ये जो सफेद स्वीमिंग पूल है पूल समझने की तुम्हारी भूल है इसे मैंने मेरे ख़ून से रंगा है तब
Author: badalav
डंडा सें डंडा लड़े, ऊंट लड़े मुंह जोर
कीर्ति दीक्षित किसी को नीचा दिखाना हो या फिर किसी को बुरा भला कहना हो तो पढ़ा लिखा समाज उसे
अमेरिका से लौटी ‘भक्तन’ बदल रही है गांव
सत्येंद्र कुमार यादव सपनों ने उड़ान भरी और वो पहुंच गई अमेरिका, लेकिन पिता का दिल बेटी की कामयाबी विदेश
बाराह छत्तर मेला, पूर्णिमा बीत गैले… ‘अंधियारा’ छंटलै कि
रूपेश कुमार नेपाल के वराह क्षेत्र में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले मेले में कोसी क्षेत्र के हजारो
हिंदु तुरक हम एके जाना- दरिया साहब
सुधा निकेतन रंजनी मध्ययुग में बहुत सारे पंथों और सम्प्रदायों की स्थापना हुई। भारत में इस समय व्यापारों और दस्तकारों
बिना बिजली के चुनावी ‘करंट’ दौड़ रहा है!
अरविंद पांडेय बाहर लालटेन जल रही है…जो छज्जे पर लगे हुक के सहारे टांग दी गई है। रोशनी इतनी ही
मुठभेड़ के नाम पर बंद हो सरकारी हिंसा
दिवाकर मुक्तिबोध आत्मसमर्पित नक्सलियों को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नौकरी में लेने की पेशकश क्या राज्य में हिंसात्मक नक्सलवाद के ताबूत
‘वीरों की धरती’… लहूलुहान और वीरान क्यों ?
आशीष सागर दीक्षित उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में विभाजित बुंदेलखंड का इलाका पिछले कई सालों से प्राकृतिक आपदाओं का दंश
ज़िंदगी इतने बड़े इम्तिहान क्यों लेती है ?
कीर्ति दीक्षित कई दिनों से फेसबुक पर उसकी पीहू और उसे देख रही हूं। एक बार नहीं दर्जनों बार। अखबारों
