अरुण यादव


एक बार फिर मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग पर स्कूली बच्चे ड्राइवर और सिस्टम की लापरवाही का शिकार हो गए। यूपी के कुशीनगर में बच्चे घर से निकले तो थे स्कूल जाने के लिए लेकिन लौटे तो घरवालों की गोद में खामोश पड़े थे। स्कूल जाते वक्त दुदुई रेलवे स्टेशन के पास  मानव रहित क्रॉसिंग पर स्कूल वैन ट्रेन की चपेट में आ गई जिसमें 13 बच्चों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि क्रॉसिंग पर तैनात रेलवे मित्र ने कैब ड्राइवर को रोकने की कोशश की लेकिन कैब ड्राइवर उसकी बात अनसुनी कर आगे बढ़ गया और ये हादसा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कैब ड्राइवर ईयर फोन लगाए हुए था और रेलवे मित्र की आवाज नहीं सुन सका।

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी

आप इसे मानवीय लापरवाही समझें या फिर कुछ और लेकिन अब कई मांओं की गोद सूनी हो गई। हर हादसों की तरह इस बार भी मुआवजे का मरहम लगा दिया गया है, लेकिन क्या ये मुआवजा एक मां की ममता लौटा पाएगा। क्या सरकार की सहानुभूति से एक पिता को उसका बेटा मिल पाएगा। कुशीनगर की ये घटना पूरी तरह मानवीय लापरवाही का नतीजा है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने भी अपने बयान में इसे ही दोहराया है। लोहानी ने कहा कि- लोगों को रेलवे क्रॉसिंग पार करते वक्त सावधानी बरती चाहिए,  इसका दूसरा कोई विकल्प नहीं है । हम ऐसा कोई कदम नहीं उठा सकते जो लापरवाही को पूरी तरह रोक सके। हालांकि रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ये बयान देते वक्त रेल मंत्री के वाे वादे शायद भूल गए, जिसमें उन्होंने मानव रहित क्रॉसिंग को फुलप्रूफ बनाने की बात कही थी।

हम आपको रेल मंत्री पीयूष गोयल का बयान याद दिलाएं उससे पहले सवाल ये है कि आखिर देश में मानव रहित क्रॉसिंग पर इतने हादसे होते हैं फिर भी सरकारें कोई कारगर कदम क्यों नहीं उठातीं। रेल मंत्रालय खुद इस बात को मानता है कि देश में हर साल रेल हादसों में जितनी मौतें होती है उसमें करीब 35-40 फीसदी मानव रहित क्रासिंग की वजह से होती हैं। 

फ़ाइल फोटो

साल 2012 में अनिल ककोदकर पैनल ने एक रिपोर्ट दी और पांच साल के भीतर देश से मानव रहित क्रॉसिंग को खत्म करने की मांग की ।रिपोर्ट आए 6 साल बीत चुके हैं, सरकार भी बदल चुकी हैं फिर भी मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग की सूरत नहीं बदली। जब न्यूज़ पोर्टल पर इससे जुड़ी ख़बरें खंगाली तो कई हैरान करने वाले तथ्य सामने आए। कुछ जगहों पर देश में कुल क्रॉसिंग की संख्या करीब 30 हजार बताई गई है जिसमें करीब 7 हजार मानव रहित हैं। हालांकि सरकारी और वैधानिक आंकड़े कुछ और मिले। खैर हम बात सरकारी आंकड़ों की ही करते हैं।

2017-18 के बजट में तीन साल के भीतर यानी 2020 तक देश से कुल 4267 मानव रहित क्रॉसिंग खत्म करने का लक्ष्य रखा गया, जिसे सितंबर 2017 में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने काम में तेजी दिखाते हुए घटाकर एक साल कर दिया, जिसके मुताबिक सितंबर 2018 तक रेलवे को पूरी तरह मानव रहित क्रॉसिंग से मुक्त किए जाने की बात कही गई। रेल मंत्री पीयूष गोयल के बयान के करीब पांच महीने बाद फरवरी 2018 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रेलवे के लिए  एक लाख 48 हज़ार 528 करोड़ रुपये का बजट पेश किया जिसमें एक बार फिर मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग को खत्म करने की बात की गई । खास बात ये रही कि इस बार जेटली जी ने मानव रहित क्रॉसिंग को खत्म करने की समय सीमा 2017 के बजट के तीन साल के लक्ष्य को कम कर दो साल कर दिया । 2018-19 के बजट में भी मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग की संख्या करीब पिछले बजट की तरह ही 4267 ही बताई गई।

बजट में जो आंकड़े बताए गए उसके मुताबिक एक साल में मानव रहित क्रॉसिंग के मोर्चे पर कोई कमी नहीं आई। इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेल रेल मंत्रालय मानव रहित क्रॉसिंग को लेकर कितना गंभीर है। लिहाजा बच्चे आपके हैं, जान आपकी है। इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आपकी है। रेलवे क्रॉसिंग पर संभल कर जाएं, स्कूल वैन बुक करने से पहले तसल्ली कर लें कि ड्राइवर नियमों का पालन करता है या कि नहीं। ताकि कुशीनगर जैसे हादसों की तस्वीरें फिर न नजर आएं।


arun profile1अरुण यादव उत्तरप्रदेश के जौनपुर के निवासी। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र। इन दिनों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय।

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