Archives for माटी की खुशबू - Page 2

माटी की खुशबू

‘मर्ज’ बड़ा है… कभी वो, कभी हम… पर छोटी पहल में ‘हर्ज’ ही क्या?

ब्रह्मानंद ठाकुर बदलाव पाठशाला के छात्र। बदलाव पाठशला के विद्यार्थी हैं रोहण ,गौरव ,शिल्की और नेहा। एक ही माता-पिता की पांच संतान। इनमें एक अभी बहुत छोटा है। विगत 24…
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माटी की खुशबू

प्री-प्रेंगनेंसी शूट- नया चलन और कुछ सवाल

सीमा मधुरिमा के फेसबुक वॉल से साभार पिछली बार संस्कृतियों के परिवर्तन की बात करते समय आपको प्री वेडिंग शूट की यात्रा पर ले गए थे ! आशा ही नहीं…
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माटी की खुशबू

सिर्फ कानून नहीं सोच में भी बदलाव लाने की ज़रूरत

शिरीष खरे तीन तलाक विधेयक पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का पक्ष बहुत स्पष्ट है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी इंद्रेश कुमार का कहना है कि इस प्रकार की कुप्रथा से…
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माटी की खुशबू

बच्‍चों को रास्‍ता नहीं , पगडंडी बनाने में मदद करें!

दयाशंकर जी के फेसबुक वॉल से साभारहम बच्‍चों के अंतर्ज्ञान , सहजबोध पर यकीन करने की जगह अपने मन की सुनने में कहीं अधिक यकीन रखते हैं. इसी वजह से…
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माटी की खुशबू

खर्राटामय ‘संगीत’ और प्रयागराज का यादगार सफर

सांकेतिक तस्वीर शरद अवस्थी के फेसबुक वॉल से साभार   रातके लगभग 12 बजने को आए, प्रयागराज एक्सप्रेस केबी1 कोचकी मिडिल बर्थ पर लेटा मैं बेचैनी से करवटें बदल रहा था,…
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माटी की खुशबू

नक्सलवाद और सियासी छलावे से मुक्ति चाहता छत्तीसगढ़

दिवाकर मुक्तिबोध छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभा सीटों के लिए मतदान का एक दौर निपट चुका है। दूसरा व अन्तिम चरण 20 नवम्बर को है। 11 दिसंबर को मतों की गिनती…
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माटी की खुशबू

शहरों की भूल-भुलैया और गांवों का बिगड़ता ताना-बाना

शिरीश खरे शहर का नाम आते ही हमारे सामने गांव की जो भी छवि बने लेकिन इतना तय है कि यह छवि शहर की तुलना में छोटी ही होती है।…
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माटी की खुशबू

भावना का रेगुलेटर कहां है?

राकेश कायस्थ भावना में भगवान बसते हैं। इसलिए भक्त बहुत भावुक होते हैं। राफेल का मामला उछला तो मुझे लगा कि भावुक भक्त भगवान से कहेंगे— कह दीजिये यह झूठ…
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माटी की खुशबू

महाराणा प्रताप के आखिरी ठीये की मेरी पहली यात्रा

जयंत कुमार सिन्हा हिंदू-मुसलमान के बीच पनप रहे घिन्न भरे माहौल में एक ऐसा मुस्लिम सहकर्मी मिला, जिसने तड़क-भड़क की दुनिया से दूर एक अलग जगह दिखाने में रूचि दिखाई।…
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माटी की खुशबू

हिंदी गजल के कोहिनूर दुष्यंत कुमार

डा. सुधांशु कुमार 'मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूं/वो गजल आपको सुनाता हूं ।' ओढ़ने बिछाने की शैली एवं सरल सपाट शब्दों द्वारा आम जनता से सीधा-सीधा संवाद करने वाले बीसवीं…
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