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मेरा गांव, मेरा देश

प्रतिस्पर्धा की सभ्यता ने खत्म कर दी सहयोग की भावना

ब्रह्मानंद ठाकुर जाने - माने समाजवादी चिंतक सच्चिदानन्द सिन्हा की पुस्तक ' गांधी और व्यावहारिक अराजकवाद ' की शृंखला की तीसरी कड़ी में  गांधी और  कतिपय अराजकवादी विचारकों के वैचारिक द्वन्द्व…
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मेरा गांव, मेरा देश

गांधी की बुनियादी शिक्षा और बदलाव की मुहिम

बदलाव प्रतिनिधि, मुजफ्फरपुर महात्मा गांधी ने 1910  में दक्षिण अफ्रीका में टाल्सटाय आश्रम में जिस तरह की शिक्षा की शुरुआत की थी ,वह उनका अभिनव प्रयोग था। न नई तालीम…
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गांव के नायक

बापू के विचारों को जीने की कला सिखाने वाले ‘सोपान’

आज गांधी जयंती है और लोग गांधी को याद कर रहे हैं। मैं इस मौके पर एक ऐसी शख्सियत की चर्चा करना चाहता हूं, जो गांधी के हमारे करीब होने…
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बिहार/झारखंड

गांधी और अराजकवादियों का वैचारिक द्वंद्व

इस शृंखला के अन्तर्गत आप अभी तक अराजकवाद से सम्बंधित विभिन्न दार्शनिकों के विचारों से अवगत हो चुके हैं । अराजकवादी विचारक किस तरह वर्तमान औद्योगिक सभ्यता को ही समस्या…
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आईना

औद्योगीकरण के आगे साम्यवाद का टूटा सपना !

गांधी और व्यावहारिक अराजकवाद भाग-2 औद्योगिक क्रांति के बाद यूरोप में मजदूर वर्ग की स्थिति को सुधारने के  जो प्रारम्भिक प्रयास हुए उसका मूल उद्देश्य विकास की इस धारा से…
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आईना

सजा छात्र को दी गई और दर्द गांधीजी को हुआ

सत्य के प्रयोग पार्ट -2 पहली कड़ी में आपने पढ़ा कि महात्मा गांधी ने  दक्षिण अफ्रीका में जेल की सजा काट रहे सत्याग्रहियों  के आश्रितों का भरण पोषण और उनके…
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चौपाल

राज व्यवस्था, जनता और गांधीवाद

सच्चिदानन्द सिन्हा प्रख्यात समाजवादी चिंतक हैं। इस वर्ष वे  अपनी जिंदगी के 90 वां वर्ष पूरा कर 91 वां वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं।  गांधी शांति प्रतिष्ठान व्याख्यान (…
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मेरा गांव, मेरा देश

नोएडा के गांव वाजिदपुर में 29 को ‘नई तालीम’ पर होगी बात

बदलाव प्रतिनिधि सोपान जोशी 'ढाई आखर फाउंडेशन', 'अंडर द ट्री' और 'बदलाव' की पहल पर बच्चे, महिलाएं और गांधी की 'नई तालीम' विषय पर 29 सितंबर, रविवार को एक परिचर्चा…
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मेरा गांव, मेरा देश

पढ़ने-पढ़ाने के प्रयोग और गांधी

गांधी जी ने  1910  में दक्षिण अफ्रीका में टालस्टाय आश्रम की  स्थापना की थी। यह आश्रम डरबन से 21 मील दूर था। आश्रम में उनके साथ हिंदू, मुसलमान, ईसाई और…
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बिहार/झारखंड

आदमी का डर खत्म हो तो समझो देश आज़ाद है- गांधी

पीयूष बबेले ‘गांधीजी’ शब्द मैंने पहली बार कब सुना, यह बता पाना नामुमकिन है. जैसे कि और भी बहुत सी संज्ञाओं के बारे में मैं ठीक-ठीक नहीं बता सकता कि…
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