सत्ताधारियों का अर्बन नक्सल का नया मुहावरा
पुष्यमित्र यह सच है कि बड़े शहरों में माओवादियों के सिम्पेथाइजर रहते हैं। ये दो तरह के होते हैं। पहले
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
पुष्यमित्र यह सच है कि बड़े शहरों में माओवादियों के सिम्पेथाइजर रहते हैं। ये दो तरह के होते हैं। पहले
राकेश कायस्थ के फेसबुक वॉल से साभार लंबे समय बाद गलती से न्यूज़ चैनल ऑन कर बैठा। सबसे हाहाकारी क्राइम
संदीप नाईक बहुत सारी खराब बातों के बावजूद बहुत सारी अच्छी बातें सेवाग्राम के आश्रम में मौजूद हैं, इनमें से
बदलाव प्रतिनिधि, ग़ाज़ियाबाद 26 अगस्त ’ 2018, रविवार, वैशाली,गाजियाबाद। “प्रेम सौहार्द भाई चारे” पर गीतों , कविताओं और गजलों से परिपूर्ण “पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” की 47वीं साहित्य गोष्ठी वैशाली
पशुपति शर्मा के फेसबुक वॉल से साभार मित्रो इन दिनों कुछ लोगों का सम्मान आम लोगों की ज़िंदगी से लाखों-करोड़ों
ब्रह्मानंद ठाकुर आई का बतकही बिलकुले एक नया लुक में था। असल में हुआ यह कि साउनीघड़ी पवनिए के दिन
शंभु झा ए भाई, देख के मत चलो…आगे भी सड़क तुम्हारे बाप की है, पीछे भी तुम्हारे पप्पा की है। बाएं-दाएं
संदीप नाईक मध्यप्रदेश का एक पैरवी समूह जो विकास, कुपोषण , शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों पर गत 15 वर्षों
सच्चिदानंद जोशी कुछ दिन पहले बचपन का एक दोस्त मिला। मेरे रूप को देखते ही बोला “अरे यार तुम तो
मृदुला शुक्ला वो जाने कौन सा साल बरस था तेज चटकती दुपहरी थी बस इतना याद है। कहाँ से लौटी