गांधी को महात्मा बनाने की ‘चम्पारण कथा’ की पहली झलक
पुष्यमित्र चंपारण सत्याग्रह पर आधारित इस किताब को लिखना जब शुरू किया था तो चम्पारण सत्याग्रह की बहुत कम जानकारियां
15 अगस्त से ‘बतइयो’ प्लेटफ़ॉर्म – डिजिटल ‘आज़ादी’ का नया अध्याय
शहर-शहर किसान आंदोलन की तेज होती ‘धार’
बागमती तटबंध पर ‘सुशासन’ का ‘विश्वासघात’ और जनता का आक्रोश
मीडिया के दिग्गज देख लें आंदोलनों का ‘देस-गांव’
पूर्णिया में मीडिया कार्यशाला की ‘सोपान कथा’
एक कप प्याली की ऊष्मा और मिठास से भरे सोलंकी सर
अपने गुरु से नाता जोड़, कहां गए मेरे गुरु हमको छोड़
इलाहाबाद में रंग प्रेमियों ने मनाया बंसी दा की स्मृतियों का उत्सव
सागर में आकाश चौरसिया की मल्टी लेयर फार्मिंग की कार्यशाला
बंसी कौल के लिए थिएटर ही रहा पहला और आखिरी परिवार
पुष्यमित्र चंपारण सत्याग्रह पर आधारित इस किताब को लिखना जब शुरू किया था तो चम्पारण सत्याग्रह की बहुत कम जानकारियां
ब्रह्मानंद ठाकुर आजादी के 70 बरस बाद भी हिंदुस्तान में ना तो शिक्षा आम आदमी तक पहुंच सकी और ना
न्यूज चैनल, अखबार, सोशल मीडिया में पुलिस के नाकारात्मक पक्ष की खबरें ज्यादा चलती हैं । वजह भी साफ है
अरुण प्रकाश आए दिन देश में धरना-प्रदर्शन हो हंगामा होता रहता है, लेकिन क्या हमने कभी समान शिक्षा और बेहतर
पशुपति शर्मा सुन्नर नैका। कोसी मइया की धाराओं और उसके प्रवाह की तरह कई तरह की अनिश्चितताओं और आवेग के साथ
बदलाव प्रतिनिधि, जौनपुर अगर कुछ करने का जुनून और जज्बा हो तो आपको मंजिल तक पहुंचने से दुनिया की कोई
एस के यादव देश में नौकरी नहीं मिलने पर अक्सर घर की माली हालत सुधारने के लिए गांव के नौजवान
पशुपति शर्मा आर्ट सर राजेंद्र प्रसाद गुप्ता के साथ मेरी 4 जून 2017 को हुई बातचीत की पहली किस्त 25
एस के यादव सर आपकी बात तो ठीक है… लेकिन कब तक ऐसा चलता रहेगा ? ये सवाल वरिष्ठ पत्रकार
श्याम सुंदर ज्याणी फेसबुक पोस्ट, 11 जुलाई 2017। जाट को धरतीपुत्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि जाट-जाटनी कंधे से कंधा