ज़िंदगी का शॉर्टकट
एक जीवन और हज़ारों ख़्वाहिशें एक चाहत और हज़ार बंदिशें एक ईश्वर और हज़ार फरियाद एक राह और हज़ार मुश्किलात
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
एक जीवन और हज़ारों ख़्वाहिशें एक चाहत और हज़ार बंदिशें एक ईश्वर और हज़ार फरियाद एक राह और हज़ार मुश्किलात
आशीष सागर बुंदेलखंड में शायद ही कोई दिन ऐसा हो जब एक किसान खुदकुशी को मजबूर न हो । इसकी
बरुण सखाजी हमें स्मार्ट सिटी चाहिए, स्मार्ट सरकार, स्मार्ट कार्ड, स्मार्ट फोन, स्मार्ट पत्नी, स्मार्ट क्लास और स्मार्ट टीवी समेत
पन्ना लाल करगिल और ट्रॉय की जंग। युद्ध की दो कथाएं। शौर्य और पराक्रम की दो दास्तान। करगिल की जंग
पुष्यमित्र लहेरियासराय के बेता गामी पोखर को इन दिनों आप उसके चारों ओर बने किसी मकान की छत पर चढ़े
याद आये तुम जैसे याद आने लगते हैं बच्चे घर से बाहर जाते ही जैसे जान लगाकर उड़ती चिड़ियाँ को
अरुण यादव गांवों में गेहूं की कटाई-मड़ाई हो चुकी हैं । लगन बारात भी निपटा चुका है लिहाजा किसान कुछ
सत्येंद्र कुमार यादव दिल्ली के एम्स का नाम सुनते हैं लोंगों के मन में कई सवाल उठने लगते हैं। कैसे
निशांत जैन ‘स्वच्छ भारत का इरादा कर लिया हमने, देश से अपने, ये वादा कर लिया हमने।” अक्टूबर 2014 को
जयंत कुमार सिन्हा संगम ने ‘मोक्ष’ के तीन मार्ग तय किये -जलाना, दफनाना और प्रवाह करना। संगम यानि इलाहाबाद। संगम