धीरेंद्र पुंडीर

jaitlyफिर से एक छूट। काला धन रखने वालों को एक बार फिर से छूट। लगता है साहेब काफी दिल वाले हैं। दिल दुखता है, लेकिन दुआ हमेशा उन्हीं के लिए निकल रही है, जो काला धन रखते हैं। अभी तक उनके लिए नहीं, जो लाईनों लगे हुए हैं, अपना धन निकालने के लिए। प्रधानमंत्री मोदी के नोटबंदी का फ़ैसला मुझे एक बेहतर कदम लगा। मैंने देखा कि लोग लाईनों मे लगे हुए पुलिस की लाठियां भी खा रहे हैं ( कुछ ईलाकों में)। आठ दिसंबर से अब तक आम जनता सीना ठोंककर प्रधानमंत्री के साथ खड़ी है। लेकिन सवाल था कि प्रधानमंत्री ने काला धन रखने वालों के पैसों को मिट्टी क्यों नहीं होने दिया?  काले धन वालों पर ये छूट कृपा करने वाली छूट है। मैं कोई भक्त नहीं हूं एक पत्रकार हूं गुण-दोष पर सोचता और विचारता हूं। काले धन वालों को छूट के फैसले ने फिर से सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। आखिर आपकी मंशा क्या है साहेब?

shaktikant-das28 नवंबर की रात आठ बजे फाईनेंस मिनिस्ट्री की सीढ़ियां उतरते वक्त उस चेहरे से मुलाकात हो गई जो इस फैसले के बारे में देश को बताते रहते हैं। मैंने पूछा कि सर अब क्या हालात है नोट की उपलब्धता को लेकर? साहेब ने बताया कि “ठीक है इनफेक्ट पिछले हफ्ते ही ठीक हो गए थे। ‘ मुझे लगा कि ये जनाब सीढ़ियों से भी नहीं उतरते हैं। खुदाई किस्मत के सहारे सवा अरब लोगों का हाल तो क्या इनको मालूम होगा? इनको ये भी मालूम नहीं है कि इनकी सीढ़ियों के ठीक नीचे फाईनेंस मिनिस्ट्री का जो एटीएम हैं, उसमें पिछले चार दिन से कैश नहीं है। और इतना ही नहीं ठीक इनके बगल में गृह मंत्रालय के एटीएम में पिछले पांच दिन से कैश नहीं डाला गया। और इनको मालूम है कि देश के हालात पिछले हफ्ते ही ठीक हो गए थे। ये बात जान लेनी चाहिए कि इन दोनों जगह जाने के लिए आपके पास पीआईबी कार्ड हो या फिर गृहमंत्रालय का पास तभी आप इन दोनों एटीएम तक पहुंचने का सौभाग्य पा सकते हैं। लेकिन इन दोनों एटीएम में कैश नहीं है। इसको क्या कहें?  साहेब, गजब का झूठ बोलना जानते हैं या फिर गजब के मासूम हैं।

ऐसे ही रोमन सम्राट कैमोडेसस ( उच्चारण अलग हो सकता है) की कहानी याद आ रही है। मार्कस ऑरिलियस का बेटा होने के नाते ऐसे विशाल साम्राज्य का उत्तराधिकारी बना जो उस समय के इतिहास में कभी देखा नहीं गया था। जनता ने भी प्यार दिया लेकिन सीनेट ने राजनीति को अपना हथियार बनाए रखा। कैमोडेसस को बहुत जल्दी ही दरबारियों की आपसी लड़ाई का सामना करना पड़ा। और इसी लड़ाई में षड़यंत्र तक बुने जाने लगे और कैमोडेसस के करीब आने के लिए एक सलाहकार ने दूसरे सलाहकार का वध कर दिया। कैमोडेसस को यकीन दिलाया गया ( जो इतिहासकारों के मुताबिक सच था) कि उसकी बहन और सीनेट के एक मेंबर उसकी जान लेना चाहते हैं। ईर्ष्यालु सलाहकार भी इस षडयंत्र में शामिल होता है लेकिन दूसरे सलाहकार को ठिकाने लगाने के लिए और कत्ल के बाद सारा इल्जाम सीनेट मेंबर और सम्राट की बहन के मत्थे मढ़ देता है।

सलाहकार साहेब ने सत्ता के तमाम सूत्र हाथ में लिए और अच्छा खासा चलते साम्राज्य को और भी वफादार बनाने के लिए एक दिन एक झूठा अकाल रचने की योजना बनाई। रोम को सप्लाई होने वाले अनाज को कुछ समय तक रोक देने की, ताकि जब अनाज को लेकर त्राहिमाम-त्राहिमाम मच जाए तो वो आएँ और रोम की जनता को अनाज मुहैया करा कर इतिहास का महान नायक बन जाएं। अपनी जनता का लाडला। और ऐसा ही कर दिया जाता है। मिस्र और अफ्रीका के दूसरे हिस्सों से आने वाले अनाज को साजिशन रोक दिया जाता है। (रोम के बनने के बाद से पहली बार सप्लाई चेन तोड़ दी गई) अकाल के हालात हो जाते हैं। यहां तक तो ठीक था लेकिन प्लेग भी आ गया। और भूखे और कमजोर लोगों पर ये महामारी अकाल बन कर टूट पड़ी। और सब प्लान फेल हो गए।

