जानिए यूपी में किस लोकसभा सीट पर किस चरण में वोटिंग होगी

टीम बदलाव लोकसभा चुनाव का बिगल बज चुका है । सात चरणों में चुनाव होना है । यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल में सभी सातों चरणों में वो डाले जाएंगे […]Read More »

बिहार के किशनगंज में चुनाव लड़ने से क्यों भाग रहे हैं NDA नेता

पुष्यमित्र शुक्रवार को किशनगंज के टेढागाछ प्रखंड मुख्यालय पहुंचा तो मालूम हुआ कि इस जगह का असली नाम दही भात है। जान कर बहुत आश्चर्य हुआ। आखिरी किसी जगह का […]Read More »

स्वतंत्र पत्रकारिता के नए प्रयोग पर निकल पड़ा है पथिक पुष्यमित्र

देश में चुनाव आने वाला है। सरकार अपना गुणगान करने में लगी है और विपक्ष सवाल उठाने में जुटा है । ऐसे में मीडिया का रोल अहम हो जाता है, […]Read More »

7 मार्च को शादी थी... मेजर ने जल्द घर लौटने का किया था वादा

मेजर चित्रेश बिष्ट की 7 मार्च को शादी थी। एक युवा जिसने सपने देखने भी शुरू नहीं किये थे, आतंकवाद का शिकार हो गया। जम्मू-कश्मीर में LOC पर नौशेरा सेक्टर […]Read More »

विकास के दावों के बीच पानी ढोना ही जहां ज़िन्दगी है !

विकास के बड़े दावों के बीच देश के आदिवासी क्षेत्रों में पानी के रंग कुछ ऐसे है। ये आदिवासी किसान रोजमर्रा की ज़रूरत को कोसों पथरीली सड़क पर नंगे पांव […]Read More »

घर में खुशियां आने वाली है... पिता को समझ नहीं आया बहू से क्या बताऊं ..?

वे गांव में रहते थे। साधारण किसान थे। वक़्त बदला तो अहसास हुआ कि परिवार की जिंदगी बदलनी है। शहर आ गए। कभी जूस बेचा तो कभी कोई और धंधा […]Read More »

'सिंह' अगर मुलायम हो जाए तो...

अपने यहां नाम की बड़ी महिमा है। कई लोगों को नाम सूट कर जाता है। जिनको नाम सूट नहीं करता उनकी दुर्गति पर मार्केट में मुहावरे और लोकोक्तियां चल पड़े […]Read More »

राजगीर की प्राकृतिक छटा और टमटम की सवारी

 पुष्यमित्र राजगीर का घोड़ाकटोरा झील, मानसरोवर नहीं है, न ही सिक्किम के नाथुला इलाके में बसा छांगू लेक। मगर जनवरी के इस आधे कंपकपाते आधे सुलगते दिन में जब आप […]Read More »

जब मैंने पहली बार कर्पूरी ठाकुर को देखा और सुना

ब्रह्मानंद ठाकुर साल तो ठीक याद नहीं, शायद 1964-65 रहा होगा। मैं अपने गांव के बेसिक स्कूल में छठी कक्षा का विद्यार्थी था। नवम्बर का महीना था। मौसम भी खुशगवार। […]Read More »

सिर्फ नेता नहीं, कांग्रेस को नीति भी बदलनी होगी

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश के फेसबुक वॉल से साभार प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में आने का तात्कालिक तौर पर पूर्वी उत्तरप्रदेश में कांग्रेस की स्थिति पर जितना असर पड़ेगा, उससे […]Read More »

देश की सेहत सुधारने के लिए एक डॉक्टर का अनशन

अरुण यादव फेसबुक पर सर्च करते वक्त अचानक एक तस्वीर पर नजर टिक गई । जिसमें एक शख्स हाथ में तख्ती लिए हुए है और उस पर लिखा है हर […]Read More »

मसूरी की नहीं, विधायक को जघन्य अपराध करने वाले की है चिंता !

उत्तराखंड के नेता खोखले हैं ये बात एक बार फिर गणेश जोशी ने साबित कर दी. विवादों को साये की तरह साथ रखने वाले मसूरी के विधायक गणेश जोशी को […]Read More »

नरसिम्हा राव से लेकर मोदी तक सवर्ण आरक्षण और राजनीति

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the Nation on the occasion of 70th Independence Day from the ramparts of Red Fort, in Delhi on August 15, 2016.सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में अब सवर्णों को भी 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा । अब तक आरक्षण का फायदा SC, ST और OBC को मिल रहा था, कुछ राज्यों […]Read More »

एक ओर योगी की बात... दूसरी ओर गायों की लाश

2017 में जब यूपी की सत्ता बदली और एक मंदिर का महंत, गाय को प्यार करने वाला सीएम की कुर्सी पर बैठा तो लगा कि गायों के अच्छे दिन जल्द […]Read More »

'ईमानदार डीएम' के आवास पर CBI छापा

साल 2014 में वो तस्वीरें खबरों में छा गई थीं। एक डीएम की ईमानदारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की चर्चा ना सिर्फ टीवी पर बल्कि अखबारों की सूर्खियां थीं। […]Read More »

राम नाम की 'सियासी माया' और आस्था की जमीनी हकीकत

निखिल दुबे के फेसबुक वॉल से साभार समाज और सियासत की NO PARKING में खड़े कर दिए गए हैं भगवान। एक मासूम और सफाई कर्मी के लिए इनमें और कूड़े […]Read More »

खुशहाली के ख्‍वाब और 'रेगिस्‍तान'!

दयाशंकर जी के फेसबुक वॉल से साभार ‘डियर जिंदगी’ को देशभर से पाठकों का स्‍नेह मिल रहा है. हमें हर दिन नए अनुभव, प्रतिक्रिया मिल रही है। जितना संभव हो […]Read More »

मेरा बचपन और मेरा गांव

ब्रह्मानंद ठाकुर होश संभालते ही देखा  शीशम के खम्भे पर टिका फूस का घर । बाहर से टाटी से घिरे घर के दरबाजे पर शीशम के मोटे तख्ते  से बनी […]Read More »

किसान आंदोलन और मीडिया की माया

टीम बदलाव पिछले 6 महीने में देश का अन्नदाता तीसरी बार लोकतंत्र के मंदिर पर मत्था टेकने आ चुका है । कभी उसका स्वागत लाठियों से हुआ तो कभी गालियों […]Read More »

अन्नदाता के लिए आखिर संसद का विशेष सत्र क्यों नहीं ?

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश के फेसबुक वॉल से साभार मेरा रिपोर्टर-मन नहीं माना! दो दिन से तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही थी, फिर भी पहुंच गया संसद मार्ग! किसानों से […]Read More »

अगिला बार ढेर दिन खातिर अईह

अखिलेश्वर पांडेय कम पानी वाले पोखर की मछलियां दुबरा गयीं हैंऊसर पड़े खेतों की मेढ़ें रो रही हैं बेरोजगार लड़कों का पांव मुचक गया है पुलिस बहाली में दौड़ते-दौड़ते बुजुर्गों की […]Read More »

विकास में पिछड़ते गांव और बढ़ता आर्थिक असंतुलन

शिरीष खरे विशेष तौर पर सत्तर के दशक में गांवों के लिए कई परियोजनाएं और कार्यक्रम चलाए गए। इसके पीछे के कारण में जाएं तो इस समय तक यह सोचा […]Read More »

हाइब्रिड बीज का मायाजाल और किसानों की दुर्दशा

ब्रह्मानंद ठाकुर मनकचोटन भाई के दलान पर सांझ होते ही हमेशा की तरह  आज भी टोला के लोगों का जुटान होने लगा। परसन कक्का और बटेसर भाई भी  साथ आए थे। […]Read More »

ग्रामीण भारत की बदहाली और आर्थिक विकास का लालीपॉप

शिरीष खरे भारत में ग्रामीण और शहरी अंचल के लिए निर्धनता का निर्धारण अलग-अलग तरह से होता है। एक आंकड़े के मुताबिक भारत के 75 प्रतिशत निर्धन गांवों में रहते […]Read More »

 टीस भरा बचपन

वीरेन नन्दा बचपन की यादों में लौटना केवल वही चाहते खोना  बचपन के दिन ममता में जिनके बीते  समता में बीते जिनके बचपन के दिन जेम्स चूसते बीता जिनका बचपन सोफे […]Read More »

सुकराती पर्व की सोन्ही यादें और बैलों की घंटी का संगीत 

ब्रह्मानंद ठाकुर इस दुनिया मे चिरंतन ,शाश्वत और अपरिवर्तनशील कुछ भी नहीं है। वस्तुजगत का कण – कण परिवर्तनशील है। मूल्य, मान्यताएं, आस्था, धर्म, विश्वास, नीति-नैतिकता और परम्परा भी इस […]Read More »

फिल्म से पहले पिता ने क्यों किया पीहू का स्टिंग ऑपरेशन

विनोद कापड़ी पीहू के माता-पिता रोहित विश्वकर्मा और प्रेरणा शर्मा की सहमति मिलने के बाद मैंने तय किया कि अब मुझे पीहू से रोज़ मिलना चाहिए। पीहू से दोस्ती बनाने […]Read More »

मुजफ्फरपुर जिले के सभी प्रखंडों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग

बदलाव प्रतिनिधि, मुजफ्फरपुर जिले के प्रगतिशील किसानों की बैठक 22 अक्टूबर को शहीद खुदीराम बोस – प्रफुल्ल चाकी स्मारक स्थल ,मुजफ्फरपुर मे आयोजित की गई। बैठक में किसान हित में […]Read More »

ऑफ करना सीख लो, नहीं तो खुद ऑफ हो जाओगे

टीम बदलाव ‘इंटरनेट क्रांति ने हमें एक अलग किस्म का इंसान बना दिया है, हम वर्चुअल वर्ल्ड में तो शेर बन जाते हैं, मगर असली दुनिया का सामना करते ही […]Read More »

प्रधानमंत्री की योजना के नाम पर बेटियों से ठगी

ब्रह्मानंद ठाकुर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और प्रधानमंत्री आयुष्यमान भारत योजना में ग्रामीण शिक्षित बेरोजगार युवकों को नौकरी के नाम पर कतिपय जालसाज गिरोहों द्वारा ठगी और धोखाधडी का सिलसिला […]Read More »

पहले हम पापा के साथ रहते थे, अब पापा हमारे साथ रहते हैं…

दयाशंकर आपके परिवार में कौन-कौन है. मैं पत्‍नी और दो बच्‍चे. अब परिवार का यह सामान्‍य परिचय हो गया है. हर कोई कुछ इसी तरह से अपने परिवार के बारे […]Read More »

मधेपुरा में विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस पर बच्चों ने भावुक कर दिया

बदलाव प्रतिनिधि बदलाव और ढाई आखर फाउंडेशन की साझा पहल को मधेपुरा के वरिष्ठ पत्रकार और शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोगधर्मी रुपेश कुमार ने आगे बढ़ाया। उन्होंने ‘कल और आज- […]Read More »

पुलिस और आम जनता का ऐसा मिलन हो तो क्या कहना?

