पद्मावत का नाम ‘खिलजावत’ क्यों न रखा ?
विकास मिश्र ‘पद्मावत’ देखकर लौटा हूं वो भी 3डी में। तीन घंटे लंबी इस फिल्म का नाम तो असल में
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
विकास मिश्र ‘पद्मावत’ देखकर लौटा हूं वो भी 3डी में। तीन घंटे लंबी इस फिल्म का नाम तो असल में
ब्रह्मानंद ठाकुर किसानों की बात सुनिए वित्त मंत्रीजी के पहले भाग में हमने दिल्ली में आयोजित संसद में किसानों को
राकेश कायस्थ यह समय भारतीय समाज के स्मृति लोप का है। याद्दाश्त गजनी की तरह आती-जाती रहती है। जो लोग
शिरीष खरे कुछ बनने की जल्दी में हुआ दृष्टि-दोष, फिर एक दिन अचानक एक घटना से कि जाना निकट की चीजें दूर या दूर
विकास मिश्रा बाबूजी से मिलकर गांव से लौटा हूं। करीब सात महीने बाद मिला, 93 साल की उम्र हो चली
ब्रह्मानंद ठाकुर हमारे देश में किसानों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है, फिर भी सरकारी योजनाओं और बजट में
पशुपति शर्मा राजकमल नायक। रंगमंच का ऐसा साधक, जिसने मंच पर तो एक बड़ी दुनिया रची लेकिन सुर्खियों के ताम-झाम
प्रियंका यादव राजधानी दिल्ली में एसडीएम ऑफिस में अपनी तरह का पहला फ्री लीगल क्लिनिक सेवा की शुरुआत की गई
शंभु कुशाग्र नववर्ष 2018 की पूर्व संध्या पर पुराने साल को विदाई देने और नए साल के स्वागत में पूर्णिया
अमरेश मिश्र कोरेगांव की लड़ाई का जश्न मैं कभी पचा नहीं पाया। फिर भी, आधुनिक भारत की जटिल जातीय राजनीति