भूखी जनता सड़कों पर उतर आई। बादशाह को कई बार रोती हुई आवाजें सुनाई दीं, जो अब गुस्से में उबल रही थी। बादशाह ने फिर से अपने सलाहकार क्लीनेंडर को बुलाया और पूछा कि जनता क्यों नाराज है या परेशान है? क्लीनेंडर ने मुस्कुराते हुए कहा कि सम्राट को अपना आराम खऱाब करने की जरूरत नहीं है जनता को अनाज की कमी है जल्दी ही पूरी कर दी जाएंगी। प्लेग को रोकने के इतंजाम कर दिए गए हैं। सम्राट ने कहा कि जनता को कोई कष्ट नहीं होना चाहिए। और क्लीनेंडर जब इस योजना के आखिरी मुकाम पर होता है तब तक जनता का धैर्य जवाब दे जाता है। शहर में आग लगाई जाने लगती हैं। क्लीनेंडर के महल पर हमला होता है। किसी तरह से बचकर वो सम्राट के महल में पहुंचता है तो सम्राट ख्वाबगाह से बाहर आता है। देखता है जनता तो तबाह हो चुकी है, तभी षडयंत्र का भी पता चलता है। क्लीनेंडर को मार देता है।

जनता भूखी है बीमार है मौत के जबड़े में है। इससे परेशान सम्राट रोम में खेलों का आयोजन करता है ताकि बाहर से लोग आएं और अर्थव्यवस्था के ठीक होने तक जनता का कुछ ध्यान भी इधर से उधर जाए। लेकिन खेल पर और भी जनता का ध्यान आकृष्ट करने के लिए कैमोडेस ऐलान करता है कि वो ग्लैडिएटर के खिलाफ खुद रिंग में उतरेगा। रोम के इतिहास में पहली बार कोई बादशाह किलिंग मशीन या ट्रैंड हत्यारों के खिलाफ मुकाबला करने उतरा। सीनेट भी सम्राट से नाराज होने के बावजूद मना करती है लेकिन कैमोडेस जनता को कुछ ऐसा देना चाहता है जिससे जनता को यकीन हो जाए कि ऐसा अद्वितीय सम्राट कभी इतिहास में हुआ ही नहीं। रिंग का बादशाह। मौत को भी ललकारने वाला। और तैयारी भी होती है। कैमोडेस नारसिस ( रिंग का अजेय ग्लैडिएटर ) से प्रैक्टिस करता है। और आखिर में एक दिन खेल के बीच जनता की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सम्राट रिंग में उतर जाता है। ऐसा रिंग जिसमें से किसी एक को ही जिंदा बाहर आना है। एक दो मूव और उन पर जनता की तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साहित सम्राट आगे की ओर बढता लेकिन ग्लैडिएटर की तलवार उसका काम तमाम कर देती है।

vijayji modi-2इस ऐतिहासिक सच मे किसी को कैमोडेस पर शक नहीं था जनता उसका साथ भी देती है लेकिन सलाहकारों की सलाह आम जनता से दूरी और जनता के कष्ट को भी सलाहकारों के जरिए समझना इतिहास में दर्ज हो गया। मोदी जी को जनता का एकतरफा प्यार हासिल है इस वक्त। जनता लाईनों में खड़ी है और विपक्षी नेताओं के किसी भी आह्वान को ठुकरा रही है लेकिन जनता के दर्द सहने की सीमा होती है। मौत के आंकड़े बढ़ते हैं तो उसको साजिश करार दे कर आंखें बंद नहीं की जा सकती। एटीएम में पैसा नहीं है तो ये नहीं कहा जा सकता कि मैनेजर चोर है। पैसा बना रहे हैं बैंकों के लोग। ऐसे बैंक जिनका सरकारी तंत्र में कभी कोई हिस्सा नहीं रहा। फिर क्या हो। इस पर विचार करने की बजाय सरकार ने काले धन को ही छूट दे दी । जनता को नहीं। क्या ये फैसला किसी भी इंसान के लिए जो लाईन में लग कर देश के लिए कष्ट सह रहा है, उसके घावों पर किसी नमक छिड़कने से कम है? एक बार और प्रधानमंत्री जी प्लीज देख लीजिए कि आपको सलाह कौन दे रहा है कोई क्लीनेंडर तो शामिल नहीं आपके सलाहकारों में।


pundir-profileधीरेंद्र पुंडीर। दिल से कवि, पेशे से पत्रकार। टीवी की पत्रकारिता के बीच अख़बारी पत्रकारिता का संयम और धीरज ही धीरेंद्र पुंडीर की अपनी विशिष्ट पहचान है। 

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