Author Archives: badalav

बिहार/झारखंड

राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती पर 23 को मुजफ्फरपुर में विशेष कार्यक्रम

बदलाव प्रतिनिधि, मुजफ्फरपुर  राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर  की 111वीं जयंती के अवसर पर  23 सितम्बर को मुजफ्फरपुर में लंगट सिंह महाविद्यालय में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। …
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

कौशलेंद्र- एक धीमी मौत के लिए आश्वस्त हैं हम सभी

कौशलेंद्र प्रपन्ना पशुपति शर्मा शनिवार, सुबह… एक मित्र से सुना था उसका नाम-कौशलेंद्र। बहुत कुछ नहीं जानता, उसके बारे में। मित्र ने बताया- शिक्षा के क्षेत्र का 'एक्टिविस्ट' था। किसी…
और पढ़ें »
यूपी/उत्तराखंड

‘आप लोग जैसी हिंदी बोलते हैं उसमें बहुत दोष है’

आज से करीब 30-35 साल पहले की बात है । मैं एक स्कूल में बतौर शिक्षक कार्यरत था ।  घर से 12 किलोमीटर  की दूरी साइकिल से तय करने के बाद…
और पढ़ें »
यूपी/उत्तराखंड

रचना प्रक्रिया का ‘अधूरा साक्षात्कार’

पशुपति शर्मा बंसी कौल, रंग निर्देशक 23 जुलाई को ग्रेटर नोएडा में बंसी दा से एक और मुलाकात। कमरे में बिस्तर पर लेटी माताजी और बाहर सोफे पर बैठे बेचैन…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

सेंटिमेंटल होने से मत डरिए जनाब

पशुपति शर्मा भावुक हो जाना भला भी है बुरा भी। भावुकता में संतुलन बिगड़ जाता है। भावनाओं पर संतुलन बना या बिगड़ा ये आप तय कीजिए। मैं तो शिक्षक दिवस…
और पढ़ें »
आईना

‘साक्षात्कार अधूरा है’- गुरु से गुरु तक की यात्रा

पशुपति शर्मा बंसी दा के साथ काम करने का अपना अनुभव है। रचना-कर्म के दौरान एक आत्मीय रिश्ता रहता है और यही गुरु-शिष्य परंपरा का अपना अनूठापन है। शिक्षक दिवस…
और पढ़ें »
चौपाल

गुरु बंसी कौल ने अपने गुरु से यूं जोड़ दिया नाता

पशुपति शर्मा शिक्षक दिवस पर तमाम गुरुजनों को नमन। इस बार रंगकर्म के गुरु बंसी कौल से जुड़ी कुछ यादें शेयर कर रहा हूं। गुरु जो आदेश दे, उसे पूरा…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

दुष्यंत के शहर में, दुष्यंत की तासीर अभी बाक़ी है !

राजेश बादल एक सितंबर को दुष्यंत कुमार संग्रहालय में सबने दिल की गहराइयों से दुष्यंत को याद किया। रात देर तक सोचता रहा कि चालीस बरस पहले उन्होंने अपनी रचनाओं…
और पढ़ें »
बिहार/झारखंड

कोसी में जल प्रलय के 11 बरस और डरे-सहमे लोग

फाइल फोटो पुष्यमित्र इन दिनों 2008 की कोसी बाढ़ के इलाके में घूम रहा हूं। यह इलाका नेपाल से सटा है और भीमनगर बराज के भी पास है। 2008 की…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ मुहिम और ट्रेन में बीतता एक बेटी का बचपन

आशीष सागर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ सुनने में ये स्लोगन काफी अच्छा लगता है, लेकिन इसको साकार करने के लिए हमारा सिस्टम कितना संजीदा है इसको अगर समझना हो तो कभी…
और पढ़ें »