16 मौजों के मजरा गांव में चाय वाली की चर्चा
सियासत उसके लिए किसी अबूझ पहेली से कम नहीं थी। चुनाव लड़ना तो दूर उसके बारे में सोचने की फिर
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
सियासत उसके लिए किसी अबूझ पहेली से कम नहीं थी। चुनाव लड़ना तो दूर उसके बारे में सोचने की फिर
कीर्ति दीक्षित 24 घंटे नहीं बीते जुवेनाइल एक्ट को पास हुए कि एक और फिर खबर आई दिल्ली के कड़कड़डुमा
सत्येंद्र कुमार यादव हरियाणा में गांव प्रधान के चुनावों में शिक्षा की शर्त लागू कर दी गई है। व्यावहारिक रूप में
पुष्यमित्र बैल बाजार बिल्कुल खाली है। गाय बाजार में मुश्किल से 40-50 गायें और बछड़े हैं। हाथी बाजार में जो
अरुण प्रकाश क्या आप किसी ऐसे गांव के बारे में जानते हैं जहां ‘राजशाही’ रही हो। नहीं जानते हैं तो
सत्येंद्र कुमार यादव क्या किसी बच्चे के पिता की मौत हो जाए और उसकी मां विधवा हो जाए, ऐसे में
देश की आन-बान और शान के लिए मर मिटने वाला एक फ़ौजी जब समाजसेवा की ठान लेता है तो उसकी
एम अखलाक यह बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि भिखारी ठाकुर का कलाकार मन आखिर जागा कैसे? वाक्या कुछ
टीम बदलाव 13 दिसंबर को यूपी के गांवों की ‘सरकार’ बन गई। काफी उठापटक के बाद लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से ग्राम
प्रियंका यादव यूपी बोर्ड की परीक्षाओं की तरह इस बार पंचायत चुनाव में भी महिला ब्रिगेड ने इतिहास रचा है। घर