कहां तक मन को ये अंधेरे छलेंगे, उदासी भरे दिन कभी तो ढलेंगे। 29 मई की रात हरेंद्र भाई ने
Author: badalav
मीडिया से ज्यादा गांव में ‘फील गुड’-सुधीर सुंदरियाल
एक अच्छी नौकरी और अच्छा घर हर किसी का सपना होता है, इसके लिए अपना घर-बार छोड़ गांव से बड़ी
हरित क्रांति वाला पूर्वांचल क्या कोरोना काल में करेगा नई क्रांति ?
कोरोना काल को ‘रिवर्स पलायन’ के तौर पर भी याद किया जाएगा। शहर की चकाचौंध छोड़कर बड़ी संख्या में लोग
पूर्णिया के डीएम, एसपी, अधिकारियों, सांसद, विधायक के नाम एक पाती
कोरोना का संकट काल और इस बीच अहंकार की लड़ाई। सुनकर आपको अचरज जरूर होगा लेकिन बिहार के पूर्णिया जिले
‘लोकल’ को ‘ग्लोबल’ बनाने गांव लौट रहा है इंडिया !
कोरोना ने पूरी दुनिया में उथल-पुथल मचा दी है । हिंदुस्तान भी उससे अछूता नहीं रहा है । कल तक
तुम ही रहोगे !
नीलू अखिलेश कुमार तुम थे, तुम हो ,तुम ही रहोगे । अच्छा किया तुमनेजो बीमारी की तरहपटे आ रहे अपने
हां मैं थोड़ा स्वार्थी हूं
मोना चौहान के फेसबुक वॉल से साभार मैं भारत का नागरिक हूँहाँ मैं थोड़ा स्वार्थी हूँआज मुझे मतलब है खुद
‘मजदूर को मजबूर किया फिर किया बदनाम’
सुनील श्रीवास्तव की फेसबुक वॉल से साभार उसे आप ने शराबकी दुकान पर देखा,उसकी फटी कमीज़ देखी,फटा पैंट भी देखा
क्यों कर रही हो इतना चीं-चीं ?
नीलू अखिलेश कुमार क्यों कर रही हो इतना चीं-चींकिमेरे सारे काम रुक गए हैं ।देखोशाम ढली। तुम्हारे जैसेकितने ही पक्षीलौट
‘भलु लगद’ वाले सुधीर हैं समाज का ‘फील गुड’ फैक्टर
अरुण यादव गांव की हरियाली और शुद्ध दाना-पानी छोड़कर युवा बड़ी उम्मीद लेकर शहरों की तरफ भागे चले आते हैं।
