वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश के फेसबुक वॉल से साभार

प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में आने का तात्कालिक तौर पर पूर्वी उत्तरप्रदेश में कांग्रेस की स्थिति पर जितना असर पड़ेगा, उससे कहीं ज्यादा भाजपा पर पड़ना चाहिए ।निस्संदेह, मोदी-शाह की जोड़ी आज थोड़ी चिंतित होगी। भाजपा के सवर्ण वोटबैंक में अब कांग्रेस कुछ न कुछ सेंध जरुर लगायेगी। यह भाजपा के लिए चिंताजनक स्थिति हो सकती है।फिलहाल, यूपी से लोकसभा में कांग्रेस की सिर्फ दो सीटें हैं। प्रियंका राजनीति में नहीं आतीं तो भी यूपी से कांग्रेस की सीटों में इजाफा होना ही था। पर प्रियंका के आने से कुछ और बढ़ोत्तरी हो सकती है। पर यूपी में कांग्रेस की सांगठनिक और जनाधार की स्थिति बहुत बुरी है। ऐसे में यह अंदाजा लगाना कठिन नहीं कि महज तीन महीने के दरम्यान प्रियंका कितना बड़ा चमत्कार कर सकेंगी। हां, राजनीति में अपनी लंबी पारी से वह पार्टी को जरुर फायदा पहुंचा सकती हैं।

ये बात सही है कि यूपी में इस वक्त कांग्रेस के लिए भी संभावनाएं और अवसर हैं। पर उसका काम सिर्फ नेता या संगठन प्रभारी बदलने से नहीं चलेगा। नेता के साथ नीतियां भी बदलनी होंगी। सिर्फ मुंहजबानी नहीं, जमीनी स्तर पर भी। मुझे नहीं लगता कि नीतिगत बदलाव के लिए वह फिलहाल तैयार है ।यह बात हाल की कुछ बड़ी संसदीय और राजनीतिक परिघटनाओं पर कांग्रेस के रुख और फैसले की रोशनी में मैं कह रहा हूं। समावेशी सोच और राजनीति के प्रति अपनी वचनबद्धता के बावजूद राहुल गांधी अब तक देश की सबसे पुरानी पार्टी का मिजाज और मन नहीं बदल पाए हैं।
हां, प्रियंका गांधी के राजनीति में आने का कांग्रेस को कुछ फायदा जरुर मिलेगा, सिर्फ यूपी में नहीं, देशव्यापी स्तर पर, दक्षिणी राज्यों में भी । पर यूपी जैसे जटिल राजनीति वाले सूबे में कांग्रेस अगर तत्काल किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए है तो वो शायद संभव नहीं। चमत्कार तो तब होगा, जब वह नेता के साथ अपनी नीतियां भी बदले।


उर्मिलेश/ वरिष्ठ पत्रकार और लेखक । पत्रकारिता में करीब तीन दशक से ज्यादा का अनुभव। ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘हिन्दुस्तान’ में लंबे समय तक जुड़े रहे। राज्यसभा टीवी के कार्यकारी संपादक रह चुके हैं। दिन दिनों स्वतंत्र पत्रकारिता करने में मशगुल।