“जीवन की सार्थकता” विषय पर गीतों , कविताओं और गजलों से परिपूर्ण “पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” की 45वीं साहित्य गोष्ठी वैशाली सेक्टर चार, स्थित हरे भरे मनोरम सेंट्रल पार्क में सम्पन्न हुई।  जून माह की उमस भरी दोपहर के बाद थोड़ी बयार की शाम में बड़ी संख्या में उपस्थित कवियों, साहित्यकारों और श्रोताओं ने शाम 5 बजे से प्रारंभ हुई कविता गोष्ठी में देर शाम 7 बजे तक कविता, गीत और गजल का पाठ किया। इस बार की गोष्ठी का विषय “जीवन की सार्थकता” थी, जिस पर रची गयी कविता, गीत और ग़ज़ल इस गोष्ठी का आकर्षण बने।

इस मासिक गोष्ठी में वरिष्ठ कवि रघुवर सनातन, ईश्वर सिंह तेवतिया, गजलकार मृत्युंजय साधक, परमजीत यादव ‘कम दिल’, के एम उपाध्याय तथा गीतकार वीरेन्द्र गुप्त, रामेश्वर दयाल शास्त्री ने रचना पाठ किया। वहीं वरिष्ठ कवयित्री मीना पाण्डेय, नवोदित पूनम कुमारी सहित गोष्ठी के संयोजक अवधेश सिंह ने भी काव्य पाठ किया। इस गोष्ठी का विषय “जीवन की सार्थकता” पर विश्लेषण के साथ रची गयी कविता, गीत व ग़ज़ल व हाइकु इस गोष्ठी का आकर्षण रहीं।

गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि प्रोफेसर के एम उपाध्याय ने की। इस अवसर पर प्रख्यात लेखक और माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता संचार विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अरुण भगत की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही। उन्होंने “आपातकाल की पत्रिकारिता व कहानी लेखन” पर आधारित दो सद्प्रकाशित पुस्तकों के संबंध में बताया और रवीन्द्र भवन साहित्य अकादेमी में आगामी 30 जून, शनिवार को होने वाले लोकार्पण समारोह के लिए सभी को सादर आमंत्रित भी किया।

श्रोताओं में श्री कपिल देव नागर , रतनलाल गौतम , कहानी कार संजय मिश्र , पत्रिका सृजन सेतु के प्रबंध संपादक कैलाश पाण्डेय, शत्रुघन प्रसाद, प्रकाशक शिवानंद तिवारी व अनीता सिंह आदि ने रचनाकारों के उत्साह को बढ़ाया। गोष्ठी के समापन पर आभार व्यक्त करते हुए संयोजक कवि लेखक अवधेश सिंह ने इस गोष्ठी की निरंतरता को बनाए रखने का अनुरोध किया।

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