8 घंटे की नौकरी और पगार महज 42 रुपये
ब्रह्मानंद ठाकुर मुंशी प्रेमचंद की कहानी सद्गति का किरदार घासीराम हो या फिर रामवृक्ष बेनीपुरी के ‘कहीं धूप कहीं छाया’
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
ब्रह्मानंद ठाकुर मुंशी प्रेमचंद की कहानी सद्गति का किरदार घासीराम हो या फिर रामवृक्ष बेनीपुरी के ‘कहीं धूप कहीं छाया’
राकेश कायस्थ अनुपम जी को मैं बहुत अच्छी तरह जानता था। लेकिन कभी मुलाकात नहीं हुई। एक दिन अचानक उनके
पुष्यमित्र सुबह से मन अनुपम मिश्र जी की यादों में अटका है। एक पल के लिये भी खुद को मुक्त
रूपेश कुमार सोशल मीडिया जनक्रांति का सशक्त माध्यम है। जिस गति से समाज बदल रहा है उसमें सोशल मीडिया की भूमिका
लखनऊ की धरती एक ऐतिहासिक पल की गवाह बनी । 15 साल बाद भारत जूनियर वर्ल्ड हॉकी चैंपियन बना है
कीर्ति दीक्षित निर्भया के माता पिता चार साल बाद भी बेटी को न्याय दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के चक्कर
इति माधवी ‘नाला सोपारा’ एक ऐसा उपन्यास जो एक ऐसे समुदाय पर आधारित है जिसके बारे में हर कोई बात
अरुण यादव पुलिस को लेकर हमारे जेहन में हमेशा एक नकारात्मक छवि ही रही है। लेकिन जरा सोचिए वही पुलिस
अनु गुप्ता भारत एक ऐसा देश है जहां हर सौ कदम पर भाषा बदल जाती है। इस देश को अनेक और
वही लोग ओवैसी से इस वक़्त उसके सांप्रदायिक बयान को ले कर चिढ़े हुवे हैं जिन्होंने उसे चुना ही सांप्रदायिक