चित्रा, कुछ तो लोग कहेंगे…
आनंद बक्षी साहब इस देश को गजब समझते थे तभी लिखा था ‘कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
आनंद बक्षी साहब इस देश को गजब समझते थे तभी लिखा था ‘कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है
शिरीष खरे आमतौर पर घर, खेत, खलिहान और दुकानों पर काम करने वाली महिलाओं के काम को काम नहीं माना
मैं जब अपने घर के करीब आता हूं तो एक ठंडी हवा का झोंका आता हैकई तरह की खुशबू घुली
विभावरी जी के फेसबुक वॉल से साभार सुनो लड़कियों! जब उसने दुनिया के किसी ट्रैक पर दौड़ कर पहली बार
प्रवीण कुमार दूबे के फेसबुक वॉल से साभार हज़ारों हाथ ऊपरवाले के सामने दुआ के लिए उठे तो दुआ कैसे
आनंद दत्ता दस जुलाई से जो हमने चमकी बुखार के पीड़ित बच्चों का सर्वेक्षण शुरू किया था, उसका पहला चरण
ब्रह्मानंद ठाकुर इस बार अयोध्या प्रसाद खत्री स्मृति सम्मान अरुणाचल प्रदेश की नवोदित कथा लेखिका जोराम यालाम को उनके उपन्यास
दिवाकर मुक्तिबोध मई में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलने की शायद उसकी उतनी चर्चा नहीं
पुष्यमित्र जिस तरह चमकी बुखार के वक़्त वैशाली में लोगों ने सांसद को घेरा था, उसी तरह कल झंझारपुर में
पिछले हफ्ते पटना के विद्यापति भवन सभागार में “गांधी और दलित” विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस