Archives for माटी की खुशबू - Page 10

गांव की गलियां

सहरसा के आरण गांव में नाचे मन ‘मोर’

सभी फोटो- बिपिन कुमार सिंह पुष्य मित्र आपके घर के बाहर अगर मोर नज़र आ जाए तो बरबस ही मन नाच उठेगा और बचपन की धुंधली यादें ताजा हो जाएंगी…
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माटी की खुशबू

मरखइया गाय अब हूरपेटती नहीं, जाने कहां चली गई

दृगराज मधेशिया मोदी जी ने जब गौ रक्षकों के वेश में छिपे लोगों के चेहरों से नकाब हटाई तो बहुतों को मिर्ची लगी। इसकी जलन अभी कई महीनों तक महसूस…
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मुस्लिम बस्ती में यूं खुले दिल, घर और मस्जिद के दरवाजे

देविंदर कौर उप्पल भोपाल से लगभग 40 मील दूर का कस्बा रायसेन दो साल पहले धार्मिक मतभेद से उपजी हिंसा के कारण खबरों में था लेकिन पिछले सप्ताह की 6-7…
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कीर्ति दीक्षित के उपन्यास ‘जनेऊ’ की पहली झलक

कीर्ति दीक्षित का उपन्यास जनेऊ । बुंदेलखंड के पृष्ठभूमि पर आधारित । सत्येंद्र कुमार यादव मार्च 2009 में ईटीवी न्यूज से जुड़ा। फिर मुझे रायपुर से हैदराबाद जाना हुआ। चूंकि…
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माटी की खुशबू

यात्रीगण, पहलेजा घाट पर अब न ढूंढें पुरानी गंगा

अभया श्रीवास्तव घाट के नाम पर ही बन गया स्टेशन। जहां से कभी स्टीमर चला करते थे, वहां से अब रेल पुल बन गया है। मैं गोरखपुर से पटना  जा…
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रोटियां उनकी थाली में कम, भूखे क्यों तुम ?

फोटो सौजन्य-अजय कुमार, कोसी बिहार जब, तुम खोद रहे होते हो खाई अपने और उनके बीच सिर पर टोकरा लिए वो बना रहे होते हैं पुल। तुम जी लेते हो…
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मैनपुरी का ‘मास्टर्स इन फ्लावर’

दिल्ली के कृषि मेले में फूलों के बीच युवा किसान रवि पाल अरुण यादव बदलाव की बयार कब और कहां से निकलेगी ये कोई नहीं जानता । क्या आप सोच…
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30 साल बाद… अपने कॉलेज में ‘ताका-झांकी’

मुज़फ़्फ़रपुर के एलएस कॉलेज की नई-पुरानी यादें (मैं, ममता और मेरी बेटी ) अजीत अंजुम की फेसबुक वॉल से अतीत बहुत पीछे छूट जाता है । असंख्य चेहरे होते हैं,…
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नौबतपुर का अनोखा रामभक्त

चित्र- रवि वर्मा पुष्य मित्र देश में कभी राम को लेकर वाकयुद्ध चलता है तो कभी भारत माता के नाम पर महाभारत, लेकिन ऐसे लोगों को ना तो राम से…
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चाची के हाथ की मछली खाने की ललक

मनोरमा सिंह ये मिश्रा चाची हैं। बरौनी आरटीएस, में मेरे पड़ोस की चाची। मैथिल और अंगिका बोलने वाली चाची, अपनी पीढ़ी में राजनीतिक रूप से जबरदस्त सचेत महिला हुआ करती…
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