सत्येंद्र कुमार यादव
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गांव में पहले और आज भी अनपढ़ लोगों को अंगूठा छाप ही बोला जाता है। ऐसे लोग वोट देते वक्त, बैंक से पैसे निकालते वक्त, किसी दस्तावेज पर अपनी पहचान छोड़ते वक्त, अंगूठे का ही इस्तेमाल करते थे और कुछ लोग आज भी करते हैं। पहले की फिल्मों में या हकीकत में भी जमीन हथियाने के लिए अंगूठे का निशान ले लिया जाता था। दस्तावेज पर अंगूठे का निशान लगते ही आपकी संपत्ति दूसरों की हो जाती थी। 70 के दशक से पहले तक अधिकांश लोग हस्ताक्षर करने से अच्छा अंगूठा लगा देना ही उचित समझते थे। बाद में लोग हस्ताक्षर करने पर ज्यादा जोर देने लगे। अक्सर साक्षर लोग निरक्षर लोगों को ताने मारते रहते हैं कि ‘अंगूठा छाप ही रह गए’। इस अंगूठा छाप संस्कृति से निजात पाने के लिए देश में कई अभियान चलाए गए, चलाए जा रहे हैं लेकिन 8 नवंबर की रात जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया, उसके एक हफ्ते बाद से एक नई ‘अंगूठा छाप’ क्रांति शुरू हो गई।

‘अंगूठा छाप’ क्रांति ताना नहीं अब मुहीम बन चुका है। चूंकि गांव में इंटरनेट और ऑनलाइन बैंकिंग की सुविधा नहीं है। अगर कहीं इंटरनेट की पहुंच हैं तो लोग ऑनलाइन मनी ट्रांसफर करने से बचते हैं। एटीएम का इस्तेमाल करना तो करीब करीब गांव के अधिकांश लोग जान गए हैं लेकिन ई-बैंकिंग के मामले में बहुत ही पीछे हैं। नोटबंदी के बाद समस्या ये आ गई है कि लोग अपनों तक पैसे नहीं भेज पा रहे हैं । किसी का बेटा, बेटी शहर में पढ़ रहा है तो किसी के इलाज के लिए पैसे भेजने हैं। लोगों को तमाम तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। बैंकों में इतनी लंबी लाइनें हैं कि लोगों की समस्याएं हल करने में काफी वक्त लगेगा। ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग व्यवस्था तो काफी कमजोर स्थिति में है। समस्याओं से निपटने के लिए इस बीच सरकार ने जो ‘अंगूठा छाप’ क्रांति शुरू की है वो तारीफ के काबिल है।

क्या है ‘अंगूठा छाप’ क्रांति?

atm3‘अंगूठा छाप’ क्रांति का मतलब माइक्रो एटीएम से है। यानि आप ये कह सकते हैं कि जो लोग पढ़े लिखे नहीं हैं या जो साक्षर तो हैं लेकिन ई-बैंकिंग करने में सक्षम नहीं हैं या डरते हैं, उनके लिए ये व्यवस्था काफी मददगार है। ऐसे लोग उंगलियों या अंगूठे का इस्तेमाल कर कहीं भी, कभी भी, किसी को भी चंद सेकंड में पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। इन्हें ना तो इंटरनेट की जररूत पड़ेगी और ना ही लॉग इन, पासवर्ड बनाने की जहमत उठानी पड़ेगी। आधारकार्ड नंबर और उनकी उंगलियां अपनों तक पैसे पहुंचा सकती हैं और अपने लिए पैसे निकाल भी सकती हैं। बायोमेट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल कर सरकार ने सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में बैंकिंग को पहुंचाने का प्रयास किया है। यानि ये कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि ‘आपका अंगूठा आपका एटीएम है।’ आपकी उंगली को आपका एटीएम कार्ड बना दिया गया है। ये भी कहा जा सकता है कि सरकार ने कार्डलेस बैंकिंग की नई व्यवस्था बना दी है।

दरअसल सरकार ने उन सभी बाधाओं को दूर कर दिया है जिसकी वजह से बैंकिंग आम लोगों से काफी दूर थी। अब घर बैठे अंगूठा छाप आदमी भी अपने पैसे का हिसाब किताब ऑनलाइन कर सकता है। अब खाते में कितने पैसे हैं, मिनी स्टेटमेंट या पैसे भेजने के लिए कार्ड की जगह अंगूठे का इस्तेमाल कर सकते हैं। ना पासबुक, ना पासवर्ड और ना ही किसी में बैंक जाने की जरूरत पड़ेगी। सवाल ये है कि ये कैसे हो रहा है या कैसे होगा ? आपको बता दें कि सरकार अब हर पंचायत में कॉमन सर्विस सेंटर के जरिये बैंकिंग सुविधा पहुंचाने की कोशिश में है। इसके लिए बड़े पैमाने पर अभियान भी चलाए जा रहे हैं।atm

  • हर पंचायत में एक कॉमन सर्विस सेंटर यानि CSC खोलने की तैयारी है। जहां माइक्रो एटीएम की सुविधा होगी। देश के लगभग 50 हजार से ज्यादा गांवों में ये सुविधा पहुंचा दी गई है।

  • इस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले बैंक अकाउंट को आधार कार्ड नंबर और मोबाइल नंबर से जोड़ना होगा। अब तक करोड़ों लोगों के आधार कार्ड और मोबाइल नंबर बैंक अकाउंट के साथ जुड़ चुके हैं।

