Author Archives: badalav

सुन हो सरकार

जब्बार भाई की सांसें छीन लीं, उनका आशियाना बख्शेंगे हम?

सचिन कुमार जैन जब्बार भाई बात मुआफ़ी के लायक तो नहीं है, पर फिर भी कहना चाहता हूँ मुआफ़ कर दीजियेगा. हमने बहुत देर कर दी. यह तो नहीं ही…
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मेरा गांव, मेरा देश

मीडिया की पराली वाली धुंध में ‘सोलंकी वाली सांसें’

पशुपति शर्मा की फेसबुक वॉल से साभार सौम्यता, सरलता और सहजता... यूं तो ये व्यक्ति के बड़े गुण हैं लेकिन कुछ लोग इसे ही कमजोरी मानने की भूल कर बैठते…
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आईना

ईश्वर का पथगमन

निखिले कुमार दुबे के फेसबुक वॉल से साभार दीवाली के बाद ईश्वर का पथगमनघर से निकाले गए फुटपाथ मे बैठे भगवानचुनरी जो ईश्वर का श्रृंगार थीअब सड़क का विकार हैकाफी…
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सुन हो सरकार

कम फीस की कीमत तुम नहीं समझोगे साहब!

विभावरी के फेसबुक वॉल से साभार इलाहाबाद वि.वि. से एम.ए. करके आई एक निम्न मध्यवर्गीय लड़की के बतौर राजधानी के पॉश इलाके में स्थित इस जगह ने मुझे कभी भी…
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मेरा गांव, मेरा देश

मुजफ्फरपुर में 13 नवंबर को चमकी पर रिपोर्ट

बदलाव प्रतिनिधि, मुजफ्फरनगर फाइल फोटो 2019 में चमकी बुखार की मौतों ने हम सब को किस कदर परेशान किया था, यह आप और हम आज तक नहीं भूले हैं। हम…
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बिहार/झारखंड

‘अफ़सरी’ या ‘मास्टरी’, अखिलेश के मन में कोई दुविधा न रही!

सामाजिक सरोकारों पर अर्थतंत्र कब हावी हो गया, ये कोई समझ ही नहीं पाया। समाज में आपकी पहचान अब आपके व्यवहार से नहीं आपके पैसे से होती है। यानी आपका…
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माटी की खुशबू

नौकरी की तेरहवीं

पशुपति शर्मा के फेसबुक वॉल से साभार आज तेरहवीं हैकोई नहीं हैउसके साथवो अकेले सोच रहा हैअब क्या? उसनेनहीं रखाकोई'श्राद्ध भोज'! बची ही नहींकोई श्रद्धान ऊपरवाले परन साथ वालों परऔर…
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चौपाल

गांधीजी की कल्पना का भारत और हमारा गांव

तस्वीर- आशीष सागर दीक्षित के फेसबुक वॉल से साभार। सेवाग्राम में प्रार्थना सभा। ब्रह्मानंद ठाकुर महात्मा गांधी की कल्पना का भारत स्वशासी ग्रामीण इकाइयों का था, गांधी और अराजकवाद के…
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परब-त्योहार

घाटों पर तीन दिन की ‘चांदनी’, फिर अंधेरी रात…

पुष्यमित्र छठ जीवित देवताओं का पर्व है। यह सिर्फ सूर्योपासना का ही पर्व नहीं है, जल धाराओं की उपासना का भी पर्व है। तभी तो पिछ्ले तीन चार दिनों से…
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परब-त्योहार

यह दुनिया माया है

पुष्य मित्र जब तक भारत गांवों का, किसानों का देश था, तब तक दीपावली पर हर घर में लक्ष्मी आती थी। अगहन में जब धान के बोझे खलिहान में उतरते…
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