फिल्मी जगत को दोस्ती के लिए छोड़कर करीब सालभर पहले मीडिया में वापसी करने वाले विनोद कापड़ी एक बार फिर मीडिया को छोड़ अपने ‘पहले प्यार’ की ओर लौट चले हैं। कुछ दिन पहले जब उन्होंने अपनी नई फिल्म का ऐलान किया तभी से कयास लगाये जा रहे थे कि टीवी 9 भारतवर्ष में विनोद कापड़ी की पारी खत्म होने वाली है। इन कयासों के बीच कापड़ी ने एक भावनात्मक पत्र के साथ साथियों से माफी ली और मीडिया से विदा हो चले। बदलाव पर पढ़िये साथियों को भेजा गया विनोद कापड़ी का पत्र और एकटिप्पणी

VINOD AKPDI

व्हाट्सएप पर भेजा गया विनोद कापड़ी का पत्र

दोस्तों… कुछ मीठा हो जाए… 
शाम 6.15 बजे आइए कैफ़ेटेरिया में .. 
जलेबी और समोसे के साथ…कुछ जश्न हो जाए…शानदार जानदार काम करने का और आप से जुदा होने का ?? .. 
कई दोस्तों ने पिछले कुछ दिनों में कई बार कहा कि सर launch party कब है? तो मैं उनसे कहता था farewell party की तैयारी करो…तो इसे वो पार्टी भी समझ लिया जाए ?? 
बात बस इतनी कहनी है कि जीवन भर अपने कुछ उसूलों पर अमल किया.. ये छोटे मोटे उसूल ही आपको उर्जा देते है।

पिछले कुछ दिनों में कई बार लगा कि चलिए कुछ सुलह सफ़ाई समझौते कर लेते हैं… लेकिन वो जो आपका अंतर्मन होता है ना… वो आपसे जब सवाल करने लगता है तो फिर आप अपने मन की सुनते है... क्योंकि वही अंतर्मन आपको खुद अपने लिए सम्मान दिलाता है।

और दूसरी बात.. आप सब जानते हैं कि फ़िल्म मेरा पहला प्यार है… ये फ़िल्में ही हैं… जिस की वजह से पाँच साल पहले मैंने जमे जमाए टीवी करियर को छोड़ दिया था… मैंने वापसी की थी अपने 23 साल पुराने दोस्त रवि प्रकाश के लिए… जिसने हाड़ माँस से TV9 को पैदा किया…बनाया… और यहाँ तक पहुँचाया… मेरे सारे दोस्त जानते हैं कि रवि नहीं होता तो मैं टीवी में नहीं आता… 

हाँ .. इस मौक़े पर मैं उन सबसे माफ़ी माँगना चाहूँगा जो मुझ पर भरोसा करके यहाँ आए.. इस तरह इस क़दम के लिए मैं आपका गुनहगार हूँ पर आप अगर मुझे जानते हैं तो आप मेरी मजबूरी समझेंगे… फिर भी आपका विश्वास तोड़ने के लिए आपसे बार-बार माफ़ी माँगता हूँ.. सच कहूँ तो ये वो आप ही लोग थे कि जिनकी वजह से मैंने सोचा कि चलो थोड़े बहुत समझौते जीवन में कौन नहीं करता.. मुझे भी कर लेने चाहिए.. लेकिन फिर उसकी भी एक सीमा होती है…

साथ ही मैं आप सब को आश्वस्त करना चाहता हूँ TV9 एक शानदार ग्रुप है… 16 साल में इस ग्रुप ने जानदार काम किया है…आगे भी इस ग्रुप की बड़ी योजनाएँ हैं…नए मैनेजमेंट के भारतवर्ष को लेकर बड़े प्लान हैं… इसलिए आप सब लोग बिलकुल भी चिंता ना करें… सब कुछ यथावत चलता रहेगा… शायद और बेहतर होगा… कम से कम अब न्यूज़रूम में कोई चिल्लाने वाला नहीं होगा… News में कुछ प्रयोग किए थे…जिन पर मुझे गर्व है … आप लोग उसे चलाते रहेंगे तो बेहद ख़ुशी होगी… 

आख़िरी बात .. 
आप सब जानते हैं .. 
टीवी पत्रकारिता के लिए ये एक बेहद मुश्किल वक्त है… मुझे बस इतना ही कहना है कि आप सिर्फ निष्पक्ष भी रहेंगे तो पत्रकारिता की बहुत बड़ी सेवा हो जाएगी… 
आप सबको बहुत सारा प्यार… आप सब को और भारतवर्ष के सपने को हमेशा मिस करूँगा…. 
BIG THANKS to all of you. 
All my love and best wishes friends 

पशुपति शर्मा की एक टिप्पणी जिसे उन्होंने फेसबुक पर साझा किया है

कुछ ‘छोटे-मोटे उसूलों’ के बूते ‘बड़े-बड़े फ़ैसले’ करने का दम कुछ ही संपादकों या व्यक्तियों के पास शेष रह गया है। और जब भी ऐसे किसी ‘फ़ैसले’ की अनुगूंज सुनाई देती है तो एक उथल-पुथल सी मच जाती है।

‘अंतर्मन की आवाज़’ कैसे सुनी जाए और ‘खुद का सम्मान’ कैसे बचाया रखा जाए- इस ‘तड़प’ का बचा रह जाना, भले ही ‘पीड़ादायी’ अनुभव हो, पर असल में है काफी ‘सुखद’।

तमाम भीड़-भाड़ के बावजूद अंतत: आदमी रहता अकेला ही है और उस अकेलेपन में खुद से सम्मानपूर्वक सामना करना है तो उसकी एक ‘कीमत’ भी चुकानी ही होती है।

सच है कि ‘थोड़े बहुत समझौते’ जीवन में हर कोई करता है, लेकिन अगर ‘समझौतों’ की लत लग जाए तो फिर जीवन में बस ‘समझौते’ ही बचते हैं, बाकी सब ‘हवा’ हो जाता है।

तमाम साथियों से ‘माफ़ी’ के साथ आप अपने ‘पहले प्यार’ की ओर लौट रहे हैं। ज़िंदगी के इस अध्याय के ‘माफ़ीनामों’ का हिसाब यहीं कर दीजिए। जो कह सके उन्हें भी, और जो न कह सके उन्हें भी, ‘माफ़’ कर आगे बढ़िए।

हम बदलेंगे तो देश बदलेगा ज़रूर।

पशुपति शर्मा