अखिलेश कुमार के फेसबुक वॉल से साभार 30 सितंबर को सोनथा (कोचाधमन), किशनगंज में नवोदय अलुम्नी असोशिएसन बिहार, (किशनगंज चैप्टर) ने मेगा हेल्थ कैम्प का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में […]Read More »

आस्था के नाम पर मूर्ख बनाने का घनघोर विश्वास गजब का है

राकेश कायस्थ के फेसबुक वॉल से साभार मेरे गृह राज्य झारखंड में एक मशहूर शिव तीर्थ है। बैजनाथ धाम। जिस तरह किसी भी लोक परंपरा में तीर्थों को लेकर कई […]Read More »

दुख, तकलीफ, पीड़ा में जादू-टोना वाला ससुराल मत भागो भईया

ब्रह्मानंद ठाकुर चुल्हन भाई तीन दिन पर ससुराल से लौटे हैं। वैसे वे यदा -कदा विशेष काज -परोजन पर ही ससुराल जाते हैं। इधर दो साल से वे ससुराल नहीं […]Read More »

अस्पताल के नाम पर दोहरा फर्जीवाड़ा, जमीन दानदाता से धोखा

ब्रह्मानंद ठाकुर आज से 6 साल पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर जिले के पिलखी मे बूढीगंडक नदी पर बने पुल का शिलान्यास करने आए थे। उसी दिन मौका पाकर स्थानीय […]Read More »

अबकी बार सियासत का 'सवर्ण संग्राम'

देश में कभी पिछड़ा वर्ग आंदोलन होता तो कभी एससी एसटी और सवर्ण । हर कोई अपने अपने तरीके से अपने-आंदोलनों को जायज ठहराता है । होना भी चाहिए । […]Read More »

लगता है इंसानियत का खेत बंजर हो गया

बदलाव प्रतिनिधि, ग़ाज़ियाबाद 26 अगस्त ’ 2018, रविवार, वैशाली,गाजियाबाद।  “प्रेम सौहार्द भाई चारे” पर गीतों , कविताओं और गजलों से परिपूर्ण “पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” की 47वीं साहित्य गोष्ठी वैशाली सेक्टर चार, स्थित हरे भरे मनोरम सेंट्रल पार्क में सम्पन्न हुई। गोष्ठी […]Read More »

बिल्डिंग तैयार है... 2 साल से डॉक्टर का इंतजार

गोरखपुर में एम्स बन रहा है । देवरिया जिले में मेडिकल कॉलेज बनाने का ऐलान हुआ है । हालांकि ये मेडिकल कॉलेज देवरिया जिले के सलेमपुर लोकसभा, बलिया और घोसी […]Read More »

समान और मुफ्त शिक्षा के लिए क्रांति

बदलाव प्रतिनिधि, मुजफ्फरपुर क्रांति दिवस, 9  अगस्त 1942 की 76वीं वर्षगांठ पर मुजफ्फरपुर शहर के छात्रों, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों एवं समाजसेवियों ने देश भर में समान और मुफ्त शिक्षा प्रणाली लागू […]Read More »

मुजफ्फरपुर कांड के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरी बेटियां

बदलाव प्रतिनिधि, मुजफ्फरपुर बेटियों ने भरी हुंकार, नही सहेंगे अत्याचार।  बहुचर्चित  मुजफ्फरपुर बालिका  गृह यौन उत्पीड़न कांड और सरैया में एक मासूम बालिका की बलात्कार के बाद  भाई सहित उसकी […]Read More »

मौजूदा शिक्षा नीति पर कुढ़नी से उठे सवाल

बदलाव प्रतिनिधि आल इण्डिया डेमोक्रेटिक स्टूडेन्ट्स आर्गेनाइजेशन ने मुजफ्फरपुर के एम आर एस हाईस्कूल ,मनियारी में 28 जुलाई को छात्र छात्राओं का एक सम्मेलन आयोजित किया। यह सम्मेलन एआईडीएसओ के […]Read More »

किसान एक कदम चले, मैं दो कदम साथ चलूंगा- मशरूम मैन दयाराम

विजय प्रकाश देश में मशरूम मैन के नाम से चर्चित कृषि वैज्ञानिक डॉ. दयाराम किसानों की आर्थिक सेहत सुधारने की दिशा में काम कर रहे हैं। मूल रूप से यूपी […]Read More »

मशरूम उत्पादन से दोगुनी होगी अन्नदाता की आमदनी- डॉ. दयाराम

विजय प्रकाश ”किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिए किसी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है, अगर अन्नदाता थोड़ी सी मेहनत और तकनीकी खेती पर ध्यान केंद्रित करे तो […]Read More »

दरभंगा के आम और जोधा-अकबर का 'प्रेम'

पुष्यमित्र आम का सीजन उफान पर है। इस साल भरपूर आम बाजार में उपलब्ध है, कीमत भी कम है, लिहाजा पूरा हिंदुस्तान खुलकर आम के रस में सराबोर हो रहा […]Read More »

मुजफ्फरपुर में याद किए गए राहुल सांकृत्यायन

ब्रह्मानंद ठाकुर महापंडित राहुल सांकृत्यायन वैज्ञानिक समाजवादी विचारधारा के अनथक योद्धा साहित्यकार थे। उन्होंने अपने अगाध पांडित्य  को वर्ग शत्रु के खिलाफ आम जनता के जनवादि अधिकारों के लिए हथियार […]Read More »

वीरेन नंदा की किस्सागोई पार्ट 4-5

वीरेन नन्दा किस्सागोई के के तीसरे अंक में आपने पढ़ा किस तरह कवि- कहानीकार दोस्तों ने शहर के एक मशहूर पूड़ी-जलेबी की दुकान में छक कर पूड़ी-जलेबी खाने का आनन्द […]Read More »

छपरा की बेटी का दर्द ... ओ री चिड़ैया

अनीश कुमार सिंह मैं बिहार के छपरा की बेटी हूं। मेरा दम घुट रहा है। एक-एक सांस मुझ पर भारी पड़ रही है। उस मनहूस दिन को याद करके मैं […]Read More »

पूर्णिया में 8 जुलाई को रवि भूषण की फिल्म का प्रीमियर

बदलाव प्रतिनिधि नवोदय विद्यालय एल्युमिनी एसोसिएशन बिहार की ओर से पूर्णिया में 8 जुलाई को फिल्म  “लाइफ ऑफ एन आउटकास्ट ” का प्रीमियर रखा गया है।  इस फिल्म में मुख्य […]Read More »

घोंचू उवाच- जैसी बहे बयार ,पीठ तब तैसी दीजिए

ब्रह्मानंद ठाकुर घोंचू भाई खेती – पथारी का काम निबटा कर शाम होते ही मनकचोटन भाई के दरबाजे पर जुम गये। मनकचोटन भाई का दरबाजा  टोले के बुजुर्गों का एक […]Read More »

हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना... रे कबीरा, न बदला जमाना

श्वेता जया पांडे अगर आप कबीर को एक महान शख्सियत बताते हैं और उनकी महान ज़िंदगी से कुछ सीखने की सीख देते हैं तो सबसे पहले आपको ये सोचना होगा […]Read More »

'द्रव्य' दुकान और मोहल्ले की अटूट दोस्ती

वीरेन नंदा किस्सागोई के पहले अंक में आपने पढ़ा पति-पत्नी के बीच की मीठी नोकझोंक जिसमें प्यार भी रहता है और टकराव भी । कैसे जब एक दोस्त का फोन […]Read More »

दरमा घाटी में जीवन की संघर्ष गाथा

अशोक पांडे के फेसबुक वाल से दरमा घाटी के वाशिंदों का जीवन बेहद संघर्ष भरा होता है । जिस तरह जम्मू-कश्मीर में ठंड के दिनों में राजधानी श्रीनगर से जम्मू […]Read More »

हमारे दिलों का कोना-कोना नाप चुके हैं सागर बाबा

सुबोध कांत सिंह बात तक की है जब मैं चौथी कक्षा में पढ़ता था। स्कूल में गर्मी की छुट्टी पड़ी तो मेरे चाचा मुझे अपने गांव लेकर आए। इससे पहले […]Read More »

ASP राजेश साहनी की संदिग्ध मौत के पीछे कौन ?

एक जांबाज अफसर की संदिग्ध मौत मामले की जांच के बिना खुदकुशी करार देने की इतनी जल्दबाजी क्यों हो रही है ? आखिर किस आधार पर संदिग्ध मौत को खुदकुशी […]Read More »

'अवसरवाद' के सियासी समर में 'सुशासनबाबू' का चक्रव्यूह

पुष्य मित्र हाल में हुए उपचुनाव में बीजेपी की हार और विपक्षी दलों के उम्मीदवारों की जीत से बिहार अछूता नहीं रहा और ना ही नीतिश इस हार जीत के […]Read More »

33 साल बाद आज तू फिर आ गया...!

ऐसे बहुत कम ननिहाल होते हैं , जहाँ ना माँ होती है। ना मामा और ना नानी होती है लेकिन मैंने आज ऐसा ही एक ननिहाल तक़रीबन 33 साल बाद […]Read More »

य़थार्थवाद के ठप्पे को ध्वस्त करता रवि तनेजा का कोणार्क

संगम पांडेय रवि तनेजा की प्रस्तुति कोणार्क अकेला ऐसा नाटक है जिसे मैंने देखने के पहले ही पढ़ रखा था। कुछ लोग इसे व्यवस्थित ढंग से लिखा गया हिंदी का […]Read More »

बच्चों के चेहरों पर देखे हमने पुस्तकों के 'मंजर'

टीम बदलाव पुस्तकों के बीच बच्चे और अभिभावक। पके हुए आमों को देखकर जो सुख होता है, उससे कहीं ज्यादा सुख मंजरों से लदे पेड़ों को देखकर होता है। उम्मीद […]Read More »

कलराज मिश्र के गोद लिए गांव धौरहरा और पयासी का हाल

सत्येंद्र कुमार यादव यूपी के देवरिया लोकसभा सीट से जनता ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र को अपना सां सद चुना। वो केंद्र में 3 साल तक मंत्री भी […]Read More »

हुकूमदेव नारायण यादव के गोद लिए गांव दामोदरपुर का हाल

जूली जयश्री  टीम बदलाव ने मई महीने में आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिए गांवों की स्टोरी  पर फोकस करने का फैसला किया है। इसके लिए ‘आदर्श गांव पर आपकी रपट’ सीरीज […]Read More »

बिहार के नव-उदय की स्ट्रेटजी बनी, असर भी दिखेगा

बदलाव प्रतिनिधि, पटना   8-9 वर्ष पूर्व पूर्णिया की एक दुकान पर बैठे-बैठे कुछ युवाओं ने बेहद अनौपचारिक सी मुलाकात में एक शुरुआत की थी, तो उन्हें भी ये एहसास […]Read More »

जब सेल्युकस को पर्दे के पीछे गिफ्ट में मिला पार्कर पेन

ब्रह्मानंद ठाकुर बात 1965 की है। मैंने गांव के बेसिक स्कूल से सातवीं कक्षा पास कर उसी कैम्पस के सर्वोदय हाई स्कूल की 8 वीं कक्षा मे दाखिला लिया था। […]Read More »

कुछ आप भी तो बोलिए हुज़ूर !

कठुआ पर लगातार लिखने से कुछ लोग इतने बौखलाए हुए हैं कि अलग-अलग शहरों में हो रही बलात्कार की घटनाओं की खबर बताकर मुझसे पूछ रहे हैं कि इस पर […]Read More »

पत्रकार कुमार नरेंद्र सिंह से खुली बातचीत आज

बदलाव टीम के साथियों के साथ 15 अप्रैल को रूबरू होंगे वरिष्ठ पत्रकार कुमार नरेंद्र सिंह। मार्च महीने से बदलाव ने वरिष्ठ पत्रकारों से मुलाकात और अनौपचारिक बातचीत का सिलसिला शुरू […]Read More »

कस्तूरबा विद्यालय की बेटियों ने भरी गांधी के सपनों की उड़ान

ब्रह्मानंद ठाकुर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ मुहिम को वास्तविकता के धरातल पर उतारने वालों में शुमार है बिहार का कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय । बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के विष्णुपुर […]Read More »

सिमुलतला कैसे बनेगा नेतरहाट का विकल्प?

ब्रह्मानंद ठाकुर नेतरहाट एक ऐसा विद्यालय जहां से IAS और IPS समेत ढेरों अफसर निकलते हैं, कभी ये विद्यालय बिहार का मान बढ़ाया करता था, लेकिन झारखंड राज्य बनने के […]Read More »

बदलाव के अतिथि संपादक की मीडिया से अपेक्षाएं और उनके संकल्प

डाॅ. संजय पंकज मीडिया की महती भूमिका से आज सम्पूर्ण विश्व सुपरिचित है। दिनानुदिन नई-नई तकनीकों और सुविधाओं से लैस होता हुआ मीडिया-जगत संसार के कोने-कोने तक अपनी पैठ बना […]Read More »

स्टीविया चीनी का एक बेहतर विकल्प

अरुण यादव अगर आप किसान हैं और व्यावसायिक खेती करना चाहते हैं तो आपके लिए स्टीविया की खेती एक बेहतर विकल्प हो सकती है। स्टीविया के खेती किसानों के लिए […]Read More »

ऐसे दरिंदे न पिता, न पुत्र, न भाई और पति तो कतई नहीं!

देवांशु झा बुलंदशहर का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें भरी पंचायत के सामने एक व्यक्ति अपनी पत्नी को पेड़ से बांधकर बेल्ट से पीट रहा है। कारण बताना जरूरी […]Read More »

क्यों अलग राज्य बना बिहार ?

बिहार, जो मगध साम्राज्य के रूप में एक जमाने में लगभग 650 साल तक देश की राजनीति का केंद्र रहा था। जिस मगध साम्राज्य की सीमा इतनी विस्तृत थी कि […]Read More »

अन्नदाता की उन्नति के लिए 'फसल सलाह'

अरुण यादव पिछले हफ्ते राजधानी दिल्ली के पूषा कृषि अनुसंसाधन संस्थान में कृषि उन्नति मेला आयोजित हुआ । 16 से 18 मार्च तक चला किसान मेला जितना भव्य रहा उतना […]Read More »

इस जीत का चेहरा कौन, गठबंधन का मोहरा कौन?

रविकिशोर श्रीवास्तव राजनीति में दुश्मन कब दोस्त बन जाएं, अपने कब बाग़ी… ये वक्त की ज़रूरत पर निर्भर है। इसकी तदबीर को यूपी में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन से आसानी से समझा जा सकता है। लेकिन अखिलेश और मायावती की मुलाकात क्या […]Read More »

मुजफ्फरपुर के वीर सपूत जुब्बा सहनी की शहादत गाथा

ब्रह्मानंद ठाकुर ” हां, वायलर को मैंने मारा,  किसी और ने नहीं।”  यही तो कहा था भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा जुब्बा सहनी ने और मुजफ्फरपुर के मीनापुर थाने के दारोगा […]Read More »

बदलाव के दूसरे होली मिलन में बच्चों ने बिखेरे रंग

ब्रह्मानंद ठाकुर बदलाव का होली मिलन समारोह इस बार बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में आयोजित हुआ । मुजफ्फरपुर के पीयर गांव में बदलाव पाठशाला के बच्चों ने होली मिलन मिलन […]Read More »

बागमती का तट और बेनीपुरी का बदहाल गांव

ब्रह्मानंद ठाकुर मुजफ्फरपुर जिले में औराई प्रखंड का बेनीपुर गांव।  आज से 119  साल पहले 23 दिसम्बर 1899  को इसी गांव में पैदा हुआ एक कलम का जादूगर जो रामवृक्ष […]Read More »

गांववालों, आओ फूल उगाएं और चलें बाज़ार

अरुण प्रकाश देश का अन्नदाता बदहाल है, उसके पीछे कई वजह हैं, सबसे बड़ी वजह है बाजार के हिसाब से खेती की जानकारी का अभाव होना । साथ ही किसानों […]Read More »

बदलाव पाठशाला - हम पढ़ेंगे, खेलेंगे और कूदेंगे

बदलाव प्रतिनिधि मुजफ्फरपुर के बंदरा प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी विजय कुमार ठाकुर ने प्रखंड के पियर गांव में टीम बदलाव द्वारा संचालित नि: शुल्क पाठशाला के बच्चों के लिए […]Read More »

फूलों की खेती से बदलेगी किसान की किस्मत

बदलाव प्रतिनिधि, सेहमलपुर फूलों की खेती के फायदों से आम किसानों को अवगत करवाने के लिए टीम बदलाव ने जौनपुर के सेहमलपुर गांव में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जिसके […]Read More »

माय वेलेंटाइन, माय विलेज.... बदलाव की नई मुहिम

टीम बदलाव  गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर-6 में लंबे अरसे बाद 11 फरवरी की सुबह 10 बजे बदलाव की मीटिंग हुई। इस बैठक में कुछ साथियों ने व्हाट्स एप ग्रुप के […]Read More »

रंगों का कोलाज विकल्प... कुछ रंग अब भी बिखरे हैं

अजीत अंजुम प्यारा सा ये लड़का इस दुनिया में नहीं रहा . विकल्प त्यागी नाम था इसका . फेसबुक पर Zypsy’s Story के नाम से प्रोफ़ाइल बना रखी थी . […]Read More »

वक़्त ने तीसरी मोहलत नहीं दी

रंजीत कुमार बिल्कुल ठीक-ठीक याद तो नहीं जब पहली बार तुम मिले थे, चैनल लांचिंग से पहले ट्रेनिंग का दौर था जब पहली बार नोटिस किया था मैंने। एक पतला-दुबला […]Read More »

अक्टूबर में पाठशाला, जनवरी में पुस्तकालय

ब्रह्मानंद ठाकुर 30 जनवरी को देश ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 70वीं पुण्यतिथि मनाई । दिल्ली से लेकर देश के तमाम हिस्सों में श्रद्धांजलि सभाएं हुईं । लेकिन उससे ज्यादा […]Read More »

बजट में गांव और गरीबों के लिए क्या है खास ?

प्रियंका यादव 8 करोड़ गरीब महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन मिलेगा 4 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली देने का ऐलान स्वस्छता मिशन के तहत 2 […]Read More »

33 साल बाद पूर्णिया कॉलेज की साहित्यिक 'परिधि' का विस्तार

बदलाव प्रतिनिधि पूर्णिया कॉलेज की पत्रिका ‘परिधि’ का लोकार्पण पिछले दिनों किया गया। भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के कुलपति, प्रो. अवध कुमार राय एवं प्रति कुलपति, डॉ. फारुक अली […]Read More »

“पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” की 40वीं साहित्य गोष्ठी सम्पन्न

बदलाव प्रतिनिधि 28 जनवरी’ 2018, रविवार, वैशाली,गाजियाबाद। “68वें गणतन्त्र दिवस के अवसर पर देश भक्ति व सामाजिक सौहार्द ” पर गीतों , कविताओं और गजलों से परिपूर्ण “पेड़ों की छांव […]Read More »

पल्लवी ने बनाई बिहार की 'पहली प्लास्टिक की सड़क'

आपके आस-पास फैला प्लास्टिक का कचरा आपके लिए कूड़े से ज्यादा कुछ नहीं होता, लेकिन क्या आप सोच सकते हैं वो प्लास्टिक का कचरा आपके लिए बेहद उपयोगी साबित हो […]Read More »

इंसाफ़ के 'राजर्षि' का संकल्प, कोई फरियादी मायूस न लौटे

बदलना अगर स्वभाव है तो बदल डालने की मुहिम का हिस्सा बन जाओ। इसे करने में थोड़ा कष्ट तो होगा परन्तु अपनी इच्छाशक्ति के दम पर एक कदम आगे चलने […]Read More »

सुहाग की रक्षा के लिए संतान का सौदा क्यों?

ब्रह्मानंद ठाकुर हमारा समाज और सरकार देश को किस ओर ले जाना चाहता है, आज के दिनों में ये एक बड़ा सवाल बना हुआ है । पिछले कुछ दिनों से […]Read More »

जौनपुर के मोहिद्दीनपुर गांव ने लिया बदलाव का संकल्प

विजय  प्रकाश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपनों का भारत तभी बनेगा जब गांव खुशहाल होंगे और शिक्षा, स्वास्थ्य समेत तमाम सुविधाएं गांव तक पहुंचेंगी। गांव की असल समस्या उनके बीच […]Read More »

... और मां के साथ मर गया मनुष्य

देवांशु झा बेटे ने बूढ़ी मां से कहामां चलो, सूर्य नमस्कार करते हैंलगभग अपंग मां सहज तैयार हुईबहू ने खुश होकर दरवाजा खोलाबेटे ने मां को सीढ़ियों से ऊपर खींचा […]Read More »

बहू अंजलि ग्रेजुएट हो गई!

मिथिलेश कुमार राय सवेरे जब मैं काम पर निकल रहा था, माँ बोली कि मिठाई लेते आना। कल शुक्रवार है। थान पर चढ़ाना है- पतोहू ग्रेजुएट हो गई। जरूर। यह […]Read More »

सुधीर जी आपका ये कदम 'भलु लगद'

कार्टूनिस्ट भाटी के फेसबुक वॉल से हर इंसान के जीवन में एक ना एक फुंसुख वांगड़ू जैसा किरदार जरूर होता है जो होता जीनियस है पर उसके आस-पास के सीमित […]Read More »

देहरादून में साहित्य का समारोह और कुछ यादें

सुमन केशरी इस साल देहरादून लिट फ़ेस्ट में भाग लेने का सुयोग हुआ। शुक्रिया गीता गैरोला…शुक्रिया समय साक्ष्य! देहरादून लिट फ़ेस्ट इस मायने में बेहद महत्त्वपूर्ण आयोजन रहा कि इसमें […]Read More »

महात्मा गांधी के चम्पारण में हाशिए पर किसान

क्योंकि मैं किसान हूँब्रह्मानंद ठाकुर आज 23 दिसंबर है यानी किसान दिवस, जो किसान नेता चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन के मौके पर मनाई जाती है, लेकिन इस बार किसान दिवस बेहद खास […]Read More »

दमन चक्र को तोड़ रहे हैं युवा कथाकार

अखिलेश्वर पांडेय मौजूदा समय में लिखी व प्रकाशित हो रही कहानियों का विमर्श उनकी रचनात्मकता का सबसे बड़ा पैमाना बन गया है. सिर्फ संपादक ही नहीं बल्कि युवा कहानीकार भी […]Read More »

रीयल लाइफ का 'पैड-मैन'

बासु मित्र आपने अक्षय कुमार की फिल्म पैड-मैन की चर्चा खूब सुनी होगी । इन दिनों टीवी चैनल्स से लेकर अखबारों में पैड-मैन जरूर नजर आ जाता है, लेकिन क्या […]Read More »

6 दिसंबर का वो दिन, जब भीड़ ने छीना कैमरा

एसके यादव 6 दिसंबर 1992, आजाद हिंदुस्तान का एक  दिन, जिसने ना सिर्फ देश के धर्मनिरपेक्ष भावना को बिगाड़ा बल्कि मुल्क को सांप्रदायिक हिंसा की आग में झोंक दिया। मर्यादा […]Read More »

न्यू इंडिया का 'हसीन सपना' और दम तोड़ते अन्नदाता की हकीकत

ये सुनने में काफी अच्छा लगता है कि हिंदुस्तान अब न्यू इंडिया बन रहा है । कम से कम मौजूदा दौर की केंद्र सरकार तो यही दावा करती है । […]Read More »

'भोजपुरी दर्शकों की सोच को समझने की ज़रूरत'

धनंजय कुमार भोजपुरी फ़िल्मों के दर्शक पूरे बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में तो हैं ही, मुम्बई से लेकर विदेशों में भी हैं, लेकिन फ़िल्में इतनी गैर प्रोफेशनल तरीके […]Read More »

महोबा में खुले आसमान के नीचे संवरता देश का भविष्य

आशीष सागर यूपी के बुंदेलखंड का नाम नाम आते ही हर किसी के जेहन में भुखमरी, बेरोजगारी, बदहाल किसान और सूखे की आपता जैसी तस्वीर कौंधने लगती है, कभी आल्हा-उदल […]Read More »

20 हज़ार के लिए 10 साल के मासूम का क़त्ल

सूर्यमणि  राजधानी दिल्ली और उसके आसपास हत्या और रेप की दिल दहलादेने वाली ख़बरें आम बात है, लेकिन जब ऐसी ख़बरें गांवों से भी आने लगे तो हमें समाज में […]Read More »

बदलाव पाठशाला : नौनिहालों में जगाती शिक्षा की अलख

टीम बदलाव गांव और निचले तबके का विकास राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्राथमिकताओं में हमेशा सबसे ऊपर रहा। लिहाजा बापू के आदर्शों को जीवन में उतारने की हर मुमकिन कोशिश […]Read More »

बिहार के गर्व रामशरण शर्मा को कभी तो याद कर लें

पुष्यमित्र यह कैसी विडंबना है कि हम साहित्यकारों को तो याद रखते हैं, इतिहासकारों को भूल जाते हैं। उन इतिहासकारों को जिन्होंने हमारी स्मृतियों और धरोहरों को पढ़कर हमें ऐतिहासिक […]Read More »

पूर्णिया के सरवर ने छत पर ला दी बहार

बासु मित्र कहते हैं जहां चाह होती है, राह खुद ब खुद मिल जाती है। बिहार के पूर्णिया जिले के सबसे व्यस्ततम इलाके लाइन बाजार में जहां इंच-इंच जमीन की […]Read More »

हाईब्रिड से पैदावार बढ़ी, लेकिन जमीन की उर्वरता पर असर

ब्रह्मानन्द ठाकुर 21वीं सदी का हिंदुस्तान तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन देश का किसान इस रेस में पिछड़ता जा रहा है यही नहीं किसानों के साथ-साथ जमीन की […]Read More »

हंसिये मत... ये खुशहाली के बीज हैं!

जीवन में हास्य बोध का अपना महत्व है, मगर जब हम गंभीर बातों पर भी चुटकुला बनाने लगें तो हमें अपने हास्य बोध पर पुनर्विचार करना चाहिए. संदर्भ 13 नवंबर […]Read More »

हम बदलेंगे और जमाना बदलेगा - IPS विकास कुमार

पुलिस हमारी सुरक्षा करती है, एक अच्छे समाज के लिए एक अच्छे सुरक्षातंत्र का होना बेहद ही जरूरी है। ये अलग बात है कि हमारे देश का पुलिस-तंत्र हमेशा संदेह […]Read More »

समय 'वाचाल' है और कवि 'मौन'!

पशुपति शर्मा ‘समय वाचाल है’ इसी शीर्षक से आजतक में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार साथी देवांशुजी का काव्य संग्रह हाथ में आ गया है। इस बार ‘साहित्य आजतक’ में सम्मिलित होने […]Read More »

'तालाबंदी' से संकट में एशिया के सबसे बड़े पशु मेले का वजूद

पुष्यमित्र एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला यानी सोनपुर मेला आज बंद है। दिलचस्प है कि मेले के सभी दुकानदारों ने यह बंदी खुद की है । वजह है नर्तकियों […]Read More »

पूंजीपति रहेंगे मस्त तो किसान रहेंगे पस्त

ब्रह्मानंद ठाकुर तमिलनाडु के किसानों का आंदोलन और मध्य प्रदेश के मंदसौर में अपनी मांगों को लेकर आंदोलनकारी किसानों पर पुलिसिया जुल्म के बाद तमाम किसान संगठन एक मंच पर […]Read More »

संवाद की कोशिश में एक महिला का 'सरेंडर'!

सुदीप्ति एक ही ससुराल है अपना तो। अब मायके से ज्यादा अपना।भई हम सुतली बम में सच्ची यकीन नहीं करते। जैसे हैं वैसे को बाहें फैला अपनाया है लोगों ने। […]Read More »

इंदिरा-फिरोज गांधी के रिश्तों की अनसुनी कहानी पार्ट-2

अजीत अंजुम फिरोज-इंदिरा और नेहरु के रिश्तों के कई उलझे तार इंदिरा और फिरोज पर लिखी किताबों में दिखते हैं। कहीं-कहीं फिरोज के वर्ताव से ऐसा मतलब भी निकाला गया […]Read More »

क्यों जिंदगी से हताश थे इंदिरा गांधी के पति ?

एक गांधी तो वो भी था, सांसद, देश के प्रधानमंत्री का दामाद था, देश की होने वाली प्रधानमंत्री का पति का था. सत्ता के शीर्ष पर बैठे सबसे ताकतवर नेता […]Read More »

मुंबई में कानून का राज है या राज ठाकरे का ?

आप में से कितने लोग इस कदर गांधीवादी हैं कि कोई आपको एक गाल पर तमाचा मारे तो आप दूसरा गाल बढ़ा देंगे ? मुझे जवाब दीजिए या न दीजिए, […]Read More »

प्रकृति से उत्पादन और भरोसे का व्रत है अक्षय नवमी

ब्रहमानन्द ठाकुर अक्षय नवमी का व्रत पौराणिक कथाओं पर आधारित है। इसकी कथा नारद मुनि शौनक ऋषि से कहते हैं। कथा की शुरुआत भगवान विष्णु की स्तुति से होती है। इस […]Read More »

पत्रकारिता को न्यूज़ चैनलों और अख़बारों में मत तलाशिए

पुष्यमित्र हिंदी पत्रकारिता में आज भी एक स्वतंत्र पत्रकार का सर्वाइवल मुश्किल है। विभिन्न अखबारों में फीचर और आलेख लिखने वाले कुछ सीनियर पत्रकार भी अगर सर्वाइव कर रहे हैं तो […]Read More »

जनाब को मोहब्बत की निशानी से नफ़रत क्यों है?

अजीत अंजुम जिस ताजमहल को मोहब्बत की निशानी मानकर न जाने कितने गीत-गजल और कहानियां लिखी गई। जिसे देखने न जाने कितने लोग हर रोज आगरा जाते हैं। जिसको आंखों में […]Read More »

मी लॉर्ड! कुछ 'गुनाहों' का हिसाब अभी बाकी है!

धीरेंद्र पुंडीर अब बौने (हम पत्रकार) किसकी चरित्र हत्या करेंगे। केस में अभी सुप्रीम कोर्ट की दहलीज बाकि है। आरूषि और हेमराज का कत्ल तो कातिल या कातिलों ने किया […]Read More »

मालवीय के सपनों का BHU और 'त्रिपाठी युग'

ब्रह्मानन्द ठाकुर पिछले दिनों वाराणसी में शिक्षा के मंदिर में जो कुछ हुआ उसने शिक्षा जगत पर एक बदनुमा दाग लगा दिया । जिस तरह छात्राओं की मांग को अनदेखा […]Read More »

'बाजारवाद' के मायाजाल में दम तोड़ती 'आस्था'

ब्रह्मानंद ठाकुर दुर्गा पूजा यानी शक्ति की आराधना और उपसना का पर्व । 9 दिन तक हर तरफ भक्ति का सैलाब उमड़ता-घुमड़ता है । बचपन से ही दुर्गा पूजा के […]Read More »

2 अक्टूबर से मुजफ्फरपुर में पहली बदलाव पाठशाला

आगामी गांधी जयंती- 2 अक्तूबर- को हम एक नया मिशन शुरू करने जा रहे हैं। समाज के ” उपेक्षित लेकिन अपेक्षित ” वर्ग के बच्चों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने […]Read More »

धन्यवाद श्रीकांत शर्मा जी ! आपसे शिकायत करना नहीं चाहता था लेकिन...

कोई भी सरकार हो उसकी कोशिश होती है कि जनता के बीच उसके एक्शन का असर दिखे । उसकी योजनाओं का लाभ लोगों को मिले । सरकार की कोशिशों को […]Read More »

काले लिबास वाला

काले कपड़े पहनने का शौक़ । सादगी पसंद, बेबाक़ी से अपनी राय रखना उनकी आदत । अपनी फ़िल्मों से लेकर उनके डायलॉग तक हर जगह उनकी छाप दिखती है । […]Read More »

वंशीपचडा-वह गांव जिसने रामबृक्ष को बेनीपुरी बना दिया

ब्रह्मानंद ठाकुर एक नन्हा -सा टुअर बालक जिसकी मात्र 4 साल की उम्र में मां मर गयी और जब वह 9 वर्ष का था तो पिता भी साथ छोड़ गए। […]Read More »

हमारा शिक्षा तंत्र और कबीर की उलटबांसी

ब्रह्मानंद ठाकुर आज शिक्षक दिवस है। मैं शिक्षक रहा हूं और सरकार, प्रशासन और समाज द्वारा शिक्षकों के प्रति जो उपेक्षात्मक भाव रहा है, उसे काफी निकट से देखा है। […]Read More »

बिहार में बाढ़ के देवदूत

बदलाव प्रतिनिधि, मुजफ्फरपुर बिहार में हर तरफ बाढ़ से त्राहिमाम त्राहिमाम हो रहा है । सैलाब के आगे जिंदगी बेबस और लाचार हो गई है, लेकिन कुछ ऐसे लोग हैं […]Read More »

इसी गांव में कभी लूटी गई खाट, अब बाढ़ में राहत सामग्री की लूट !

देवरिया जिले की रुद्रपुर तहसील के 52 गांव बाढ़ से की जद में हैं । बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के लिए सीएम का दौरा था । लेकिन भारी […]Read More »

मुजफ्फरपुर में बाढ़ का तांडव जारी

बदलाव प्रतिनिधि, मुज़फ्फ़रपुर बिहार के मुजफ्फरपुर में बूढ़ी गंडक का रजवारा बांध  टूटने से पिछले पांच दिन से गांवों में बाढ़ के हालात हैं । कई प्रखंडों में स्थिति विकराल […]Read More »

एक बार देवरिया भी आइये सीएम साहेब ताकि खुल जाए प्रशासन की नींद !

प्रदीप श्रीवास्तव एक ऐसा गाँव जो दो जनपदों से सटा हुआ है, जहाँ एक जनपद के दो भाजपा सांसद समेत भाजपा विधायक है तो दूसरे जनपद के हैं सूबे के […]Read More »

मुंशियारी में मिल गए टीना और अंकित

बदलाव प्रतिनिधि, गाज़ियाबाद गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर 6 से गायब बच्चों का सुराग मिल गया है। उत्तराखंड के मुंशियारी के होटल में दोनों बच्चे पहुंच गए थे। मीडिया में खबरें […]Read More »

बाढ़ से मिल कर लड़ेंगे साथी

पुष्यमित्र बाढ़ की स्थिति लगातार बिगड़ ही रही है। 17 अगस्त शाम तक कि रिपोर्ट के मुताबिक लगभग एक करोड़ (98 लाख) की आबादी बाढ़ की जद में आ गयी। प्रभावित […]Read More »

मशरूम की खेती के लिए जौनपुर में लगी बदलाव की चौपाल

बदलाव प्रतिनिधि, जौनपुर बदलाव की चौपाल धीरे-धीरे ही सही लेकिन पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है । टीम बदलाव की पहल पर बुधवार दिनांक 16 अगस्त को जौनपुर […]Read More »

बिहार में बाढ़ की आपदा और कुछ मौजूं सवाल

पुष्यमित्र लगभग पूरा उत्तर बिहार इन दिनों भीषण बाढ़ की चपेट में है। नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के इलाके भी ऐसी ही स्थितियों का सामना कर रहे हैं। ज्यादा असर […]Read More »

मासूमों की मौत और 'राष्ट्रवादियों' की बेशर्मी

धीरेंद्र पुंडीर इस देश में अगस्त के महीने से पहले ही पूरे देश में तैयारी शुरू हो जाती है क्योंकि इसी महीने में देश का सबसे बड़े त्यौहार यानि स्वतंत्रता […]Read More »

गोरखपुर में मासूमों की मौत हुई या फिर सिस्टम की ?

अरुण प्रकाश गोरखपुर में मासूमों की मौत पर पूरे देश में गुस्सा है और होना भी चाहिए । अब वक्त आ गया है जब हमें और आपको समान स्वास्थ्य और […]Read More »

शहीद खुदीराम बोस की स्मारक की सुध कब लोगे सरकार ?

ब्रह्मानंद ठाकुर 11 अगस्त 1908 की वो तारीख जिसे देश कभी भूल नहीं पाएगा क्योंकि ये वो दिन जब एक आजादी के मतवाले ने भारत मां के लिए हंसते-हंसते फांसी […]Read More »

कर्ज़ माफ़ी के इंतज़ार में हर दिन मर रहा किसान !

आशीष सागर उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है । प्रधानमंत्री मोदी हों या फिर सीएम योगी । अखिलेश यादव हों या फिर राहुल गांधी या […]Read More »

ऐ गांव विकास चाहता है, बता तेरी जाति क्या है?

आशीष सागर दीक्षित हिंदुस्तान आजादी की 70वीं सालगिरह मनाने जा रहा है। एक बार फिर देश के मुखिया लालकिले की प्राचीर से गांव को शहर बनाने का सपना दिखाएंगे। ऊर्जा […]Read More »

झारखंड पुलिस से सवाल- ये खुदकुशी है या हत्या?

बदलाव प्रतिनिधि मामला 3 जुलाई 2017 का है। शिव सरोज कुमार ने एक सुसाइड नोट पीएम मोदी और झारखंड के सीएम को भेज कर खुदकुशी कर ली। सरोज कुमार ने पुलिस पर […]Read More »

'शिक्षा के बिना समाज में बदलाव मुमकिन नहीं'

ब्रह्मानंद ठाकुर हिन्दी का शायद ही कोई  ऐसा विरला साहित्यकार होगा जिसकी जयंती उसके निधन के 81 साल बाद भी इतनी शिद्दत से मनायी जाती हो।  प्रेमचंद जयंती समारोह समित […]Read More »

खाये पिये कुछ नहीं, गिलास फोड़े बारह आना

राकेश कायस्थ अक्टूबर 2015 की बात है। बिहार के चुनावी तमाशे के बीच अचानक एक एमएमएस सामने आया। औघड़ सरीखे एक मैले-कुचैले बाबाजी हाथ उठाकर कह रहे थे— लालू यादव […]Read More »

बिहार में महागठबंधन टूटने पर किसने क्या कहा ?

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई में जुड़ने के लिए नीतीश कुमार जी को बहुत-बहुत बधाई। सवा सौ करोड़ नागरिक ईमानदारी का स्वागत और समर्थन कर रहे हैं । देश के, विशेष […]Read More »

अल्लाह के नेक बंदों ने बचा ली एक ज़िंदगी

साजिद अशरफ फेसबुक पोस्ट, मध्यरात्रि 27 जुलाई 2017। अभी-अभी नोएडा गौतमबुद्ध चौक के पास इस शख्स का एक्सिडेंट हुआ है। हेड इंजुरी है। ये शख्स पिछले दस मिनट से तड़प […]Read More »

समान शिक्षा के लिए सिर्फ नीति नहीं, नीयत होनी चाहिए

ब्रह्मानंद ठाकुर आजादी के 70 बरस बाद भी हिंदुस्तान में ना तो शिक्षा आम आदमी तक पहुंच सकी और ना ही स्वास्थ्य । ऐसा नहीं है कि हमारे देश में […]Read More »

देवरिया पुलिस की शानदार पहल..लेकिन कुछ सवाल हैं ?

न्यूज चैनल, अखबार, सोशल मीडिया में पुलिस के नाकारात्मक पक्ष की खबरें ज्यादा चलती हैं । वजह भी साफ है लेकिन जब कोई पुलिसवाला अच्छी पहल करता है तो उसकी […]Read More »

दोहरा के नशे के ख़िलाफ़ एक बड़ी जीत

बदलाव प्रतिनिधि, जौनपुर अगर कुछ करने का जुनून और जज्बा हो तो आपको मंजिल तक पहुंचने से दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं सकती। लड़ाई बड़ी हो या छोटी बस […]Read More »

सीए की पढ़ाई छोड़ 'गोबर के गणित' में मारी बाजी

साभार- इफको लाइव हौसला और हुनर हो तो इंसान क्या कुछ नहीं कर सकता। यूपी के बरेली का एक होनहार सीए की पढ़ाई पूरी करने की बजाय खेत में पसीना बहाने […]Read More »

हज़ारों 'मंजू' आपकी एक पहल से घर लौट सकती हैं!

साजिद अशरफ ये बच्ची मुझे नोएडा के सूरजपुर चौक के पास लावारिस हालात में मिली। ये अपना नाम शायद मंजू बता रही थी। इसकी भाषा मैं ठीक से समझ नहीं […]Read More »

दाल उत्पादन में आत्म निर्भर होने का फॉर्मूला क्या है?

दलहनी फसलों का उत्पादन न केवल बिहार बल्कि पूरे देश की एक गम्भीर समस्या है। सरकार के लाख प्रयास के बावजूद देश दाल के उत्पादन के मामले में अब तक  […]Read More »

बड़ों की कविताएं-छंद, बच्चों के किस्से चंद

बदलाव प्रतिनिधि, ग़ाज़ियाबाद रविवार, 25 जून ,2017 को वैशाली, गाजियाबाद के सेंट्रल पार्क में “पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” तैतीसवीं साहित्यिक गोष्ठी संपन्न हुई। उमस और बदली से घिरे […]Read More »

योगी राज में अवैध खनन का खुला खेल!

आशीष सागर दीक्षित यूपी में योगी सरकार अपना शतक पूरा कर चुकी है । सरकार के 100 दिन का लेखा-जोखा पेश करने के लिए खुद मुख्यमंत्री योगी मीडिया से रूबरू […]Read More »

हाईब्रिड बीज के मायाजाल से कैसे निकले किसान?

ब्रह्मानंद ठाकुर ये कैसी विडंबना है कि देश का किसान जो हर हिंदुस्तानी का पेट भरता है आज वही मर रहा है। सरकार की नीतियों के बोझ तले दबकर किसान […]Read More »

देवरिया में बदलाव बाल क्लब की कार्यशाला का समापन

बदलाव प्रतिनिधि, देवरिया बदलाव बाल क्लब की कहानी कार्यशाला- आओ पढ़े सुने और सुनाएं किस्से का समापन औपचारिक रुप से तो 18 जून को दिल्ली-गाजियाबाद और मुजफ्फरपुर में हो गया, […]Read More »

मांगू मांगू मांगू दुलहा...हाथी घोड़ा गइया हे !

अभी शादी-विवाह का मौसम चल रहा है। लिहाजा इस अवसर पर नाना प्रकार के गीतों के स्वर फिजां में तैर रहे हैं। देर रात से सुबह तक ये गीत ध्वनि […]Read More »

मीडिया का राष्ट्रवाद 'पनछुछुर' है- विनीत कुमार

एम अखलाक कारोबारी मीडिया का राष्ट्रवाद पनछुछुर है। इसका राष्ट्रवाद आर्थिक गलियारों से होकर गुजरता है। इस राष्ट्रवाद में मुगालते और गलतफहमियां हैं। इस पनछुछुर राष्ट्रवाद को फिर से परिभाषित […]Read More »

मेरी नज़र से देखें तालों का शहर नैनीताल

तन्मय बदलाव बाल क्लब की कार्यशाला में मैं तीन दिन अनुपस्थित रहा। दरअसल मैं एक दूसरे बदलाव को महसूस करने में लगा था। ये बदलाव भी कम रोचक नहीं था। […]Read More »

मलेशिया में गुम हुआ मुज़फ़्फ़रपुर का लाल

ब्रह्मानंद ठाकुर आखिर कहां है मेरा लाल ? जिंदा भी है या दरिंदों ने उसकी हत्या कर समुद्र में फेंक दिया ? कोई मुझे मेरे बेटे का पता लगा दे। […]Read More »

यूपी के देवरिया और औरंगाबाद के बारपा में बही 'बदलाव' की हवा

टीम बदलाव बदलाव बाल क्लब की कहानी कार्यशाला- आओ पढ़े सुने और सुनाएं किस्से, हर दिन के साथ परवान चढ़ने लगी है । देश की राजधानी से निकली बदलाव की […]Read More »

चाँद मामा हंसुआ द

बदलाव प्रतिनिधि जैसे जैसे दिन बीतता जा रहा है..बदलाव बाल क्लब की कार्यशाली परवान चढ़ती जा रही है । मुजफ्फरपुर में बदलाव बाल क्लब की पाठशाला के तीसरे दिन बच्चों […]Read More »

मंदसौर किसान आंदोलन: सच और झूठ

संजय रोकड़े मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में किसानों के साथ जो भी हुआ वह लोकतंत्र ही नही बल्कि प्रदेश की शिवराज सरकार पर भी काला दाग साबित हुआ है। जिन […]Read More »

वो बोली- ये मेरी जिंदगी बर्बाद कर सकता है और बारात लौट गई

एस के यादव कभी कभी हमारे बीच से ऐसी खबरें सामने आती हैं जो सोचने पर मजबूर कर देती हैं । समझाने से कोई नहीं समझता तो घटनाएं उसे सबक […]Read More »

आंसुओं से नज़रें चुराकर हंसने का हुनर देखिए ।

JEE ADVANCED 2017 की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के लिए चर्चित संस्थान सुपर-30 के सभी 30 छात्रों ने इस साल आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) में सफलता पाई है। […]Read More »

कितने संपादक 'गणेश विधि' से LIVE टेस्ट को तैयार हैं?

