Archives for मेरा गांव, मेरा देश - Page 3

बिहार/झारखंड

अगिला बार ढेर दिन खातिर अईह

अखिलेश्वर पांडेय तस्वीर सौजन्य- अजय कुमार कोसी बिहार कम पानी वाले पोखर की मछलियां  दुबरा गयीं हैं ऊसर पड़े खेतों की मेढ़ें रो रही हैं बेरोजगार लड़कों का पांव मुचक…
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बिहार/झारखंड

विकास में पिछड़ते गांव और बढ़ता आर्थिक असंतुलन

शिरीष खरे विशेष तौर पर सत्तर के दशक में गांवों के लिए कई परियोजनाएं और कार्यक्रम चलाए गए। इसके पीछे के कारण में जाएं तो इस समय तक यह सोचा…
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आईना

निखिल दुबे पर पूरी हुई इंडिया न्यूज की ‘तलाश’

टीम बदलाव 20 नवंबर को इंडिया न्यूज़ के साथ निखिल दुबे ने बतौर एग्जीक्यूटिव एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत कर सबको हैरत में डाल दिया । उन्हें आउटपुट की…
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बिहार/झारखंड

हाइब्रिड बीज का मायाजाल और किसानों की दुर्दशा

सांकेतिक तस्वीर ब्रह्मानंद ठाकुर मनकचोटन भाई के दलान पर सांझ होते ही हमेशा की तरह  आज भी टोला के लोगों का जुटान होने लगा। परसन कक्का और बटेसर भाई भी  साथ…
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गांव के रंग

पशुपालन में छिपा है किसानों की खुशहाली का राज

पुष्यमित्र चार-पांच साल पहले झारखंड के एक गांव गया था । वह गांव सब्जी उत्पादन में अव्वल था । वहां के किसानों ने कहा कि वे पूरी तरह से जैविक…
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चौपाल

ग्रामीण भारत की बदहाली और आर्थिक विकास का लालीपॉप

शिरीष खरे भारत में ग्रामीण और शहरी अंचल के लिए निर्धनता का निर्धारण अलग-अलग तरह से होता है। एक आंकड़े के मुताबिक भारत के 75 प्रतिशत निर्धन गांवों में रहते…
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आईना

एक प्यारे सफर का प्यारा सा अंत

पशुपति शर्मा के फेसबुक वॉल से साभार ''जब आप किसी संस्थान से जुड़ते हैं तो ये पता नहीं होता कि ये सफर कैसा होगा । लेकिन खट्टे-मीठे अनुभवों के साथ…
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आईना

जीवन का संघर्ष और ‘डियर जिंदगी’ का फलसफा

दयाशंकर जी के फेसबुक वॉल से साभार कभी-कभी गुस्‍से की छाया, निराशा, ठगे जाने के बोध के बीच हम स्‍वयं को ऐसी चीजों से साबित करने में जुट जाते हैं,…
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मेरा गांव, मेरा देश

गांव की आर्थिक-सामाजिक बुनावट में कितना बदलाव

शिरीष खरे गांव क्या है? अवधारणाओं में जब भी इसे ढूंढ़ने-समझने की कोशिश की तो इससे जुड़ी व्याख्याओं में मुख्य तौर पर तीन बाते सामने आईं। छोटी आबादी, भौतिक ढांचा…
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बिहार/झारखंड

 टीस भरा बचपन

वीरेन नन्दा बचपन की यादों में लौटना केवल वही चाहते खोना  बचपन के दिन ममता में जिनके बीते  समता में बीते जिनके बचपन के दिन जेम्स चूसते बीता जिनका बचपन सोफे…
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