Tag archives for कविता

यूपी/उत्तराखंड

“पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” की 40वीं साहित्य गोष्ठी सम्पन्न

बदलाव प्रतिनिधि 28 जनवरी’ 2018, रविवार, वैशाली,गाजियाबाद। “68वें गणतन्त्र दिवस के अवसर पर देश भक्ति व सामाजिक सौहार्द ” पर गीतों , कविताओं और गजलों से परिपूर्ण “पेड़ों की छांव…
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परब-त्योहार

काव्य फूलों की तरल मुस्कान से पट गई पूर्णिया की धरती

शंभु कुशाग्र नववर्ष 2018 की पूर्व संध्या पर पुराने साल को विदाई देने और नए साल के स्वागत में पूर्णिया के साहित्यकार भारतीय लेखक मंच के बैनर तले स्थानीय जिला…
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माटी की खुशबू

… और मां के साथ मर गया मनुष्य

देवांशु झा बेटे ने बूढ़ी मां से कहा मां चलो, सूर्य नमस्कार करते हैं लगभग अपंग मां सहज तैयार हुई बहू ने खुश होकर दरवाजा खोला बेटे ने मां को…
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परब-त्योहार

गए साल को चरण स्पर्श

नीलू अग्रवाल विदा, विदा, विदा...अलविदा। अब मिलेंगे नहीं कभी नहीं हमें है पता। हँसते हुए, फिर भी देते हैं विदा। तुम जाओ यही नियति है। वह आएगा कुनकुनाता, गुनगुनाता चुलबुलाता…
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माटी की खुशबू

छांव

मृदुला शुक्ला छाँव कहाँ होती है  अकेली खुद में कुछ  ये तो पेड़ों पर पत्तियों का  दीवारों पर छत का  वजूद भर है पतझड़ में पेड़ों से नहीं झरती  महज…
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आईना

आत्मवंचना

अखिलेश्वर पांडेय शाबासी की सीढ़ीयां चढ़ते हुए पहुंच गया हूं उस मुकाम पर जहां से सिर्फ भीड़ दिख रही आंखें पारदर्शी हो गयी हैं होठ चुप हैं कानों में 'स्व'…
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माटी की खुशबू

‘अंतरात्मा की पीड़ित विवेक-चेतना’ के कवि को अलविदा

उदय प्रकाश 'आत्मजयी' वह कविता संग्रह था, जिसके द्वारा मैं कुंवर नारायण जी की कविताओं के संपर्क में आया. तब मैं गाँव में था और स्कूल में पढ़ता था. 'आत्मजयी'…
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बिहार/झारखंड

समय ‘वाचाल’ है और कवि ‘मौन’!

पशुपति शर्मा 'समय वाचाल है' इसी शीर्षक से आजतक में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार साथी देवांशुजी का काव्य संग्रह हाथ में आ गया है। इस बार 'साहित्य आजतक' में सम्मिलित होने…
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माटी की खुशबू

मां की आदत

मां ने पल्लू में अभी तक बांधकर रखी है  मेरी पहली खिलखिलाहट जटामासी जैसे मेरे बालों के गुच्छे पोटली में सहेज रखा है गांव के ब्रह्म बाबा को अर्पित करने…
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आईना

मित्र

तस्वीर-अजय कुमार कोशी बिहार मित्र करता हूं मैं कई बार तुम्हारी आलोचना वह आलोचना जितनी तुम्हारी होती है उतनी ही मेरी भी ऐसा लगता है मुझको क्योंकि ये शब्द हमेशा…
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