मनीष कपूर के फेसबुक वॉल से ज्यादातर हिंदी न्यूज चैनलों के संपादक बिहार के हैं। जाहिर है उनमें से ज्यादातर ने बिहार बोर्ड की परीक्षा पास की होगी। उन्हें वो […]Read More »

पहले किसी दुल्हन के साथ ऐसा नहीं हुआ होगा ?

बदलाव प्रतिनिधि, मुजफ्फरपुर दुल्हन बनी जूली के सारे अरमान धरे रह गये। आरोप है कि शादी के दो घंटे बाद पुलिस ने कोहवर से जूली को घसीट कर बाहर निकाला। उसे […]Read More »

पूर्णिया के 'ड्रीम कैचर' का सपना सच होने को है!

एपी यादव आम इंसान हो या फिर खास, गरीब या फिर अमीर हर किसी में एक समानता जरूर होती है और वो है ड्रीम यानी सपना। वो सपना जो जिंदगी […]Read More »

साबुन-शैंपू का अधूरा सच और साहबों की चोंचलेबाजी

सत्येंद्र कुमार यादव पिछले 3 दिन से एक ख़बर बार-बार नजरों के सामने आ रही है। सोशल मीडिया में इसकी कई तरीके से व्याख्या की जा रही है। कोई शुद्धिकरण […]Read More »

चंबल के 'क्रांतिवीरों' के नाम जनसंसद

चंबल प्रतिनिधि, बदलाव चंबल नाम सुनते ही हर किसी के जेहन में डाकुओं के आतंक की कहानी कौंधने लगती है, लेकिन बहुत कम लोग ही होंगे जो चंबल के गौरवमयी […]Read More »

गंगा की गोद में कंक्रीट के जंगलों के बाशिंदे

सत्येंद्र कुमार यादव जेठ की दुपहरी और गांव में पीपल की शीतल छाया में करीब 10 दिन गुजारने के बाद जब पिछले हफ्ते दिल्ली लौटा तो मन उदास सा रहने […]Read More »

सिर्फ दिखावे से नहीं बदलेगी सूबे की सूरत सीएम साहब !

आशीष सागर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ इन दिनों प्रदेश भ्रमण पर हैं । वैसे तो वो पिछले कई बरस से यूपी की सियासत में अपनी छाप छोड़ते रहे हैं […]Read More »

स्वेक्षा- सुरों के सुरीले सफ़र की शुरुआत

लखनऊ प्रतिनिधि, बदलाव कविवर रविन्द्र नाथ टैगोर के 127वाँ जयंती के अवसर पर Bengali Club &Young men’s Association, Lucknow की ओर से रविन्द्र संगीत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। रविन्द्र […]Read More »

महानंदा के ठांव, दो चदरा की नाव

भूषण चौंकिए मत। यह जो चित्र आपके सामने है यह एक नाव का है। एक बड़ी नाव जितना काम कर सकती है उतनी ऊर्जा और उतने समय में उस से […]Read More »

पूर्णिया के धनखेता बन गए मक्का लैंड

पुष्यमित्र अगर आज हमारे कोसी के इलाके में दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे की शूटिंग हुई होती तो शाहरुख और काजोल सरसों के बदले मक्के के खेतों में रोमांस करते नजर […]Read More »

सतीश अब गाय नहीं पालेगा !

ब्रह्मानंद ठाकुर हमारे देश की सियासत कुछ ऐसी हो चली है कि अब वो आपके निजी जीवन में दखल देने लगी है । हम क्या खाएंगे, क्या पीएंगे, क्या पहनेंगे […]Read More »

'ट्रेजर' की दुख की यात्रा 28 को...

“भारतीय किसान कर्ज में ही जन्म लेता है और उसी स्थिति में मर जाता है” ‘दुख की यात्रा’ एक संकल्पनात्मक नाटक है, जो किसानों की खुदकुशी पर आधारित है । […]Read More »

जीवन के संघर्षों से जिसने सीखा समाजवाद का पाठ

ब्रह्मानंद ठाकुर आम, कटहल,नींबू और अमरुद की घनी छांव तले एक छोटा सा घर । जिसका नाम है चमेला कुटीर । प्रकृत की गोंद में बना चमेला कुटीर किसी ऋषि […]Read More »

सुलखान सिंह- एक ईमानदार अफ़सर का 'लईया-चना' याद है!

धीरेंद्र पुंडीर सुलखान सिंह नए डीजीपी। लगता नहीं था कि कोई इतने ईमानदार अफसर को कभी कमान देगा। लखनऊ में खबर करने गया था। सोचा चलो एक दो अफसर से […]Read More »

रंगमंच की दुनिया में ग्वालियर शहर की धमक

संगम पांडेय ग्वालियर के नाट्य मंदिर प्रेक्षागृह में जाने से लगता है मानो आप वक्त के किसी लंबे वक्फे का हिस्सा हों। यहाँ की दीवारों, कुर्सियों, पंखों तक में कई […]Read More »

मजहब नहीं सिखाता, 'गांधीवाद' से बैर रखना!

ब्रह्मानंद ठाकुर बिहार के मुजफ्फरपुर का मझौलिया गांव कभी हथकरघा उद्योग के लिए जाना जाता था। आज यहां काफी कुछ बदल गया है। एक-दो परिवार हैं जो हथकरघा को जिंदा रखे […]Read More »

गांधीवाद ही है आखिरी विकल्प- सच्चिदानंद सिन्हा

ब्रह्मानंद ठाकुर पूरी दुनिया आज बाजार बन गयी है। पूंजीवाद ने पूरी दुनिया को बारूद की ढेर पर लाकर खड़ा कर दिया है। मानवता खतरे में है। लोक से निरपेक्ष […]Read More »

महिला उत्पीड़न के ख़िलाफ़ फाइटिंग सेंटर बने 'शीरोज़'

रश्मि गुप्ता रूपाली की कैब आने में देरी हो रही थी और मैं भी अपनी कार का इन्तजार कर रही थी। कबीरा जंक्शन की प्रस्तुति अभी ख़त्म हुई थी। रूपाली […]Read More »

चंपारण के 100 साल, आज तो कर लो गांधी को याद

ब्रह्मानंद ठाकुर मौसम भी है और मौका भी।  इसमें जो चूक गया, वह पछताएगा। भले ही गांधी की हत्या किसी एक ने की थी लेकिन पिछले 70 सालों से उनके […]Read More »

जानिए मशरूम की खेती का आसान तरीका

ब्रह्मानंद ठाकुर हमारे देश का अन्नदाता बदहाल है, लेकिन सरकारें खुशहाल । कोई किसानों की कर्जमाफी का वादा करता है तो कोई बिजली का बिल माफ करने का भरोसा देता […]Read More »

बदलाव के पहले अतिथि संपादक ब्रह्मानंद ठाकुर

ब्रह्मानंद ठाकुर का जन्म बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जनवरी 1952 में निम्न मध्यम वर्ग परिवार में हुआ । पढ़ने के साथ पत्र-पत्रिकाओं में लिखने का शौक बचपन से रहा है […]Read More »

पूर्णिया के रुपौली में डायन बता कर मार डाला!

पुष्यमित्र मैं यह शब्द इस्तेमाल नहीं करना चाहता था, मगर मजबूरी में करना पड़ा कि हमारे गंवाई समाज की जहालत खत्म होने का नाम नहीं ले रही। पूर्णिया जिले के […]Read More »

किसान कर्ज माफी... ये वादे हैं वादों का क्या ?

आशीष सागर यूपी में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला तो इसके पीछे किसानों का बहुत बड़ा योगदान रहा । केंद्र से लेकर प्रदेश तक सदन केसरिया रंग से रंगा है, […]Read More »

विकास की अंधी दौड़ में बिगड़ रहा गांव का ताना-बाना

ब्रह्मानंद ठाकुर हमारा गांव अब पूरी तरह से वैश्विक बाजार के हवाले हो गया है। खाने-खाने-पीने की चीजों से लेकर ओढना-बिछौना, रेडिमेड से लेकर थान वाले कपड़े, जूते- चप्पल, ऋंगार […]Read More »

ये डर ग़लत साबित कर पाएंगे योगीजी?

प्रिय आदित्यनाथ योगी जी , मेरा नाम विनोद कापड़ी है। अच्छा लगता है, इसलिए थोड़ी बहुत पत्रकारिता करता हूँ और छोटी मोटी फिल्में बनाता हूँ। आपकी तरह एक हिंदू परिवार […]Read More »

दोहरा बिगाड़ रहा जौनपुर वासियों की सेहत

विकास तिवारी शिराज-ए-हिंद जौनपुर वीर सपूतों की धरती है । शेर शाह सूरी से लेकर आधुनिक युग में जौनपुर शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है । शिक्षा शिराज-ए-हिंद की […]Read More »

पुंडीर राजपूतों का रोम है देवबंद!

धीरेंद्र पुंडीर आंख का अँधा मीडिया और नफरत में डूबे लोग देवबंद को झूठ लिख रहे हैं। देवबंद से दो बार को छोड़ कर ज़्यादातर हिदू राजपूत विधायक रहे हैं। पुंडीरों […]Read More »

कटरा को सांसद गोद तो लिए हैं लेकिन 'आदर्श' कुछ भी नहीं है !

