नवदुर्गा मंदिर, पतवाड़ी

नोएडा एक्सटेंशन यानी एक ऐसा शहर जहां आपको सब कुछ नया ही नजर आएगा। धूल और धुंध से घिरी ऊंची-ऊंची इमारतें दिखाई देंगी। कुछ इमारतें अभी बन रही हैं तो कुछ पूरी तरह तैयार हैं। कंकरीट के इन्हीं कथित जंगलों के बीच सजा है माता का दरबार। महज दो साल में ही इस मंदिर को लेकर लोगों की आस्था भी बढ़ी है और यहां आने वाले लोगों का सिलसिला भी। मंदिर के संचालक टीकम सिंह यादव ने आस्था के साथ ही इस मंदिर को समाज के साथ संवाद का एक केंद्र बनाने की तैयारी कर रखी है। हम बात कर रहे हैं ग्रेटर नोएडा वेस्ट-2 के नौ दुर्गा माता मंदिर की। कभी ये इलाका पतवाड़ी गांव के नाम से मशहूर था और आज भी स्थानीय लोगों की जुबान पर पतवाड़ी का नाम ही पहले आता है और मां का मंदिर भी पतवाड़ी धाम ही पुकारा जाता है।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में सेक्टर 2 स्थित नौ दुर्गा माता मंदिर का संचालन करने वाले टीकम सिंह ने मंदिर परिसर में ही मां के भोजनालय का निर्माण शुरू कर दिया है। योजना तो ये है कि चैत-नवरात्र के दिनों में मां की रसोई से भक्तों को प्रसाद मिलना शुरू हो जाए। मां भोजनालय का मकसद है स्वाद घर जैसा। अगर आप घर जैसे खाने का स्वाद तलाश रहे हैं तो आपके लिए मां का भोजनालय एक अच्छा विकल्प हो सकता है । हालांकि अभी इस रसोई का उद्घाटन नहीं हुआ है ।

टीकम सिंह यादव से जब भी आप बात करें तो उनके जेहन में कई सारी योजनाएं चलती रहती हैं। वो बेहद देशज तरीके से नई तकनीक का प्रयोग करने के हिमायती हैं। वो आधुनिकता और पारंपरिकता की बहस में पड़ने की बजाय जो बेहतर है उसे चुनते हैं और एक नई राह गढ़ते हैं। बदलाव प्रतिनिधि अरुण के साथ मुलाकात में भी उन्होंने ऐसी ही कई योजनाएं साझा कीं। आज उनमें से एक बेहद खास योजना- मां की रसोई – पर बात करेंगे। टीकम सिंह ने एक ऐसी रसोई तैयार करने का फैसला किया है, जहां लोगों को ना सिर्फ पौष्टिक खाना मिले बल्कि वो किफायती भी हो, स्वादिस्ट भी और आपकी सेहत के अनुकूल भी।

बदलाव- नवदुर्गा मंदिर में मां की रसोई कब से खुल रही है और आपके जेहन में ये खयाल कैसे आया?

टीकम सिंह यादव-  अभी मां की रसोई का काम चल रहा है। मेरी कोशिश है कि नवरात्र के मौके पर मां के भक्तों को लिए मां के भोजनालय की शुरुआत हो जाए। नो प्रॉफिट नो लॉस की तर्ज पर ही यहां भोजन और प्रसाद की कीमत रखी जाएगी। हालांकि भोजन का स्तर बेहद उम्दा होगा और स्वाद भी। इस मामले में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

बदलाव- सस्ता खाना उपलब्ध कराने के चक्कर में कहीं क्वालिटी से समझौता तो नहीं होगा?

टीकम सिंह यादव- देखिए मां की रसोई में जो कुछ भी बनेगा वो भक्तों की सेहत को ध्यान में रखते हुए बनेगा। इसलिए हर दिन पहली थाली प्रसाद के रूप में मां को अर्पित की जाएगी, उसके बाद भक्त ऑर्डर पर खाना ले सकेंगे। खास बात ये है कि खाना पूरी तरह शाकाहारी और स्वादिष्ट रहेगा।देखिए लोगों के बैठने का इंतजाम पूरी तरह रेस्टोरेंट जैसा ही होगा । इसके लिए हम दो हॉल बनवा रहे हैं। एक हॉल में एक साथ 250 लोग आराम से बैठकर खाना खा सकते हैं।

वैसे तो अभी रेट तय नहीं किया है फिर भी हमने इसके लिए दो कटेगरी बनाने का फैसला किया है। पहली थाली 50 रुपये के आसपास की होगी, जिसमें आपको सब्जी, दाल, सलाद रोटी और चावल मिलेगा। दूसरी थाली की कीमत अधिकतम 100 रुपये तक होगी जो बर्थडे पार्टी जैसे छोटे उत्सव के लिहाज से तैयार की जाएगी।

बदलाव- आप पार्टी का जिक्र कर रहे हैं तो क्या पार्टी के लिए हॉल भी बुक करने का कोई इंतजाम है ?

टीकम सिंह यादव- जी बिल्कुल, हम लोग जो दूसरा हॉल बना रहे हैं उसे पार्टी के लिहाज से ही बनाया जा रहा है। उसका डेकोरेशन भी उसी हिसाब से किया जाएगा, ताकि आस्था के दरबार में छोटे उत्सव मनाने वाले परिवारों को कोई दिक्कत न हो। फैमिली वालों को कोई परेशानी ना उठानी पड़े ।

टीकम सिंह यादव

बदलाव- आप शुद्ध शाकाहारी खाने की बात कर रहे हैं ये अच्छी बात है लेकिन अपनी रसोई को मिलावट के सामानों से कैसे बचाएंगे ?

टीकम सिंह यादव- भक्तों को स्वादिस्ट के साथ साथ हाईजेनिक फूड मिले इसके लिए हमारी कोशिश है कि मंदिर परिसर में ही उगाई गई सब्जियों का इस्तेमाल किया जाए। साथ अनाज के लिए आसपास के किसानों से बातचीत की जा रही है। गौशाला भी अपनी ही होगी, जहां से दूध आएगा। खास बात ये है कि मंदिर परिसर में आने वाले बच्चों को प्रसाद के रूप में एक गिलास दूध मुफ्त दिया जाएगा।

बातों का सिलसिला लंबा चला। टीकम सिंह ने बताया कि आर्थिक मोर्चे पर भी वो लोगों के साथ मिलकर एक नई योजना बना रहे हैं। लोगों के चंदे से एक वक्त ऐसा भी आ सकता है जब गरीब परिवारों को यहां मुफ्त भोजन दिया जा सकेगा और इलाके में कोई भी शख्स भूखा नहीं सोएगा, इसकी गारंटी दी जा सकेगी।