बिहार के नालंदा में सब्जी उगाने वाले किसानों की बदहाली की तस्वीर। फोटो- पुष्य मित्र

ये तस्वीरें बिहार के नालंदा जिले के नूर सराय की हैं। कल (10 जून 2018) जब वहां के सब्जी किसानों को उनके कद्दू (उर्फ लौकी, उर्फ सजमन) की सही कीमत नहीं मिली तो उन्होंने सड़क पर कद्दू फेंक कर जाम लगा दिया। किसानों का कहना था कि पिछले दस दिनों से यही हाल है। कद्दू की कीमत एक रुपये किलो के आसपास मिल रही है। जबकि इससे डेढ़ गुना तो इन्हें बाजार तक लाने में खर्च हो जा रहा है। सरकार की तरफ से खरीद की कोई व्यवस्था नहीं है, वे क्या करें?
दरअसल नालंदा का इलाका सब्जियों की खेती के लिए मशहूर है। यहां के किसान छोटी छोटी जोत पर बम्पर उत्पादन करते हैं। मगर पिछले कुछ वक्त से इन्हें लागत के अनुरूप दाम नहीं मिल रहा। सीधे सरकार को भी दोष नहीं दिया जा सकता क्योंकि बिहार में तो अभी तक धान की सरकारी खरीद की व्यवस्था भी मुकम्मल नहीं हो पाई है, सब्जी की खरीद तो बहुत दूर की बात है। मगर खेती का रकबा निर्धारण का काम सरकार का ही है।

अगर हर साल इस मसले पर ढंग से काम हो और सरकार किसानों को सलाह दे सके कि बाजार को देखते हुए उसे किस फसल की खेती करना चाहिये तो किसानों को ऐसी परेशानी नहीं होगी। पिछले दिनों मोकामा टाल के दलहन किसानों ने भी इस मसले पर आंदोलन किया था। मगर दिक्कत यह है कि इन आंदोलनों को न सरकार नोटिस में लेती है, न मीडिया।


पुष्यमित्र। पिछले डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। गांवों में बदलाव और उनसे जुड़े मुद्दों पर आपकी पैनी नज़र रहती है। जवाहर नवोदय विद्यालय से स्कूली शिक्षा। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता का अध्ययन। व्यावहारिक अनुभव कई पत्र-पत्रिकाओं के साथ जुड़ कर बटोरा। संप्रति- प्रभात खबर में वरिष्ठ संपादकीय सहयोगी। आप इनसे 09771927097 पर संपर्क कर सकते हैं।

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