कन्हैया से गुरमेहर तक ट्रैप में क्यों फंसा मीडिया?
पुष्यमित्र अपने देश में राजनीति ने काम करने का बड़ा दिलचस्प तरीका अख्तियार कर लिया है, दुर्भाग्य यह है कि
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
पुष्यमित्र अपने देश में राजनीति ने काम करने का बड़ा दिलचस्प तरीका अख्तियार कर लिया है, दुर्भाग्य यह है कि
पिछले कई घंटों से सोशल मीडिया पर कामता सिंह के निधन की सूचना के बाद पत्रकार साथियों के गमजदा संदेश
संजय बिष्ट के फेसबुक वॉल से दुनिया किसी के न रहने के बाद भी चलेगी… वक्त दौड़ेगा वैसे ही आंसूओं को
मृदुला शुक्ला जरा पलटिये माइथोलोजी से लेकर इतिहास की पोथियाँ, स्त्रियां कब रही हैं युद्ध के समर्थन में ? ये
पुष्यमित्र जरा इस तसवीर को देखिये, आधा दर्जन से अधिक लोगों की बाहों में स्लाइन की बोतलें लगी हुई हैं।
धीरेंद्र पुंडीर कारगिल में एकाएक कही से युद्ध आ गया और उसने हिंदुस्तानी जवानों को मार गिराया। ये युद्ध कहां
पुष्यमित्र गुरमेहर कौर शायद यही नाम है। मेरे फेवरिट बैट्समैन वीरेंद्र सहवाग की वजह से आज यह नाम हर किसी
धीरेंद्र पुंडीर चुनाव की टेबल पर तमाम दल लेटे हुए हैं, जनता ऑपरेशन में जुटी हुई है। कैची हाथ में
‘पेड़ों की छांव तले रचना पाठ के अंतर्गत 29वीं साहित्यिक गोष्ठी वैशाली गाजियाबाद स्थित हरे भरे मनोरम सेंट्रल पार्क में
धीरेंद्र पुंडीर ये मुजफ्फनगर की तारिक फतेह पर चिंता है। घर आया था लिहाजा सुबह के अखबार में दिखा। ये