Archives for मेरा गांव, मेरा देश - Page 3

चौपाल

मजदूरों की सबसे बड़ी क्रांति के सौ बरस

ब्रह्मानंद ठाकुर आज हम चांद और मंगल पर घर बसानों की सोच रहे हैं, लेकिन जो धरती पर हैं उनकी सुध नहीं ले रहे। आखिर दुनिया में अमीर और गरीब…
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बिहार/झारखंड

संवाद की कोशिश में एक महिला का ‘सरेंडर’!

सुदीप्ति एक ही ससुराल है अपना तो। अब मायके से ज्यादा अपना। भई हम सुतली बम में सच्ची यकीन नहीं करते। जैसे हैं वैसे को बाहें फैला अपनाया है लोगों…
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आईना

क्या फिरोज की ‘लोकतांत्रिक’ सोच से चिढ़ती थी ‘इंदू’ ?

अजीत अंजुम फिरोज जहांगीर गांधी। इंदिरा गांधी के पति। प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के दामाद। राजीव गांधी और संजय गांधी के पिता। परिचय से देखें तो धमक दिखती है लेकिन…
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मेरा गांव, मेरा देश

इंदिरा-फिरोज गांधी के रिश्तों की अनसुनी कहानी पार्ट-2

फ़ाइल फोटो अजीत अंजुम फिरोज-इंदिरा और नेहरु के रिश्तों के कई उलझे तार इंदिरा और फिरोज पर लिखी किताबों में दिखते हैं। कहीं-कहीं फिरोज के वर्ताव से ऐसा मतलब भी…
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चौपाल

एक ‘प्रधानमंत्री’ के उलझे रिश्तों की अनसुनी कहानियां

अजीत अंजुम “हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी जिसको भी देखना हो कई बार देखना“ किसी शख्स को परखने के लिए निदा फाजली जैसे शायर की लिखी ये…
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मेरा गांव, मेरा देश

क्यों जिंदगी से हताश थे इंदिरा गांधी के पति ?

फ़ाइल एक गांधी तो वो भी था, सांसद, देश के प्रधानमंत्री का दामाद था, देश की होने वाली प्रधानमंत्री का पति का था. सत्ता के शीर्ष पर बैठे सबसे ताकतवर…
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मेरा गांव, मेरा देश

मोदी सरकार और 2 लाख करोड़ का ‘मनीगेम’

अरुण प्रकाश मोदी सरकार ने खजाना खोल दिया है । दावा है कि जो विकास दौड़ रहा था अब वो हवा में उड़ने लगेगा । इसके लिए सरकार ने तमाम…
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चौपाल

‘वो’ जब तक जीते रहेंगे, हिन्दुओं का हृदय साफ नहीं होगा !

“गजनवी, गोरी, औरंगजेब और जिन्ना के भूत जब तक जीते रहेंगे, हिन्दुओं का हृदय साफ नहीं होगा. जब तक हम इतिहास के दग्ध अंश को नहीं भूलते, हम मुसलमानों को…
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आईना

भ्रष्टाचार का आरोप नहीं तो मुकदमे का मकसद क्या ?

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने आजतक पंचायत में अपने बेटे पर लगे आरोपो पर जो कहा उसे शब्दश : कोट कर रहा हूं। शाह ने कहा— पहली बात यह समझ…
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मेरा गांव, मेरा देश

जनाब को मोहब्बत की निशानी से नफ़रत क्यों है?

अजीत अंजुम जिस ताजमहल को मोहब्बत की निशानी मानकर न जाने कितने गीत-गजल और कहानियां लिखी गई। जिसे देखने न जाने कितने लोग हर रोज आगरा जाते हैं। जिसको आंखों में…
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