आशीष सागर दीक्षित केंद्र में बीजेपी की सरकार आई तो प्रधानमंत्री मोदी ने देश के गाँवो को बड़ा सपना दिखाया। उन्होंने अपने साथ-साथ सभी निर्वाचित सांसद के लिए निर्वाचन क्षेत्र […]Read More »

मैले-पुराने कपड़ों के सहारे बिहार के 83 फीसदी महिलाओं की माहवारी

पुष्यमित्र मधुबनी जिले की एक महिला पेट दर्द से काफी परेशान थी. स्थानीय डॉक्टरों से दिखाया तो बताया गया कि यूटरस में कुछ है. उसे पटना रेफर कर दिया गया. […]Read More »

कहीं दर्जनों फ्लाईओवर, कहीं एक अदद पुल की जंग

⁠⁠⁠पुष्यमित्र फरकिया के ढेंगराहा पुल की लड़ाई अभी शुरू हुई है। हो सकता है इन्हें जल्द सफलता मिल जाये, हो सकता है बरसों लग जाये और क्रमवार तरीके से इन्हें […]Read More »

कंट्रोल रूम से कभी बतिया भी लीजिए अखिलेशजी

ऋषि कांत सिंह सुबह का वक़्त था। आज नोएडा एक्सप्रेसवे से होकर ऑफिस जा रहा था। अचानक दो गाड़ियों की टक्कर हो गयी और 2 लोग बुरी तरह घायल हो […]Read More »

सोशल इंजीनियरिंग की सियासी 'माया'

पीयूष बबेले पिछले अंक में आपने पढ़ा कि किस तरह कांशीराम के संघर्षों से बीएसपी दलित वर्ग में अपनी पैठ बना चुकी थी । 1993 में समाजवादी पार्टी के साथ […]Read More »

गंगा के दियारे में अफीम की खेती का सच क्या है?

⁠⁠⁠मोहन मंगलम कुछ साल पहले राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की टीम ने गंगा दियारे का दौरा कर दियारे की धरती को मशरूम उत्पादन के लिए उपयुक्त बताया था। इसके […]Read More »

काश ! एक माइक जनता की तरफ भी होता...

आशीष सागर दीक्षित (फेसबुक वॉल से) ” तुम बतलाते रहे अपने काम के नजराने इस कदर अखिलेश, कि एक हम मैदान में जार-जार रो रहे थे… ” मुख्यमंत्री अखिलेश यादव […]Read More »

लोकल चेहरों से क्यों डरती है मोदी-शाह की जोड़ी?

पुष्यमित्र पंजाब, यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में चुनावी मौसम। कहीं अखिलेश-राहुल जलवा बिखेर रहे हैं तो कहीं केजरीवाल-भगवंत मान की चर्चाएं होती रही। इन पांचों राज्यों में मोदी-अमित शाह घूम-घूम […]Read More »

बटन दबते ही धड़कन तेज़ !

रवि किशोर श्रीवास्तव कतार घट चुकी थी, एकआध लोग ही बचे थे। पोलिंग बूथ के अधिकारी और कर्मचारी रवानगी की तैयारी कर रहे थे। शाम भी दस्तक देने को तैयार […]Read More »

17 बरस के हो गए गिरीश मिश्र के 'क्रांति-सूत्र'

आनन्दवर्धन प्रियवत्सलम 4 फरवरी को पटना के बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के दफ्तर में दर्जनों पत्रकार जुटे। गिरीश मिश्र को याद किया और कई पुरानी यादें शेयर कीं।  नोएडा में […]Read More »

मुद्रा स्कीम में लोन हासिल करना ही बड़ी चुनौती-पीड़ित

‘यहां तक आते-आते सूख जाती हैं नदियां, मुझे मालूम है पानी कहां ठहरा होगा । वैसे तो कवि दुष्यंत ने ये लाइन कई बरस पहले लिखी लेकिन इसकी प्रासंगिकता आज […]Read More »

तमाशा-ए-नौटंकी फुल इंटरटेन्मेंट की फुल गारंटी

पशुपति शर्मा भारत रंग महोत्सव धीरे-धीरे परवान चढ़ने लगा है। पहले हफ़्ते में कुछ प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीता लेकिन कुछ प्रस्तुतियों ने बेहद निराश भी किया। ऐसे में […]Read More »

भुईली के 'रायबहादुरों' ने दिल्ली में लिया बड़ा संकल्प

संजीव कुमार सिंह सिर मुड़ाते ही ओले पड़ने की कहावत खूब सुनी है, लेकिन इस बार अपने अरमानों पर ओले पड़े। 26 जनवरी को इंद्र महाराज ने न जाने किसका […]Read More »

फूस की झोपड़ी में छिपा कोसी का दर्द

पुष्यमित्र कोसी के तट पर बसे लोगों का दर्द वही समझ सकता है जो या तो वहां रहता हो या फिर वहां के लोगों को के दर्द की बीच कुछ […]Read More »

मुजफ्फरपुर के किसानों की उम्मीदों पर 'पाला' मार गया

ब्रह्मानंद ठाकुर पूरा उत्तर भारी पिछले 15 दिनों से भीषण ठंड की चपेट में है । पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में भी देखने को […]Read More »

आरक्षण की आग में कहीं जल न जाए बीजेपी का 'सपना'

अरुण प्रकाश यूपी चुनाव से पहले आरक्षण का जिन्न एक बार फिर ‘RSS की बोतल’ से बाहर आ चुका है । बस फर्क इतना है कि बिहार चुनाव के दौरान […]Read More »

'शिक्षा के दंगल' में बिहार की बेटियां गुजरात पर भारी

ब्रह्मानंद ठाकुर बालिका शिक्षा के मामले बाईब्रेन्ट गुजरात की असलियत क्या है, यह आ़ंकड़े बता रहे हैं। जहां बिहार ने पिछले 10वर्षों में बालिका शिक्षा के क्षेत्र में ऊंची छलांग […]Read More »

जिसे बगावत ने बनाया 'समाजवाद' का 'सितारा'

अजीत अंजुम के फेसबुक वॉल से इतिहास –पुराण और परंपरा इस बात का गवाह है कि हर दौर में जमाने ने ऐसे ही बेटे को हीरो माना जिसने हर हाल […]Read More »

राष्ट्रवाद के रथ पर सवार 'चक्रधारी' नारायण...नारायण !

राकेश कायस्थ चुनावी रणभेरी बजी, सेनाएं सजी और नारायण प्रकट हो गये। प्रकट ही नहीं हुए बल्कि ‘राष्ट्रवाद’ के रथ पर सवार हो गये। सारथी बनकर नहीं, योद्धा बनकर भी […]Read More »

कितने पत्रकारों की हत्या के बाद जागेगी सरकार?

पुष्यमित्र घुमक्कड़ पत्रकारिता की अपनी नौकरी की वजह से अक्सर ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकार साथियों से मिलना-जुलना होता रहता है। कुछ साथियों के घर भी चला जाता हूँ। पिछले दिनों […]Read More »

मुलायम-अखिलेश की मुलाकात का ‘घोषणा पत्र’

टीम बदलाव मंगलवार का दिन समाजवादी परिवार में दंगल में मंगल लेकर आया क्योंकि कई दिन बात मुलायम और अखिलेश के बीच मुलाकात हुई । मुलायम सिंह से उनके घर […]Read More »

गांवों में छत्तीसगढ़ी फिल्मों का संसार

बरुण के सखाजी सीमित संसाधन, प्रचुर व्यावसायिकता के अभाव के बावजूद व्यापक दर्शक वर्ग से बात करता छत्तीसगढ़ी फिल्मों का संसार जितना क्षमतावान है उतना उसे दायरा नहीं मिल पा […]Read More »

एक महान साहित्यकार की दम तोड़ती विरासत !

ब्रह्मानंद ठाकुर मुज़फ्फरपुर जिले के औराई प्रखण्ड में आने वाले जनाढ पंचायत का एक गांव है बेनीपुर जो समाजसेवी, पत्रकार और साहित्यकार बेनीपुरी के नाम पर पड़ा है । 23 […]Read More »

पटना में प्रकाशोत्सव की रौनक

पुष्यमित्र पटना साहिब दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है । हर तरफ प्रकाशोत्सव की तैयारियां चल रही हैं । आखिर गुरु गोविंद सिंह की 350वीं वर्षगांठ जो है । […]Read More »

8 घंटे की नौकरी और पगार महज 42 रुपये

ब्रह्मानंद ठाकुर मुंशी प्रेमचंद की कहानी सद्गति का किरदार घासीराम हो या फिर रामवृक्ष बेनीपुरी के ‘कहीं धूप कहीं छाया’ का ‘बाबू साहेब’ दोनों तत्कालानी सामंतवादी सोच के वाहक थे […]Read More »

मधेपुरा में सोशल मीडिया पर बड़ी बहस

रूपेश कुमार सोशल मीडिया जनक्रांति का सशक्त माध्यम है। जिस गति से समाज बदल रहा है उसमें सोशल मीडिया की भूमिका अहम है। समाज का हर वर्ग इस पर क्रेंदित है। […]Read More »

देश में कब महफूज होंगी बेटियां ?

कीर्ति दीक्षित निर्भया के माता पिता चार साल बाद भी बेटी को न्याय दिलाने के लिए  सुप्रीम कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं बस अब उनके साथ ना कोई नेता […]Read More »

किन्नरों के मन की पाती बांचती मां और 'नाला सोपारा'

इति माधवी ‘नाला सोपारा’ एक ऐसा उपन्यास जो एक ऐसे समुदाय पर आधारित है जिसके बारे में हर कोई बात करने से कतराता है । समाज का नजरिया उस तबके […]Read More »

UP-100 के जरिए अखिलेश गढ़ेंगे यूपी पुलिस की नई छवि

अरुण यादव पुलिस को लेकर हमारे जेहन में हमेशा एक नकारात्मक छवि ही रही है। लेकिन जरा सोचिए वही पुलिस आपके एक फोन पर हाजिर हो जाए और कहे कि […]Read More »

भारत रंग महोत्सव में दिखेगा मैथिली रंगकर्म का 'मेलोरंग'

अनु गुप्ता भारत एक ऐसा देश है जहां हर सौ  कदम पर भाषा बदल जाती है। इस देश को अनेक और विशेष भाषाओं का संग्रहालय बोला जाए तो गलत न होगा। […]Read More »

ओवैसी को जिसके लिए चुना वो वही कर रहे हैं !

वही लोग ओवैसी से इस वक़्त उसके सांप्रदायिक बयान को ले कर चिढ़े हुवे हैं जिन्होंने उसे चुना ही सांप्रदायिक धुर्वीकरण के लिए है । ये बताईये कि आपने ओवैसी […]Read More »

अकेलेपन के अंधेरों में रचा गरीबों की जिंदगी का उल्लास गीत

धीरेंद्र पुंडीर जयललिता दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु की मुख्यमंत्री। रजत पट की अभिनेत्री और अभिनेता से नेता बने एमजीआर की विरासत संभालने वाली नेत्री। भ्रष्ट्राचार के आरोपों से घिरीं। […]Read More »

गांव की फिल्म मेकर ने जीता अवॉर्ड

रुपेश गुप्ता करीब डेढ़ साल पहले की बात है। छत्तीसगढ़ की मैनपाट और मांझी जनजाति अचानक सुर्खियों में आ गई। हालांकि तब मांझी जनजाति के पांच साल के एक बच्चे […]Read More »

तुम्हारी जात क्या है, तुम क्या समझोगे?

प्रशांत दुबे किसी के इंतजार में खटलापुरा मंदिर में बैठा था| एक पढ़े-लिखे, सूट-वूट वाले भाईसाहब चार चके से उतरे, कुछ मन्त्र पढ़े और पूजा पाठ की सामग्री पन्नी सहित […]Read More »

खुद खाली पेट और वो चलाते हैं 'एक रोटी अभियान'

पुष्यमित्र दुनिया अच्छे लोगों से खाली नहीं हुई है। दिलचस्प बात यह है कि आप महानगर छोड़ कर बाहर निकलें आपको ऐसे लोग कदम-कदम पर मिल जाते हैं। ऐसे ही […]Read More »

सुनिए प्रेमचंद, आधुनिक होरियों की पीड़ा गाथा

ब्रह्मानंद ठाकुर प्रख्यात उपन्यासकार कथाकार मुंशी प्रेमचंद के गोदान का होरी आज भी भारत के खेत -खलिहानो में जिन्दा है। अपने जिन्दा रहने की कीमत वह खेतों में माथा और […]Read More »

प्रकृति सोशल मीडिया से नहीं चलती !

