Author Archives: badalav - Page 3

गांव के रंग

मुजफ्फरपुर में दो दिवसीय ग्राम समागम

टीम बदलाव, मुजफ्फरपुर गांधी चाहते थे कि इस देश के युवा एक निश्चित लक्ष्य लेकर गांवों में जायें और वहां कुछ सृजनात्मक काम करें. ताकि गांव और देश की स्थितियां…
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गांव के नायक

सकारात्मक बदलावों को खोजती शिरीष की किताब “उम्मीद की पाठशाला”

बरुण सखाजी ढहते सरकारी स्कूलों में से उम्मीदें खोजती शिरीष खरे की "उम्मीद की पाठशाला" शिक्षा क्षेत्र की अहम किताब है। वे महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गोवा, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान के स्कूलों…
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यूपी/उत्तराखंड

जीवन संवाद- देश को ‘हज़ार-हज़ार दयाशंकर’ चाहिए

पशुपति शर्मा के फेसबुक वॉल से साभार जीवन संवाद। दयाशंकर मिश्र की पुस्तक। 5 जनवरी, 2020 की शाम इस पुस्तक के विमोचन समारोह में शरीक होने के लिए घर से…
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परब-त्योहार

संविधान सभा से जुड़ी कुछ जरूरी बातें समझना जरूरी है

पुष्यमित्र के फेसबुक वॉल से साभार पिछले दिनों ये इच्छा हुई कि देश का संविधान कैसे बना और उसके बनते वक़्त क्या-क्या बहसें हुई, इस पर कुछ पढूं और उसमें…
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मेरा गांव, मेरा देश

मुजफ्फरपुर में 15-16 जनवरी को गांधी और युवा- दो दिवसीय मेल मिलाप

पुष्यमित्र के फेसबुक वॉल से साभार गांधी चाहते थे कि इस देश के युवा एक निश्चित लक्ष्य लेकर गांवों में जायें और वहां कुछ सृजनात्मक काम करें. ताकि गांव और…
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गांव के नायक

पटना की ‘अम्मा’ और उनके संघर्षों की कहानी

साभार.कुमार सर्वेश नए साल की शुभकामनाओं के बीच आइए देसी की ओर चल! मिलवाते हैं पटना की अम्मा से! आइए, मिलते है पटना शहर की ऐसी शख्सियत से, जो गुमनामी…
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मेरा गांव, मेरा देश

संविधान सभा के संकल्प को समझिए

पुष्यमित्र के फेसबुक वॉल से साभार 1. यह संविधान सभा भारतवर्ष को एक स्वतंत्र संप्रभु तंत्र घोषित करने और उसके भावी शासन के लिए एक संविधान बनाने का दृढ़ और…
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चौपाल

नाराजगी मुक्त जीवन लेकर नए साल में प्रवेश करें

विकास मिश्रा के फेसबुक वॉल से साभार नजदीकी रिश्ते की एक भाभी थीं, दो साल बड़ी रही होंगी मुझसे। बहुत मानती थीं मुझे, मैं भी उन्हें बहुत मानता था। बहुत…
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बिहार/झारखंड

बेनीपुरी की 120वीं जयंती पर विशेष

ब्रह्मानंद ठाकुर रामवृक्ष बेनीपुरी की आज 120 वीं जयंती हैं, 23 दिसम्बर 1899 में मुजफ्फरपुर में जन्मे बेनीपुरी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, बेनीपुरी जी का बचपन संघर्ष से भरा…
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आईना

अपनी पहचान खोता विदिशा का बासौदा नगर

पुरु शर्मा क्या वास्तव में हमारा शहर ऐसा ही था ? जैसी आज उसकी छवि पूरे प्रदेश में बन चुकी है, आप बोलेंगे नहीं हमारा बासौदा तो वो शहर था…
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