Tag archives for कविता

चौपाल

अखबार के जरिए यथार्थ से जुड़ना, एक मुगालता- आलोक श्रीवास्तव

पशुपति शर्मा पत्रकारिता में वैश्वीकरण के बाद एक नया बदलाव आया है। वो समाज के बड़े मुद्दों पर बात नहीं करती, समाज सापेक्ष न हो कर वो सिविक समस्याओं पर…
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गांव के रंग

आलोक श्रीवास्तव की दो कविताएं

एक दिन आएगा एक दिन आएगा जब तुम जिस भी रास्ते से गुजरोगी वहीं सबसे पहले खिलेंगे फूल तुम जिन भी झरनों को छुओगी सबसे मीठा होगा उनका पानी जिन…
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यूपी/उत्तराखंड

लगता है इंसानियत का खेत बंजर हो गया

बदलाव प्रतिनिधि, ग़ाज़ियाबाद 26 अगस्त ’ 2018, रविवार, वैशाली,गाजियाबाद।  “प्रेम सौहार्द भाई चारे” पर गीतों , कविताओं और गजलों से परिपूर्ण “पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” की 47वीं साहित्य गोष्ठी वैशाली सेक्टर चार, स्थित हरे भरे मनोरम सेंट्रल पार्क में सम्पन्न हुई। गोष्ठी…
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आईना

गिलहरी

अभिषेक राज दिल में आता है एक गिलहरी पाल लूं ऑफिस से आते जाते ही सही मैं उसका हाल लूं उसकी रेशम सी पूंछ अपनी उंगलियों में उलझा कर कुछ…
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चौपाल

कबीर की परंपरा के कवि नागार्जुन

ब्रह्मानंद ठाकुर अक्खड़पन और खड़ी-खड़ी कहने की परम्परा में बाबा नागार्जुन कबीर के काफी करीब पड़ते हैं। किसी को बुरा लगे या भला, उनको जो सही लगा, बिना किसी लाग-…
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परब-त्योहार

मां जैसा कोई डांटता नहीं

रुपेश कुमार मां जैसा  कोई डांटता नहीं मां जैसा कोई  मनाता भी नहीं ! सबसे छुपा कर जतन से बचा कर वो फटोना औ मिठाई कोई  खिलाता भी नहीं !…
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आईना

बचपन की मुस्कान

डॉक्टर प्रीता प्रिया बचपन के दिन  बिताए हैं मैंने  सूरज की किरणों की डोली पर चंदा के पलने पर मैंने  बचपन की रात गुजारी है  बचपन में मैंने जीवन की …
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माटी की खुशबू

कांपता हृदय और पिता

रुपेश कुमार जब देखता हूं ढीली होती पेशियां पिता की बहुत कांपता है हृदय ! सुबह जब कभी  लेटते हैं देर तक पिता तब जी कड़ा कर उन्हें जाता हूँ…
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माटी की खुशबू

श्रम से निखरता सौंदर्य

डॉ. भावना बिहार के प्रसिद्ध चित्रकार राजेंद्र प्रसाद गुप्ता की कृति। बलुई के ढलान से बोझा लिए जब भी गुज़रती है वह काली लड़की तो लोग उसे चिढ़ाते हैं 'करीअक्की'…
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