मीना खलको!
शिरीष खरे खबर लिखते समय कई चरित्र ऐसे होते हैं जो हमारे दिल और दिमाग में बैठ जाते हैं। कई
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
शिरीष खरे खबर लिखते समय कई चरित्र ऐसे होते हैं जो हमारे दिल और दिमाग में बैठ जाते हैं। कई
ब्रह्मानंद ठाकुर देश महात्मा गांधी के चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष मना रहा है तो जाहिर है कि मुजफ्फरपुर इस आयोजन
ब्रह्मानंद ठाकुर औरत ने जन्म दिया मर्दों को , मर्दों ने उसे बाजार दिया। जब जी चाहा मसला-कुचला, जब जी
विकास मिश्रा हमारे एक पुराने सहयोगी के दोस्त ने उनसे जरूरत पड़ने पर उनकी कार मांग ली थी। उन्होंने कार
धीरेंद्र पुंडीर “हर बार जब भी मेरा बेटा अपनी मां के लिए रोता है, मैं सहन नहीं कर पाता हूं। और मैं उसके बिना अकेला महसूस करता हूं।
ब्रह्मानंद ठाकुर हमारे देश का अन्नदाता बदहाल है, लेकिन सरकारें खुशहाल । कोई किसानों की कर्जमाफी का वादा करता है
ब्रह्मानंद ठाकुर बात उन दिनो की है जब देश को आजाद हुए दस –बारह साल ही हुए थे। गांव सच्चे
रुपेश कुमार यूँ ही मोबाइल का फोटो चेक करते हुए इस बार मेले में 08 मार्च को सर्कस देखने के
ब्रह्मानंद ठाकुर का जन्म बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जनवरी 1952 में निम्न मध्यम वर्ग परिवार में हुआ । पढ़ने के
ब्रह्मानंद ठाकुर महाकवि निराला के ‘कुकुरमुत्ता ‘ने आभिजात्य गुलाब को जब हरामी खानदानी कहकर ललकारते हुए कहा, ‘देख मुझको, मैं