Tag archives for कविता

आईना

ना कह के भी, सब कहना है

अर्चना रीत जब उमड़े ज्वार सवालों केजब शब्दों में कहना हो मुश्किलजब कहना चाहो, अंदर का सबजब लगे कौन समझेगा, ये सबजब उलझन खुद ही, उलझी खुद में जब गिरह के…
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आईना

फूल और पत्तियां

पशुपति शर्मा/ आज फूल कर रहे थे बातें गुलाब, अपने रूप पर इतरा रहा था गेंदा, अपने गुणों का बखान कर रहा था सूरजमुखी, सूरज को ताक रहा था बाग…
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आईना

साइलेंसर वाले इंसान

पशुपति शर्मा के फेसबुक वॉल से साभार बिहार के मशहूर चित्रकार राजेंद्र प्रसाद गुप्ता की कृति साइलेंसर वाली बंदूक बड़ी ख़तरनाक होती है  आपके आस-पास  चलते-फिरते शख्स को वो बुलाएंगे…
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बिहार/झारखंड

अगिला बार ढेर दिन खातिर अईह

अखिलेश्वर पांडेय तस्वीर सौजन्य- अजय कुमार कोसी बिहार कम पानी वाले पोखर की मछलियां  दुबरा गयीं हैं ऊसर पड़े खेतों की मेढ़ें रो रही हैं बेरोजगार लड़कों का पांव मुचक…
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चौपाल

अखबार के जरिए यथार्थ से जुड़ना, एक मुगालता- आलोक श्रीवास्तव

पशुपति शर्मा पत्रकारिता में वैश्वीकरण के बाद एक नया बदलाव आया है। वो समाज के बड़े मुद्दों पर बात नहीं करती, समाज सापेक्ष न हो कर वो सिविक समस्याओं पर…
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गांव के रंग

आलोक श्रीवास्तव की दो कविताएं

एक दिन आएगा एक दिन आएगा जब तुम जिस भी रास्ते से गुजरोगी वहीं सबसे पहले खिलेंगे फूल तुम जिन भी झरनों को छुओगी सबसे मीठा होगा उनका पानी जिन…
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यूपी/उत्तराखंड

लगता है इंसानियत का खेत बंजर हो गया

बदलाव प्रतिनिधि, ग़ाज़ियाबाद 26 अगस्त ’ 2018, रविवार, वैशाली,गाजियाबाद।  “प्रेम सौहार्द भाई चारे” पर गीतों , कविताओं और गजलों से परिपूर्ण “पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” की 47वीं साहित्य गोष्ठी वैशाली सेक्टर चार, स्थित हरे भरे मनोरम सेंट्रल पार्क में सम्पन्न हुई। गोष्ठी…
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आईना

गिलहरी

अभिषेक राज दिल में आता है एक गिलहरी पाल लूं ऑफिस से आते जाते ही सही मैं उसका हाल लूं उसकी रेशम सी पूंछ अपनी उंगलियों में उलझा कर कुछ…
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चौपाल

कबीर की परंपरा के कवि नागार्जुन

ब्रह्मानंद ठाकुर अक्खड़पन और खड़ी-खड़ी कहने की परम्परा में बाबा नागार्जुन कबीर के काफी करीब पड़ते हैं। किसी को बुरा लगे या भला, उनको जो सही लगा, बिना किसी लाग-…
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