आशीष सागर

यूपी के बुंदेलखंड का नाम नाम आते ही हर किसी के जेहन में भुखमरी, बेरोजगारी, बदहाल किसान और सूखे की आपता जैसी तस्वीर कौंधने लगती है, कभी आल्हा-उदल की वीरता की मिसाल बनी ये धरती आज अपनी बदहाली के लिए रो रही है । फिर भी इस विपरित परिस्थितियों में महोबा के लाल अपनी मंजिल के लिए रास्ता खुद तलाश रहे हैं । आज हम आपको बुंदेलखंड के महोबा की एक ऐसी तस्वीर से रूबरू करा रहे हैं ।

इन तस्वीरों में आप देख सकते है तालाब किनारे कोई पेड़ की छांप तले बैठा है तो कोई बेंच पर तो कोई जमीन पर बैठा हुआ है। एक बेंच पर बैठे युवक एक दूसरे के विपरित दिशा में मुंह करके बैठे हैं । हर कोई अपने काम में मशगुल है। तस्वीरें अलग बेशक हैं लेकिन लक्ष्य एक । कुछ अलग करने की चाहत और यही ये वजह है कि खुले आसमान के नीचे बैठकर ये युवा अपना भविष्य खुद लिख रहे हैं ।

दरअसल ये तस्वीरें महोबा में चन्देल काल के प्राचीन कीरत सागर तालाब के किनारे बने विशाल प्रांगण की हैं । जहां बड़ी संख्या में युवा हर रोज आते हैं और घंटें इसी तरह बैठकर अध्ययन-अध्यापन करते हैं । युवाओं ने पढ़ाई के लिए अपना खुद का क्लब बनाया है । जिसमें पढ़ने-लिखने में रुचि रखने वाला कोई भी छात्रा शामिल हो सकता है । इसके लिए कोई जाति-धर्म या फिर अमीर-गरीब का बंधन नहीं है । पूरी तरह समाजवाद के विचारधारा पर चलने वाला ये क्लब पूरे महोबा में मशहूर हो चुका है । क्योंकि यहा छात्रों को पढ़ने का एक अलग माहौल मिलता है और एक दूसरे की समस्याओ के समाधान का माध्यम भी ।

ये छात्र अपने सीमित संसाधन में पिछले 5 साल से इस क्लब को चला रहे हैं । क्लब का मकसद छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा के लिए बेहतर माहौल और सामग्री उपलब्ध करना है । यही नहीं यहां राजनीति या फिर फिजूल की बहस की बजाय उपयोगी, समसामयिक विषयों पर रोजाना संवाद  भी होता है । हर दिन को अलग-अलग सेशन में बांटा गया है । जैसे स्वाथ्याय के वक्त छात्र स्वाध्याय करते हैं और किसी विषय को लेकर बहस करनी हो तो उसका अलग वक्त तय किया गया है।

इस तालाबी क्लब की कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये निर्धन लेकिन जुनूनी छात्रों के लिए अध्ययन का एक बेहतर माहौल देता है । पिछले पांच सालों में इस क्लब से कई छात्र रेलवे समेत तमाम महकमों में अच्छे पदों पर चयनित भी हो चुके हैं । जो आज भी इस क्लब के संचालन में अपना योगदान देते हैं ।

महंगे-महंगे कोचिंग संस्थानों के बीच महोबा का ये तालाबी क्लब एक उम्मीद की किरण है । आप भी अपने आस-पास इस तरह की मुहिम चलाकर बच्चों को पढ़ाई के प्रति जागरुक कर सकते हैं । सिर्फ सरकार के भरोसे बैठने से अच्छा है आप बदलाव के लिए खुद कदम बढ़ाएं । सिर्फ कहने से ना तो पढ़ेगा इंडिया और ना ही पढ़ेगा इंडिया । बल्कि खुद को आगे आना होगा । 


ashish profile-2बाँदा से आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष सागर की रिपोर्ट फेसबुक पर एकला चलो रे‘ के नारे के साथ आशीष अपने तरह की यायावरी रिपोर्टिंग कर रहे हैं। चित्रकूट ग्रामोदय यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र। आप आशीष से ashishdixit01@gmail.com पर संवाद कर सकते हैं।

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