  • उपभोक्ता को बायोमेट्रिक माइक्रो एटीएम इस्तेमाल करने से पहले अपने बैंक से MPIN लेना होगा। MPIN की जरूरत माइक्रो एटीएम से पैसे ट्रांसफर करते वक्त या निकालते वक्त पड़ती है। MPIN मिलने के बाद इसे संभाल कर रखना होता है और इस पिन को किसी से शेयर नहीं किया जाता है।

  • MPIN मिलने के बाद उपभोक्ता को अपना आधार कार्ड नंबर लेकर अपने गांव या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर जाना होगा ।

  • कॉमन सर्विस सेंटर पर मौजूद बैंक मित्र आपके आधार नंबर और अंगुली का निशान लेकर आपके अपनों के खाते में पैसे ट्रांसफर कर देगा या आपको खाते से पैसे निकालकर दे देगा ।

  • मान लीजिए कि आपको अपने बेटे, भाई, बहन या किसी भी रिश्तेदार, व्यापारी, दुकानदार को पैसे भेजना है । आपके पास ना तो डेबिट कार्ड है और ना ही क्रेडिट कार्ड और ना ही ई-बैंकिंग की सुविधा। ऐसे में अगर आपको कहीं पैसे भेजने हैं तो आप अपने आधार नंबर का इस्तेमाल कर बायोमेट्रिक माइक्रो एटीएम के माध्यम से भेज सकते हैं। यानि आपका आधार नंबर आपका एटीएम कार्ड बन जाएगा। इसके लिए जरूरी ये है कि आप जिसको पैसा भेजना चाहते हैं उसका मोबाइल नंबर या आधार नंबर आपके पास हो और ये सुनिश्चित कर लें कि वो नंबर बैंक खाते से जुड़े हों।

  • अगर भेजने वाले और पाने वाले का मोबाइल नंबर या आधार नंबर बैंक खाते से जुड़ा है तो आपको पैसे भेजने में बिल्कुल परेशानी नहीं होगी। आपको सिर्फ इतना करना है कि नजदीकी सहज सेवा केंद्र या कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर बैंक मित्र को अपना आधार नंबर देना होगा और जिसको भेजना है उसका मोबाइल या आधार नंबर देना होगा। इसके बाद बैंक मित्र आपके अंगुठे या अंगुली (जो आधार कार्ड बनाते वक्त इस्तेमाल हुआ था) का निशान बायोमेट्रिक माइक्रो एटीएम पर लेगा । फिर जितना पैसा भेजना है या निकालना है वो रकम मशीन में इंटर करेगा और फिर आपसे MPIN डायल करने के लिए कहेगा । जैसे ही आप MPIN डायल करेंगे आपका पैसा अपनों के पास चला जाएगा या आपके हाथ में कैश आ जाएगा ।

  • पैसा भेजने या निकालने के बाद बैंक मित्र आपको एक पर्ची देगा और एक अपने पास रख लेगा ।

  • अगर आप सोचते हैं कि आपका आधार कार्ड लेकर कोई दूसरा व्यक्ति आपके खाते से पैसे भेज देगा तो इस भ्रम में ना पड़ें, क्योंकि आधार कार्ड में जिन अंगुलियों के निशान दर्ज हैं उन्हीं अंगुलियों के निशान पर पैसा ट्रांसफर होगा या निकासी होगी। कोई दूसरी अंगुली अगर मशीन पर लगाई गई तो मशीन स्वीकार नहीं करेगी ।

  • माइक्रो एटीएम का इस्तेमाल आसान और सुरक्षित है। जिस अंगूठे का इस्तेमाल लोग बुरा मानते थे वही अंगूठा आपकी बैंकिंग को आसान कर रहा है। आप पढ़े लिखे हों या अनपढ़, आसानी से माइक्रो एटीएम का इस्तेमाल कर पल भर में कहीं भी और कभी भी पैसे भेज सकते हैं।

सरकार की कोशिश है कि हर पंचायत में एक कॉमन सर्विस सेंटर हो जहां से लोग पैसे का लेने-देन, पासपोर्ट, वोटर कार्ड या और भी जरूरी चीजें को आसानी से बनवा सकें। इसके लिए सरकार फ्री में सुविधा मुहैया करा रही है। अगर कोई व्यक्ति अपने पंचायत में ऐसी सेवा देना चाहता है तो CSC की वेबसाइट पर जाकर ऑवेदन कर सकता है। ऑवेदन करने के लिए कोई शुल्क नहीं है। आप अपने घर में कॉमन सर्विस सेंटर खोल सकते हैं और लोगों की मदद कर सकते हैं । इसके लिए आपको कंप्यूटर, इंटरनेट, बायोमेट्रिक माइक्रो एटीएम रखना होगा। सरकार की ओर से अप्रूवल मिलने के बाद आप अपने गांव में बैंकिंग सेवा दे सकते हैं। इसके बदले आप हर उपभोक्ता से 10 रुपए तक चार्ज कर सकते हैं।

बैंकिंग की ये व्यवस्था ग्रामीण इलाकों के लिए काफी फायदेमंद और आसान भी है। बैंकों के चक्कर काटने से लोगों को मुक्ति मिलेगी और अपनों तक पैसे पहुंचाने में दिक्कत भी नहीं होगी। देश को कैशलेस बनाने में आने वाले वक्त में इसकी बड़ी भूमिका होगी।


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सत्येंद्र कुमार यादव,  एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय । माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र । सोशल मीडिया पर सक्रिय । मोबाइल नंबर- 9560206805 पर संपर्क किया जा सकता है।