सच्चिदानंद जोशी

hillary-vs-trumpकरवा चौथ और अमेरिकी चुनाव। आप भी सोचते होंगे की करवा चौथ का अमेरिका में होने वाले चुनाव से क्या सम्बन्ध है। घटना ही कुछ ऐसी है। वाराणसी से लौट रहा था। हवाई जहाज में मेरे पास एक मध्यमवयीन विदेशी दंपत्ति बैठे थे। सफ़र में बिना वजह बात करना मुझे भाता नहीं। और फिर अपने प्रिय काम “नींद “ लेने के लिए इससे माकूल समय भी तो नहीं होता। लिहाजा मैं झपकी लेने लगा।

फ्लाइट इंडिगो की थी जिसमें खाना या चाय खरीद कर पीना पड़ता है। जैसे ही परिचारिका मेरे पास आई उसने मुझसे मेरा बोर्डिंग पास माँगा। चूँकि मेरा टिकट ऑफिस द्वारा किया गया था इसलिए उसमें चाय नाश्ते के पैसे पहले से दे दिए गए थे। मैंने चाय और काजू का डिब्बा लिया। मेरे पास बैठे दंपत्ति इस बात को ध्यान से देख रहे थे। आखिर महिला से न रहा गया। उसने पूछ ही लिया “एयर होस्टेस आपको तो चाय दी लेकिन हमे नहीं दी, ऐसा क्यों ? ” मैं उन्हें इंडिगो कंपनी का तंत्र समझाने लगा। जब मैं पूरी बात कर चुका तो उनकी समझ में आया कि इस फ्लाइट में ये सब सशुल्क है।

सफ़रनामा-2

इतनी सारी बात हुई तो उनसे ये पूछना लाजिमी था कि वो कहाँ से आये हैं।उत्तर में उन्होंने बताया की वे लांस एंजिल्स से भारत घूमने आये हैं।अमेरिका का नाम सुन कर वहां नवम्बर में होने वाले चुनावी दंगल की चर्चा करने का मन हो आया। मैंने उनसे उम्मीदवारों के बारे में राय जाननी चाही। पति ने मुझसे पूछा “आप किसे चाहते है”। मैंने कहा “इस बार तो हमें हिलेरी की हवा दिखती है, और उसे जीतना भी चाहिए। पहली बार कोई महिला आपके देश की राष्ट्रपति बनेंगी “।

karwa-bsfमेरी बात पति को पसंद नहीं आई और वो बोला “राष्ट्रपति बन कर कौन सा बड़ा काम कर देंगी। अपना घर तो ठीक से संभाल लें। उसकी बात लगभग काट कर पत्नी बोल उठी-” नहीं उसे ही बनना चाहिए , वो काबिल है, अनुभवी है।” “ऐसा कुछ भी नहीं है। ट्रम्प भी बहुत अच्छा है। कई बार अनुभवहीन होना अच्छा होता है। रेगन इसका उदाहरण है।” पति बोला और उठ कर वाशरूम चला गया। उसके जाने के बाद पत्नी बोली, “मेरे पति को इस बात की चर्चा बिलकुल अच्छी नहीं लगती। वो चाहता है ट्रम्प ही जीते। पक्का बिज़नेस वाला दिमाग है इसका। मेरे ऊपर भी जोर लगा रहा है। ” इसके बाद जो उसने अपने पति के लिए कहा उसे अंग्रेजी में ही लिखने में मज़ा है। उसने कहा “He is a typical male chauvinistic pig. But I am going to teach him a lession. If he votes for Trump, I am going to spoil his vote by voting for Hillery.” इस बीच उसका पति आ गया और वो ऐसे चुप हो गयी जैसे हमारे बीच कोई संवाद ही न हुआ हो।

पति ने अखबार उठाया और और पत्नी को कुछ दिखने लगा। पहले दिन संपन्न हुए करवाचौथ त्यौहार के फोटो अख़बार में थे। उसने फोटो के नीचे का विवरण देखा और हँसने लगा। अपने मोबाइल से अख़बार की तस्वीर भी ली। “आपके देश में अभी भी पति को भगवान जैसा मानते हैं” उसने पूछा तो मुझे बताना पड़ा कि हमारे देश में पति पत्नी का रिश्ता कितनी गहराई और कितनी ऊंचाई लिए हुए है। “फिर भी ये व्रत तो बकवास है। हम तो स्त्री पुरुष में कोई फर्क नहीं मानते। ये सब पुराने दकियानूसी विचार हैं।” उसने कहा।

अतिथियों का आदर करना तो हमारी परंपरा है। उस पर विदेशी अतिथि तो और भी विशेष होते हैं। फिर भी मुझसे न रहा गया और अपने आतिथ्य को ताक पर रख कर मैं बोल पड़ा- “हम करवा चौथ मनाते हैं तो हम पिछड़े हैं लेकिन हमारे यहाँ महिला प्रधानमंत्री हुई आज से पैंतालीस साल पहले और नौ साल पहले महिला राष्ट्रपति भी हो गयी। आप अभी भी एक महिला को इस पद के उम्मीदवार के रूप में भी स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।” मेरी बात पर पति चुप हो गया और उसकी पत्नी जो हम दोनों के बीच बैठी थी, ने धीरे से मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर मेरे कथन पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी। हो सकता है मेरे इस कथन से उस अतिथि का निरादर हो गया हो , लेकिन अपने देश की परंपरा और इतिहास का अपमान मैं कैसे होने देता?


sachidanand-joshi-profileसच्चिदानंद जोशी। शिक्षाविद, संस्कृतिकर्मी, रंगकर्मी। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय और कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय में पत्रकारिता की एक पीढ़ी तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। इन दिनों इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स के मेंबर सेक्रेटरी के तौर पर सक्रिय।


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