राकेश कायस्थ

चुनावी रणभेरी बजी, सेनाएं सजी और नारायण प्रकट हो गये। प्रकट ही नहीं हुए बल्कि ‘राष्ट्रवाद’ के रथ पर सवार हो गये। सारथी बनकर नहीं, योद्धा बनकर भी नहीं, सीनियर सिटीजन के रूप में। मार्गदर्शक मंडल में बैठे आधा दर्जन बूढ़ों की ‘बिलखती आत्माओं’ की सारी बददुआएं एक अकेले तिवारी के आशीर्वाद से बेअसर हो जाएंगी। आखिर आडवाणी और जोशी से भी उम्रदराज हैं, तिवारी बाबा। उम्र उस समय भी 75 पार थी, लेकिन हौसला नौजवानों वाला था। तब तिवारी जी आंध्र-प्रदेश के राज्यपाल थे। पद संवैधानिक था लेकिन पारस्परिक सहभागिता वाली जनसेवा में स्वान्त: सुखाय संलग्न रहते थे। सीडी आई थी तो पूरे देश में हंगामा मच गया थी। मुख्य विपक्षी दल बीजेपी ने आसमान सिर पर उठा लिया। नतीजा ये हुआ कि तिवारी को इस्तीफा देना पड़ा। मान लिया गया कि राजनीतिक करियर अब खत्म हो गया। कमबख्त सीडी चीज़ ही ऐसी है, मार्केट में आ जाये तो डुबोकर ही छोड़ती है। संघ के कोटे के बीजेपी महासचिव संजय जोशी सबसे बड़ा उदाहरण हैं।

मैं भी ये मानता था कि जिस तरह लहू का रंग लाल होता है, उसी तरह सीडी का रंग भी केवल नीला ही होता है, लेकिन गलफहमी दूर हो गई। अब मालूम हुआ कि सीडी भी वक्त के साथ रंग बदलती है। तिवारी जी की नीली सीडी अब केसरिया हो चुकी है। सीडी अब उनके गले नहीं पड़ी बल्कि तर्जनी में उसी तरह शोभायमान है, जिस तरह कृष्ण की उंगली में सुदर्शन चक्र। नारायण वाकई लीलाधर हैं। एक जमाना था, जब नारा चलता था—नर ना नारी, नारायणदत्त तिवारी। विनम्रता देखिये तिवारी जी ने कभी इस नारे पर एतराज किया और ना ही खंडन करने की ज़रूरत समझी। शब्दों में क्या रखा है, कर्म बड़े होने चाहिए।
कटाक्ष को झुठलाते तिवारी जी के पौरूष के अनगिनत प्रमाण मौजूद हैं। ऐसे ही एक प्रमाण यानी अपने सबसे छोटे पुत्र रोहित शेखर को लेकर तिवारी जी बीजेपी में आये हैं। रोहित को तिवारी जी बरसो तक पुत्र मानने से इनकार करते रहे। मामला अदालत मे गया। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद एनडी बाबा ने रोहित को `जैविक पुत्र’ के रूप में स्वीकारा। मां उज्ज्वला सिंह और बेटे रोहित ने इस संबोधन पर एतराज जताया तो तिवारी जी ने जैविक शब्द कहना छोड़ा और पिछले लोकसभा चुनाव से ही लगातार कोशिश कर रहे हैं कि बेटे को टिकट मिल जाये। तिवारी जी ने संभवत: दो रिकॉर्ड बनाये हैं।शायद कोई ही ऐसा नेता हो, जिसने 91 साल की उम्र में पार्टी बदली हो। दूसरा रिकॉर्ड सेक्स स्कैंडल में फंसकर वापसी करने वाले दुनिया के सबसे बुजुर्ग राजनेता का हो सकता है। यूपी में बाप-बेटे का झगड़ा चला तो  उत्तराखंड में बीजेपी बाप के बदले महाबाप ले आई है। बोरिंग दिख रहे राजनीतिक तमाशे में थोड़ा रंग भर गया है। वैसे कुछ लोगो का कहना है कि तिवारी जी बीजेपी में शामिल नहीं हुए हैं। वे पार्टी को सिर्फ आशीर्वाद दे रहे हैं। ये आशीर्वाद शब्द बड़ा चमत्कारी है और आशीर्वाद देनेवाला व्यक्ति तिवारी जी सरीखा सिद्ध हो तो क्या कहना। बीजेपी नेता इस बात की खैर मना रहे होंगे कि भावुक होकर तिवारी जी किसी बड़े पार्टी नेता को पुत्रवत ना बता दें।


rakesh-kayasthराकेश कायस्थ।  झारखंड की राजधानी रांची के मूल निवासी। दो दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय । खेल पत्रकारिता पर गहरी पैठ, टीवी टुडे,  बीएजी, न्यूज़ 24 समेत देश के कई मीडिया संस्थानों में काम करते हुए आपने अपनी अलग पहचान बनाई। इन दिनों स्टार स्पोर्ट्स से जुड़े हैं। ‘कोस-कोस शब्दकोश’ नाम से आपकी किताब भी चर्चा में रही।