ट्र) के
नमस्ते, कल्पितजी ! मैं नीलाभ मिश्र हूँ, पटना से आया हूँ । नवें दशक का कोई शुरुआती वर्ष था, जब
शिरीष खरे किसी एक छोटे गांव की प्राथमिक शाला की अपनी वेबसाइट होना विशेष भले ही न लगे, लेकिन क्या
संजय पंकज मंजरियों की गंध लगी तो मन फागुन फागुन हो गया! प्रेमिल सुधियाँ अंग लगी तो
अरुण प्रकाश देश का अन्नदाता बदहाल है, उसके पीछे कई वजह हैं, सबसे बड़ी वजह है बाजार के हिसाब से
अनिल तिवारी मेरे कुछ मित्रों ने एपीसोड 8 के बाद पूछा कि बीआईसी किस तरह के नाटक किया करती थी?