आनन्दवर्धन प्रियवत्सलम

4 फरवरी को पटना के बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के दफ्तर में दर्जनों पत्रकार जुटे। गिरीश मिश्र को याद किया और कई पुरानी यादें शेयर कीं।  नोएडा में कुछ पत्रकार गिरीश मिश्र से मिलने उनके घर पहुंचे। आपके मन में जरूर ये विचार आ रहा होगा कि आखिर 4 फरवरी की ऐसी क्या अहमियत है? आखिर इसी दिन दर्जनों पत्रकार क्यों गिरीश मिश्र को याद कर रहें हैं और क्यों कुछ उनसे मिल रहें हैं। आइए आपकी जिज्ञासा को शांत करने के लिए बताते हैं कि आखिर क्यों खास है 4 फरवरी का दिन।

पत्रकारिता में क्रांति आई थी 4 फरवरी को

बात वर्ष 1999 की है। तब नवंबर महीने में वरिष्ठ पत्रकार गिरीश मिश्र पटना में हिन्दुस्तान अखबार के स्थानीय संपादक नियुक्त हुए थे। तब बिहार में एक से एक तेज तर्रार पत्रकार थे लेकिन संख्या के मामले में चुनिंदा ही थे। ऐसे में गिरीश जी ने एक परिकल्पना की। न केवल परिकल्पना बल्कि उसे मूर्त रूप भी दिया। उन्होंने तत्काल हिन्दुस्तान अखबार में ही एक छोटा सा विज्ञापन दिया कि किसी को भी खबरों की अच्छी समझ हो तो वो अखबार से जुड़ सकता है। इसके लिए बायो डाटा के साथ-साथ अपने आस पास की कोई एक खबर मांगी गई। मेरी जानकारी के अनुसार करीब 600-700
आवेदन आए जिसमें से लगभग 60 लोगों का चयन किया गया। गिरीशजी ने इन 60 लोगों को पत्रकारिता का क, ख, ग… सिखाना शुरू किया। हिन्दुस्तान दफ्तर में ही पेपर के गोदाम को सुसज्जित कर क्लास रूम बनवाया गया और शुरू हो गई पढ़ाई। साल था 2000 और तारीख थी 4 फरवरी।

THE MAN, WE REALLY LOVE AND RESPECT

On this day….
They say, one needs an opportunity to discover oneself, to explore one’s life path. Year’s back, I too stepped into a world, unknown for me. Didn’t had any bit of hint that this would turn into a serious profession for me, which I would enjoy as well. As the journey progressed with many bright and sad phases, I learnt that, this profession was not for me, but I loved to express thoughts, incidents, true stories in writing. Thanks to the Man Himself, Girish Mishra Sir, who on this day 4th Feb, gave me and many of us, the medium and platform to express and explore the world right around us…Thank you Sir. May you get well soon…

ANSHU SINGH

एकसाथ 60 पत्रकार उतरे फील्ड में

पटना में एकसाथ उतरे 60 पत्रकार और उन्होंने शहर में धूम मचा दी थी। दिन में दो घंटे तक गिरीश मिश्र उन्हें पढ़ाते थे और फिर वे सभी निकल जाते थे फील्ड में। फिर इनके नाम से गली मुहल्ले से लेकर बड़ी बड़ी खबरें हिन्दुस्तान में छाने लगीं। तब गिरीशजी ने इनका नाम संवाद सूत्र दिया था। उस समय का दौर ऐसा था कि रिपोर्टर-सीनियर रिपोर्टर से ज्यादा तवज्जो संवाद सूत्रों को दी जाने लगी। गिरीश मिश्र का प्रयोग अद्वितीय था। धीरे-धीरे ये सभी संवाद सूत्र खबरों की दुनिया में इतने पारंगत हो गए कि इनमें से 10-12 हिन्दुस्तान में ही स्टाफ रिपोर्टर हो गए जबकि दूसरों ने कई प्रतिष्ठित मीडिया हाउस में नौकरी पा ली। लेकिन हर साल 4 फरवरी को ये एक जगह जुटते जरूर हैं और फिर याद करते हैं पत्रकारिता के क्रांतिवीर गिरीश मिश्र को।


आनन्दवर्धन प्रियवत्सलम। नोएडा में एक प्रमुख न्यूज चैनल में कार्यरत। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। पटना यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की।


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