कीर्ति दीक्षित इस साल हमने गर्मी में तापमान का उच्चतम् स्तर देखा, सूखे की भयावहता देखी, बूँद बूँद पानी के लिए संघर्ष देखा और हाल ही में दिवाली के बाद […]Read More »

नोटबंदी की 'सियासी मंडी' में अन्नदाता की सुध किसे ?

ब्रह्मानंद ठाकुर  किसानों के खून-पसीने से उपजाई गयी फसल जब कौडियों के मोल बिकने लगे तो उनका दर्द समझना सब के लिए आसान नहीं होता। कभी-कभी जीवन में बहुत कुछ […]Read More »

एक और हादसा... हादसे की लिस्ट में दर्ज कर भूल जाइए!

सौम्या सिंह रेल दुर्घटना, ये शब्द कान में जाते ही सबसे पहले क्या याद आता है आपको ? अच्छा छोड़िए…,  तारीख़ – 6 जून 1981, खगड़िया रेल दुर्घटना जिसे आज […]Read More »

बदलाव की पटरी पर पलटती तेज रफ्तार रेलगाड़ियां

पुष्यमित्र माना जा रहा है कि कल हुए रेल हादसे की सबसे संभावित वजह थी कि झांसी-कानपुर रेलखंड के बीच चले रहे दोहरीकरण कार्य के बावजूद इंदौर-पटना एक्सप्रेस 108 किमी […]Read More »

किराये की कोख के लिए हो रही झारखंडी किशोरियों की तस्करी

पुष्यमित्र पटना के एक संस्थान में सरिता(परिवर्तित नाम) बैठी हैं. उसकी आंखें डबडबायी हुई हैं. वह उस खबर का सामना करने के लिए खुद को तैयार नहीं पा रही है, […]Read More »

कतार में खड़े हो समझते रहिए बट्टा खाते का गणित

आशीष सागर नोटबंदी के बाद से तो ऐसा लग रहा है जैसे शहर और गांव की दूरियां मिट गईं। ऐसा इसलिए क्योंकि महानगर से लेकर गांव के गलियों तक अगर […]Read More »

'सर्जरी' आपने की, दर्द की शिकायत किससे करें?

सत्येंद्र कुमार यादव ये तस्वीर यूपी के देवरिया के लार क्षेत्र की है । नोटबंदी के बाद से बैंकों के सामने लोगों की कतार अभी भी लंबी है। इसकी कई […]Read More »

बहन पर भाई के भरोसे की जीत और सामा चकेवा

पुष्यमित्र एक चुगलखोर व्यक्ति राजा कृष्ण से कहता है कि तुम्हारी पुत्री साम्बवती चरित्रहीन है। उसने वृंदावन से गुजरते वक्त एक ऋषि के साथ संभोग किया है। कृष्ण अपनी पुत्री […]Read More »

किसानों का दर्द तो समझो 'सरकार'

ब्रह्मानंद ठाकुर इन दिनों पूरा हिंदुस्तान लाइन में खड़ा नज़र आ रहा है । शहर से लेकर गांव तक एक जैसी तस्वीर देखने को मिल रही है ।  ऐसा लग […]Read More »

बिहार के संझौली में एक शौचालय 'सम्मान' का

चंदन शर्मा के फेसबुक वॉल से  किसी मकसद को अंजाम देने के लिए किसी का मुंह ताकने से बेहतर है खुद हिम्मत कर आगे बढ़ना। कुछ ऐसी ही मिसाल पेश […]Read More »

कतार देखो, धार देखो... ATM पर तैयारी अधूरी है!

कुमकुम सिंह के फेसबुक वॉल से आज सुबह 10 बजे से 3-4 बैंकों के चक्कर काट कर आई हूं। इतनी भीड़ कि शायद ही 2-3 घंटे में नंबर आता। इतना […]Read More »

'22 करोड़' का कर्ज, मुसीबत में '13 हजार' किसान !

आशीष सागर यूपी में चुनाव से पहले  खूब घोषणाएं हो रही हैं । कोई मोबाइल देने का वादा कर रहा है तो कोई कार बांटने का सपना दिखा रहा है, […]Read More »

अखिलेश सीख लें 'निंदक नियरे राखिए' की अदा

प्रियंका यादव यूपी में जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है सियासी पारा चढ़ रहा है । कोई विकास रथ लेकर निकला है तो कोई परिवर्तन रथ पर सवार हो चुका है […]Read More »

ये छठ जरूरी है!

पुष्यमित्र के फेसबुक वॉल से आज बहन अनिता कुमारी ने दिल्ली की छठ के बारे में बड़ी दिलचस्प जानकारी दी। उसने कहा कि पिछले कुछ साल से बिहार से कुछ लोग […]Read More »

छठ पर्व पर 'सरिसवा' नदी को बचाने की सौगन्ध

कुणाल प्रताप सिंह बिहार में हर तरफ छठ की छटा बिखरी है । नदी किनारे बने घाट सजे हुए हैं। शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ छठ की औपचारिक शुरूआत हुई […]Read More »

गरीबी के अंधकार से निकली 'आनंद' की रौशनी

आनंद कुमार  सुपर 30, वो नाम जिसका जिक्र आते ही देश के तमाम गरीब बच्चों की आंखों में उम्मीद की किरण जग जाती है । जिसके हुनर और लगन का कायल […]Read More »

एक बालक के सवाल ने गोवर्धन को अमर बना दिया

दीपावली की अगली सुबह गोवर्धन पूजा की जाती है। लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। इस त्यौहार का भारतीय लोकजीवन में काफी महत्व है। इस पर्व में […]Read More »

SP कुमार आशीष ने 'दीपक' सी जिद ठानी है!

दीपों के पर्व की रौनक हर तरफ बिखरी है। समाज का हर तबका अपने-अपने अंदाज में दीवाली मना रहा है। समाज के कुछ ऐसे दीपक भी हैं, जिसकी रोशनी से […]Read More »

दिल्ली में फोटोग्राफी के किंग से एक मुलाक़ात

सत्येंद्र कुमार यादव कुछ पत्रकार साथियों के साथ 25 अक्टूबर 2016 को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र जाना हुआ । IGNCA के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी से मिलने का कार्यक्रम था। उनसे […]Read More »

जिंदा कौमें पांच साल इंतजार नहीं करतीं...!

कुमार  सर्वेश डॉ. लोहिया ने कहा था कि जिंदा कौमें पांच साल इंतजार नहीं करतीं। लगता है अपने समाजवादी पितामह डॉ. राममनोहर लोहिया की इस बात को समाजवादी पार्टी में […]Read More »

एक गुरु ने जगमग कर दी पाठशाला

सैयद ज़ैग़म मुर्तज़ा उत्तर प्रदेश का एक सरकारी स्कूल इन दिनों अच्छी वजहों से चर्चा में है। प्रदेश के दूरदराज़ गांव के इस स्कूल की सूरत शक्ल कुछ ऐसी है […]Read More »

बिहार में बाढ़ की 'बांधलीला'

पुष्य मित्र बिहार में हर साल बाढ़ कहर बनकर टूटती है । लाखों लोग बेघर होते हैं और हजारों करोड़ का नुकसान होता है । पटना से लेकर दिल्ली तक […]Read More »

लो आ गई बिहार के किसानों के लिए फसल बीमा योजना

अरुण यादव बिहार सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने का फ़ैसला किया है । नीतीश सरकार के इस फैसले को काफी सराहनीय कदम माना जा रहा है, क्योंकि […]Read More »

बाढ़ के पानी और बिहार के 'हाहाकार' की कहानी

पुष्यमित्र इन दिनों वाल्मिकीनगर से लेकर किशनगंज के कोचाधामन तक उत्तर बिहार का हर इलाका बाढ़ के पानी में उब-डूब कर रहा है। गंडक के बैराज का फाटक टूट गया […]Read More »

गांव की सेहत का मददगार आशा बहुओं का स्मार्टफोन

उमेश कुमार अब जब सुनीता देवी किसी गर्भवती महिला के पास जाकर आयरन गोली खाने के फायदे बताती हैं, तो उस महिला के साथ-साथ उसकी सास और घर के अन्य […]Read More »

ट्रैक्टर बिक्री में सबसे तेज बढ़ते राज्य की दुर्दशा

शिरीष खरे साल 2014 में अकेले मध्य-प्रदेश के किसानों ने 88 हजार ट्रैक्टर खरीदे थे। तब सूबे में 32 प्रतिशत की ग्रोथ-रेट से ट्रैक्टर खरीदे गए थे। यह ग्रोथ-रेट देश […]Read More »

सीमांचल में 'वर्चुअल दुनिया' से रियल फाइट

पुष्यमित्र सोशल मीडिया ने आज पूरी दुनिया को एक सूत्र में बांध दिया है, किसी को पुराने दोस्त की तलाश करनी हो तो फेसबुक, किसी को अपने मन की बात […]Read More »

'भूमिका' ने मीडिया से ज़्यादा उर्वर ज़मीन तलाश ली

किसानों और सरकारों का रिश्ता अजीब सा रहा है। सरकारें  योजनाएं बनाती हैं, खूब पैसा बहाती हैं, लेकिन न जाने क्यों फिर भी किसानों के खेत सूखे रह जाते हैं। […]Read More »

'लव योर पुलिस'- इस मुहब्बत में मुश्किलात बहुत हैं जनाब

अरुण प्रकाश हमारे देश में पुलिसिया ख़ौफ़ की कहानी किसी से छिपी नहीं है। पुलिस की छवि कुछ ऐसी है कि उसका नाम लेने पर सिर्फ डर और भय ही याद […]Read More »

अमेरिका से लौटी 'भक्तन' बदल रही है गांव

सत्येंद्र कुमार यादव सपनों ने उड़ान भरी और वो पहुंच गई अमेरिका, लेकिन पिता का दिल बेटी की कामयाबी विदेश में नहीं, अपने गांव में देखना चाहता था। अपनी माटी […]Read More »

तुम निडर डरो नहीं, तुम निडर डटो वहीं

अरुण प्रकाश डीएम साहब सुनते नहीं, सचिव महोदय के पास फुरसत नहीं, सीईओ (मुख्य कार्यपालन अधिकारी ) को परवाह नहीं। अब मैं किसके सामने अपने गांव का दुखड़ा रोऊं कि […]Read More »

सेहमलपुर की 'सेहत'... फ़ाइलों में बेहतर है!

जौनपुर के सेहमलपुर गांव से एपी यादव की रिपोर्ट। सई और गोमती नदी के दोआब पर बसा है, मेरा प्यारा और हरा-भरा गांव-सेहमलपुर। नदियां इसकी आत्मा हैं तो पास से […]Read More »