पुष्यमित्र आनन्द दत्ता की जितनी भी तारीफ की जाये कम है। एक बेहतरीन पत्रकार, फोटोग्राफर, मैं शायद कभी इनसे ठीक
Category: सुन हो सरकार
सबसे ज्यादा बेटियों को लील रही है चमकी… साथी हाथ बढ़ाना
बिहार: AES से मरने वालों में ज्यादातर गरीब हैं, गरीबों में भी ज्यादातर महादलित परिवार के लोग हैं और उनमें
पत्रकारों की गिरफ्तारी ‘दमनकारी नीति’ का हिस्सा तो नहीं ?
पुष्य मित्र कई बार कुछ खबरें आपको बहुत कुछ बोलने पर मजबूर कर देती है, वहीं कुछ खबरें सन्नाटे में
क्यों विपक्ष और जनपक्ष हो जाना ही निष्पक्ष पत्रकारिता है?
पुष्यमित्रजब मैं लिखता हूं कि पत्रकार का काम शास्वत विपक्ष हो जाना है तो कई मित्र को आपत्ति होती है।
हम पत्रकार तो शास्वत विपक्ष हैं
पुष्यमित्र के फेसबुक से साभार 1961 में जब ब्रिटेन की रानी भारत आई थी और नेहरू उसके स्वागत में बिछे
फसल खरीद ना होने पर देवरिया के पिंडी गांव में चुनाव बहिष्कार का फैसला
सत्येंद्र कुमार यादव लोकसभा चुनाव में गांव के स्थानीय मुद्दे नदारद हैं । कोई राष्ट्रवाद के नाम पर चुनाव लड़
सहिष्णुता और गांधी
पशुपति शर्मा दक्षिण अफ्रीका में जोहांसबर्ग से प्रिटोरिया तक की रेल यात्रा। पीटरमारित्जबर्ग में ट्रेन से धक्का देकर गांधी को
ऑर्गन डोनेशन: सवाल वोटिंग से कहीं आगे का है…
पशुपति शर्मा के फेसबुक वॉल से साभार ये मेरी दीदी हैं- वीणा शर्मा। कल बेंगलुरु में वोट किया और अपील
देश में पहले आम चुनाव से ही ‘लोकतंत्र’ पर भारी रहा है ‘अर्थतंत्र’
ब्रह्मानंद ठाकुर उस चुनाव में रामवृक्ष बेनीपुरी कटरा दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र से सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार थे। उनका मुकाबला कांग्रेस
देश के पहले आम चुनाव की एक झलक
ब्रह्मानंद ठाकुर भारत में लोकतंत्र का महापर्व ( 17 वां लोकसभा चुनाव ) चल रहा है। इस पूंजीवादी राजसत्ता में