Archives for मेरा गांव, मेरा देश - Page 3

मेरा गांव, मेरा देश

बजट में गांव और गरीबों के लिए क्या है खास ?

प्रियंका यादव 8 करोड़ गरीब महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन मिलेगा 4 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली देने का ऐलान स्वस्छता मिशन के तहत 2…
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मेरा गांव, मेरा देश

बजट में किसानों के लिए क्या हुआ ऐलान ?

प्रियंका यादव 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का लक्ष्य फसल की उत्पादन लागत का उचित मूल्य देने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुना तय किया जाएगा बाजार…
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चौपाल

रंगकर्मी की संवेदना और गृहस्थी में कैद मां

अनिल तिवारी वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल तिवारी जी ने अपनी रंग यात्रा को फेसबुक पर एक सीरीज में साझा किया है। उनका ये सिलसिला जारी है। एक रंगकर्मी की ज़िंदगी के…
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परब-त्योहार

संतूर वादन से झंकृत हो गए पूर्णिया के तार

डॉ शंभु लाल वर्मा 'कुशाग्र' पूर्णिया के विद्या विहार इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नलॉजी में स्पीक मैके की ओर से संतूर वादन की प्रस्तुति हुई। अंतरर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अभय रुस्तम सपूरी ने…
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मेरा गांव, मेरा देश

कहां हैं हिंसा की जड़ें सरकार ?

राकेश कायस्थ सांप्रादायिक हिंसा की किसी घटना के बाद होनेवाली प्रतिक्रियाओं पर ठीक से गौर कीजिये, आपको समझ में आ जाएगा कि इसकी जड़े कहां हैं? हर सांप्रादायिक हिंसा इस…
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चौपाल

पद्मावत- जाति के ठेकेदारों ने बवाल क्यों काटा?

अनुशक्ति सिंह मैं पैदाइश से राजपूत हूँ. मेरे नाम के पीछे लगा 'सिंह' सरनेम मेरे पिता की थाती है जो मेरे साथ जुड़ी हुई है. वैसे ही जैसे किसी भी…
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आईना

पद्मावत का नाम ‘खिलजावत’ क्यों न रखा ?

विकास मिश्र 'पद्मावत' देखकर लौटा हूं वो भी 3डी में। तीन घंटे लंबी इस फिल्म का नाम तो असल में 'खिलजावत' होना चाहिए था, क्योंकि पूरी फिल्म खिलजी के इर्दगिर्द…
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मेरा गांव, मेरा देश

किसान को सक्षम बनाए बिना मेक इन इंडिया अधूरा है

ब्रह्मानंद ठाकुर किसानों की बात सुनिए वित्त मंत्रीजी के पहले भाग में हमने दिल्ली में आयोजित संसद में किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाने को लेकर पास हुए प्रस्ताव पर…
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चौपाल

मनमोहन-मोदी का फर्क, जवाब में नहीं मीडिया के सवाल में ढूंढिए

राकेश कायस्थ यह समय भारतीय समाज के स्मृति लोप का है। याद्दाश्त गजनी की तरह आती-जाती रहती है। जो लोग यह कहते हैं कि पहले वाले प्रधानमंत्री भी मीडिया से…
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आईना

पत्रकारिता की हड़बड़ी और मेरा दृष्टिदोष

शिरीष खरे कुछ बनने की जल्दी में हुआ दृष्टि-दोष, फिर एक दिन अचानक एक घटना से कि जाना निकट की चीजें दूर या दूर की चीजें निकट क्यों दिखाई दे रही हैं। ''जर्नलिस्ट बनने…
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