एक वर्ष ने और विदा ली एक वर्ष आया फिर द्वार गए वर्ष को अंक लगाकर नये वर्ष की
Category: मेरा गांव, मेरा देश
कल सवेरा मुस्कुराएगा
पीके ख्याल नव वर्ष का सूरज, बीते बरस का अंधेरा मिटाएगा, मत हो उदास सुबह आकर सवेरा मुस्कुराएगा । ।
”सुजाता” के बहाने
दिवाकर मुक्तिबोध 6 दिसंबर 2015, रविवार के दिन रायपुर टॉकीज का ”सरोकार का सिनेमा” देखने मन ललचा गया। आमतौर अब
जल उठा उम्मीदों का ‘दीया’
सत्येंद्र कुमार यादव आज कुछ बच्चे हंस रहे थे, मुस्कुरा रहे थे। तालियां बजा कर उत्साह मना रहे थे। अपनी
कभी यहां शेर रहते थे, आज राजनीति के ‘लकड़बग्घे’
कुमार सर्वेश यहां ‘धान का कटोरा’ है, प्राकृतिक सौंदर्य की वनदेवी है, खनिज संपदा के पहाड़ हैं, जड़ी-बूटियों के जंगल हैं,
‘सूखे’ की खूंटी पर टंगा ‘साहित्य’
दिवाकर मुक्तिबोध ‘श्रेय’ की राजनीति में निपट गया रायपुर साहित्य महोत्सव। कुछ तारीखें भुलाए नहीं भूलती। याद रहती हैं, किन्हीं
एसिड से भी खाक नहीं कविता का सौंदर्य!
प्रतिभा ज्योति लोग अक्सर सोशल साइटस पर अपने आकर्षक और खूबसूरत तस्वीरें पोस्ट किया करते हैं। पोस्ट के बाद
16 मौजों के मजरा गांव में चाय वाली की चर्चा
सियासत उसके लिए किसी अबूझ पहेली से कम नहीं थी। चुनाव लड़ना तो दूर उसके बारे में सोचने की फिर
चुर्रामुर्रा के शिखर के चांद हैं डॉक्टर चंद्रशेखर
सत्येंद्र कुमार यादव हरियाणा में गांव प्रधान के चुनावों में शिक्षा की शर्त लागू कर दी गई है। व्यावहारिक रूप में
हुनरमंद बेटियों के हाथ गांव की ‘सरकार’
टीम बदलाव 13 दिसंबर को यूपी के गांवों की ‘सरकार’ बन गई। काफी उठापटक के बाद लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से ग्राम
