तिरंगे के रंग हज़ार
तिरंगे के रंग आँखें तभी साफ़ साफ़ देख पाती हैं जब पेट में रोटी होती है, हाथ तिरंगे को
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
तिरंगे के रंग आँखें तभी साफ़ साफ़ देख पाती हैं जब पेट में रोटी होती है, हाथ तिरंगे को
बिहार के मधेपुरा से शुरू हुआ बदलाव का सफर अब अपने अगले मुकाम की ओर बढ़ चला है। आप सभी
तू आया है, तो जायेगा हम रोटी–भात खायेगा। तू लोहा–सोना खोदेगा हम खेत में नागर जोतेगा। तू हीरा-पन्ना बेचेगा हम
विकास दिव्यकीर्ति (एक हज़ार से ज़्यादा शेयर और करीब 3000 लाइक्स। विकास दिव्यकीर्ति ने जेएनयू प्रकरण पर संतुलित राय रखी
गांधी के इस देश में हम कहें चाहें कुछ भी लेकिन जब बड़े मौके आते हैं तो हम अहिंसा के
जेएनयू पर चर्चाओं का दौर जारी है। सोशल मीडिया पर जंग चल रही है। आपसे किए वादे के मुताबिक टीम
जेएनयू में ‘देशद्रोह’ पर हंगामा बरपा है। हंगामा ऐसा कि दो गुट बंट गए हैं। अब वैचारिक स्तर पर बातचीत
देवांशु झा सन चौरासी की बात है। रेडियो पर दोपहर डेढ़ बजे शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम आता था। स्कूल के
बासु मित्र लोक सभा और बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर के चुनावी प्रबन्धन कौशल को मिली सफलता के बाद
कीर्ति दीक्षित ‘का बताएं बेटा मर रहे… सब सरकार तो सरकार इसुर तक दुश्मन बनो बैठो किसान को तो ,