Author Archives: badalav

मेरा गांव, मेरा देश

3 घंटे और 2 इंटरवल वाले नाटकों का दौर

अनिल तिवारी मेरे कुछ मित्रों ने एपीसोड 8 के बाद पूछा कि बीआईसी  किस तरह के नाटक किया करती थी? तो मैं सभी मित्रों को बता देना चाहता हूँ कि…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

बदलाव पाठशाला – हम पढ़ेंगे, खेलेंगे और कूदेंगे

बदलाव प्रतिनिधि मुजफ्फरपुर के बंदरा प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी विजय कुमार ठाकुर ने प्रखंड के पियर गांव में टीम बदलाव द्वारा संचालित नि: शुल्क पाठशाला के बच्चों के लिए…
और पढ़ें »
परब-त्योहार

व्यक्ति की इच्छाओं का द्वंद्व- हयवदन

संगम पांडेय अक्षरा थिएटर में लाइट्स वगैरह की कई असुविधाएँ भले हों, पर इंटीमेट स्पेस में प्रस्तुति का घनत्व अपने आप काफी बढ़ जाता है। फिर वशिष्ठ उपाध्याय की प्रस्तुति…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

क्या जंगलों में आदिवासियों का होना अच्छे पर्यावरण का प्रतीक नहीं?

शिरीष खरे शिरीष खरे की बतौर पत्रकार यात्रा की ये पांचवीं किस्त है। मेलघाट का अनदेखा सच पाठकों तक शिरीष की नजरों से पहुंच रहा है। उनकी विचार यात्रा में…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

फूलों की खेती से बदलेगी किसान की किस्मत

बदलाव प्रतिनिधि, सेहमलपुर फूलों की खेती के फायदों से आम किसानों को अवगत करवाने के लिए टीम बदलाव ने जौनपुर के सेहमलपुर गांव में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जिसके…
और पढ़ें »
आईना

फाइव स्टार सुविधाओं वाला शुरुआती रंगकर्म

अनिल तिवारी 1968 में 15 बर्ष की उम्र में 'टी पार्टी' नाटक में अभिनय करने के पश्चात मील एरिया में यह चर्चा गर्म होने लगी कि अनिल तिवारी नाटकों में…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

सरकार को एहसास नहीं-भूख क्या होती है?

शिरीष खरे शिरीष खरे की बतौर पत्रकार यात्रा की ये चौथी किस्त है। मेलघाट में उन्होंने महसूस किया कि भूख क्या होती है? विचार यात्रा का सिलसिला फिर से शुरू…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

सेहमलपुर गांव में 17 फरवरी को फूलों की खेती पर कार्यशाला

टीम बदलाव प्यार का सप्ताह है, दुनिया वैलेंटाइन डे मना रही है, तो क्यों न अपने गांव की गलियों की सैर की जाए, क्यों ना माटी की महक महसूस की…
और पढ़ें »
परब-त्योहार

समाजवाद के आदि नायक शिव के प्रेम का साझा उत्सव

ब्रह्मानन्द ठाकुर  महा शिवरात्रि यानी आदिम समाजवादी परिवार के मुखिया शिव के विवाह का दिन। हां, आदिम समाजवादी व्यवस्था मतलब जहां परस्पर दो विरोधी प्रवृतियों वाले जीव-जंतु साथ रहा करते…
और पढ़ें »
चौपाल

मेलघाट में भूख से मरते बच्चे और 90 के दशक का सन्नाटा

शिरीष खरे मेलघाट में शिरीष, साल 2008 शिरीष खरे की बतौर पत्रकार यात्रा की ये तीसरी किस्त है। मेलघाट से लौटते हुए ट्रेन में उनकी विचार यात्रा का सिलसिला फिर…
और पढ़ें »