owaisiवही लोग ओवैसी से इस वक़्त उसके सांप्रदायिक बयान को ले कर चिढ़े हुवे हैं जिन्होंने उसे चुना ही सांप्रदायिक धुर्वीकरण के लिए है । ये बताईये कि आपने ओवैसी को इतनी शोहरत दी किसलिए थी अभी तक? उनको चढ़ाया ही इसी लिए है आपने कि वो बस आपके क़ौम की और मज़हब की बात करें.. तो वो कर रहे हैं.. । वो वैसे भी सिर्फ अपने क़ौम की ही बात करते हैं । जिस काम के लिए आपने उन्हें चुना है वो कर रहे हैं ।

आपको हर जगह मज़हब चाहिए होता है.. कोई भी बुद्धिजीवी जो मज़हब से इतर आपसे बात करे आपको बर्दाश्त नहीं होता है.. और सब छोड़िये आपको तो शायर भी वही पसंद आते हैं जो क़ुरान के हवाले से शेर कहे और हदीसों के हिसाब से ग़ज़ल लिखे..। तभी आप अल्लामा इक़बाल को रहमतुल्लाह अलैह कहते हैं.. किसी और शायर को आपने कभी रहमतुल्लाह अलैह कहा है? ये जानते हुवे भी कि भारत के विभाजन में उनका कितना बड़ा हाथ था । आप उन्हें रहमतुल्लाह अलैह बोलते हैं जो कि किसी सूफी संत को बोला जाता है ।

किस लिए पसंद करते हैं आप अल्लामा को? आपको उनके शेर भी समझ आये हैं कभी? मगर आपने ये सुन लिया कि इक़बाल क़ुरआन पढ़ के शेर लिखते थे बस आप फ़िदा हो गए.. और आपके कट्टर बुद्धिजीवी जानते हैं कि वो कितने घोर सांप्रदायिक थे इसलिए उन्होंने उनके आगे रहमतुल्लाह अलैह लगा दिया और आप ले उड़े उसे । ग़ालिब और मीर को आप कभी रहमतुल्लाह अलैह कहिएगा? अब्दुस्सलाम को कभी रहमतुल्लाह अलैह कहिएगा? क्योंकि अब्दुस्सलाम ने ये कभी नहीं कहा कि उन्होंने क़ुरआन पढ़ के भौतिक विज्ञान में नोबेल जीता और वैसे भी कैसे कहिएगा क्यूंकि वो अहमदिया मुस्लिम थे ।

रग रग में आपके संप्रदायवाद बसा है.. ओवैसी से पहले दिन ही आपने विरोध क्यों नहीं दर्ज कराया था जब उसने अपनी पार्टी का नाम “मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लिमीन” रखा था? क्यों नहीं आपसे उसने कहा कि इस पार्टी में हिन्दुवों, सिखों, ईसाईयों और पारसियों की भी जगह होनी चाहिए। क्यूँ मुसलमानो की पार्टी बना रहे हो? हम भारत में हैं जहाँ तरह तरह के फूल हैं और तुम सिर्फ गेंदा का फूल लगाओगे बाग़ में अपने?

एटीएम क्या.. वो तो रोड भी मुसलमानो की अलग करेगा और हवाई पट्टी भी.. क्यूंकि आपको चाहिए ही वही.. आपको कभी नेता, बुद्धिजीवी चाहिए ही नहीं । आपको सिर्फ और सिर्फ मौलाना चाहिए.. गज़ भर दाढ़ी वाला जो आपको और गर्त में पहुंचाता जाय और आपकी हर बेवकूफ़ी पर सुब्हान अल्लाह, मॉशा अल्लाह कहता रहे और हाँ में हाँ मिलाता रहे ।


tabish-siddiqiताबिश सिद्दीकी, लेखक । हर मुद्दे पर बेबाकी से अपनी बात रखते हैं । 

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