Archives for मेरा गांव, मेरा देश - Page 3

बिहार/झारखंड

दरभंगा के आम और जोधा-अकबर का ‘प्रेम’

पुष्यमित्र आम का सीजन उफान पर है। इस साल भरपूर आम बाजार में उपलब्ध है, कीमत भी कम है, लिहाजा पूरा हिंदुस्तान खुलकर आम के रस में सराबोर हो रहा…
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आईना

कविता मायूस, गीत उदास… गुबार देखते रहो

पीयूष बबेले कफन बढ़ा, तो किस लिए, नजर तू डबडबा गई कल शाम बाती का 50 साल पुराना शिकवा दूर हो गया। वो मचल कर कहती थी, दिया तो झूमे…
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मेरा गांव, मेरा देश

आज और कल जलालपुर में ‘मशरूम मैन’ की कार्यशाला

आजकल किसानों की आय दोगुनी करने की चर्चा हर तरफ हो रही है, लेकिन शायद ही कोई हो जो इस बात पर चर्चा करता हो कि आखिर क्या करने से…
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मेरा गांव, मेरा देश

बुंदेलखंड में अवैध खनन का खुला खेल

आशीष सागर यूपी के बुंदेलखंड में खनन का मसला उठना कोई नई बात नहीं है। महोबा का पनवाड़ी अवैध बालू व्यापार का नया ठिकाना बनकर उभरा है। योगी सरकार से…
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मेरा गांव, मेरा देश

‘असंभव के विरुद्ध’ एक आवाज़ का यूं गुम हो जाना

कल्पेश जी को भावभीनी श्रद्धांजलि पुष्य मित्र भास्कर के समूह संपादक कल्पेश याग्निक के निधन से पूरा मीडिया जगह स्तब्ध है। हर कोई अपने अपने तरीके से कल्पेश जी को…
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मेरा गांव, मेरा देश

सोशल मीडिया के ‘ब्लैकहोल’ में गुम होता युवावर्ग

डा. सुधांशु कुमार आज जिस प्रकार सोशल मीडिया पर खासकर किशोर और युवावर्ग अपनी आंखें गड़ाए रहते हैं , यह उनके कैरियर के लिए किसी चुनौती से कम नहीं ।…
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गांव के नायक

जेपी आंदोलन का ‘निर्मल’ सिपाही

पुष्यमित्र जेपी आंदोलन का नाम लेते ही 70 के दशक में युवा रहे आजकल के नेता अपने संघर्षों की कहानियां सुनाने से खुद को रोक नहीं पाते । आखिर सुनाएं…
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बिहार/झारखंड

वीरेन नंदा की किस्सागोई पार्ट 4-5

सांकेतिक चित्र वीरेन नन्दा किस्सागोई के के तीसरे अंक में आपने पढ़ा किस तरह कवि- कहानीकार दोस्तों ने शहर के एक मशहूर पूड़ी-जलेबी की दुकान में छक कर पूड़ी-जलेबी खाने…
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मेरा गांव, मेरा देश

फ़सलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में अधिकतम घपलेबाजी

ब्रह्मानंद ठाकुर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने पिछले दिनों खरीफ  सीजन की फ़सलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की। इस मौके पर उन्होंने  कहा-2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान…
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बिहार/झारखंड

छपरा की बेटी का दर्द … ओ री चिड़ैया

अनीश कुमार सिंह मैं बिहार के छपरा की बेटी हूं। मेरा दम घुट रहा है। एक-एक सांस मुझ पर भारी पड़ रही है। उस मनहूस दिन को याद करके मैं…
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