बेनीपुरी की 120वीं जयंती पर विशेष
ब्रह्मानंद ठाकुर रामवृक्ष बेनीपुरी की आज 120 वीं जयंती हैं, 23 दिसम्बर 1899 में मुजफ्फरपुर में जन्मे बेनीपुरी बहुमुखी प्रतिभा
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
ब्रह्मानंद ठाकुर रामवृक्ष बेनीपुरी की आज 120 वीं जयंती हैं, 23 दिसम्बर 1899 में मुजफ्फरपुर में जन्मे बेनीपुरी बहुमुखी प्रतिभा
पुरु शर्मा क्या वास्तव में हमारा शहर ऐसा ही था ? जैसी आज उसकी छवि पूरे प्रदेश में बन चुकी
ब्रह्मानंद ठाकुर मुजफ्फरपुर और इसके आस- पास के जिले वैशाली, सीतामढी, समस्तीपुर, शिवहर आदि प्रति वर्ष अप्रैल और मई महीने
बदलाव प्रतिनिधि, मुजफ्फरपुर अरुणाचल प्रदेश की हिन्दी लेखिका जोराम यालाम नावाम को उनके उपन्यास ‘ जंगली फूल’ और कथा संग्रह
पशुपति शर्मा के फेसबुक वॉल से साभार भेड़िया आया-भेड़िया आयावाले किस्से सेहमने बचपन मेंसीखा था सबकबार-बार का झूठकितना खतरनाक होता
शिरीष खरे उम्मीद की पाठशाला एक किताब भर नहीं बल्कि एक दस्तावेज है, जिसमें गोवा, महाराष्ट्र, मध्य-प्रदेश और छत्तीसगढ़ के
बदलाव प्रतिनिधि इसी देश में जहाँ मध्यवर्ग के बच्चे एसी कमरे में ठाठ से पढ़ाई ही नहीं करते बल्कि उन्हें
पशुपति शर्मा के फेसबुक वॉल से साभार तुम जिसेकुचलनेमसलनेऔर मिटा देने परआमादा हो…वो याद आएगाहमेशावो जिंदा रहेगाहमेशा जब कभीजुल्मो-सितम सेतुम
रविकांत जेएनयू एक बार फिर से सुर्खियों में है। जेएनयू में न सिर्फ तीन सौ प्रतिशत फीस वृद्धि की गयी
पुष्यमित्र अभी जिस ट्रेन से देहरादून से लौट रहा था, वह ट्रेन हावड़ा तक जाती है। जाहिर सी बात है,