नजरिया वैज्ञानिक रखिए, ज़िंदगी के रंग बदल जाएंगे
दयाशंकर मिश्र दूसरों के बातों को दोहराने से पहले उन पर विवेकपूर्ण दृष्टि ठीक वैसे ही है, जैसे सड़क पर
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
दयाशंकर मिश्र दूसरों के बातों को दोहराने से पहले उन पर विवेकपूर्ण दृष्टि ठीक वैसे ही है, जैसे सड़क पर
पीएम के नाम अक्षय विनोद शुक्ल की पाती माननीय प्रधानमंत्री जी, वैसे तो पहले ही बहुत देर हो चुकी है,
राणा यशवंत के फेसबुक वॉल से साभार सुबह के साढे आठ बज रहे थे. फोन उठाया तो लरजती सी आवाज
रमेश रंजन सिंह आज मेरे सिर से पिताजी का साया हमेशा के लिए उठ गया। कोरोना ने पापा को हमसे
दयाशंकर मिश्र जीसस ने जहां शिक्षा पाई, उस जगह का नाम इसेनीस था. इसेनीस का अर्थ है, धैर्य रखने वाले.
सुजीत कुमार मिश्रा महाराष्ट्र का पुणे शहर जो इन दिनों कोरोना के हॉटस्पॉट की वजह से सुर्खियों में है, ऐसे
दयाशंकर मिश्र आज में आते ही कल बासी हो जाता है. एक और दूसरा कल, जिसकी अभी छाया भी नहीं
राजेश बादल अरसे बाद प्रेस क्लब ऑफ इंडिया को एक खांटी पेशेवर पत्रकार अध्यक्ष के रूप में मिला है ।
दयाशंकर मिश्र सबसे महत्व की चीज़ों को हम अक्सर आसानी से भुला देते हैं. ऐसे ही जीवन के दो तत्व
मौनशुक्रिया तुम्हारातुम न होते तोक्या ज़िंदा होते हम?मौनशुक्रिया तुम्हारातुम न होते तोक्या ज़िंदा रह पाते हम?मौनशुक्रिया तुम्हारातुम न होते तोक्या