Archives for माटी की खुशबू - Page 2

माटी की खुशबू

कांपता हृदय और पिता

रुपेश कुमार जब देखता हूं ढीली होती पेशियां पिता की बहुत कांपता है हृदय ! सुबह जब कभी  लेटते हैं देर तक पिता तब जी कड़ा कर उन्हें जाता हूँ…
और पढ़ें »
अतिथि संपादक

स्त्री का सम्मान प्रकृति और ईश्वर का सम्मान है

डाॅ॰ संजय पंकज बिहार के मशहूर चित्रकार राजेंद्र प्रसाद गुप्ता की कृति प्रकृति और पुरुष का आकर्षण सृष्टि के प्रारंभ का एक विराट निदर्शन है। उस गोपन रहस्य में जाने…
और पढ़ें »
माटी की खुशबू

श्रम से निखरता सौंदर्य

डॉ. भावना बिहार के प्रसिद्ध चित्रकार राजेंद्र प्रसाद गुप्ता की कृति। बलुई के ढलान से बोझा लिए जब भी गुज़रती है वह काली लड़की तो लोग उसे चिढ़ाते हैं 'करीअक्की'…
और पढ़ें »
माटी की खुशबू

वर्ल्ड थियेटर डे- हम सब के दिल में बसा है ‘नटकिया’

पशुपति शर्मा वर्ल्ड थियेटर डे। रंगमंच के उत्सव का एक दिन। वो उत्सवधर्मिता जो रंगकर्म में स्वत: अंतर्निहित है। यकीन न हो तो किसी रंगकर्मी से पूछ कर देख लें।…
और पढ़ें »
माटी की खुशबू

“मां को कैसे संभालूंगा बाबूजी…”

माता-पिता के साथ न्यूज़ 24 और इंडिया टीवी के पूर्व मैनेजिंग एडिटर अजित अंजुम वरिष्ट पत्रकार अजित अंजुम के पिता राम सागर प्रसाद सिंह का निधन 20 मार्च की सुबह…
और पढ़ें »
बिहार/झारखंड

अन्नदाता की उन्नति के लिए ‘फसल सलाह’

अरुण यादव पिछले हफ्ते राजधानी दिल्ली के पूषा कृषि अनुसंसाधन संस्थान में कृषि उन्नति मेला आयोजित हुआ । 16 से 18 मार्च तक चला किसान मेला जितना भव्य रहा उतना…
और पढ़ें »
माटी की खुशबू

बुजुर्गों का अकेलापन और हमारी जिम्मेदारी

पशुपति शर्मा घर के दरवाजे पर हाथ में अखबार लिए बड़ी तल्लीनता से खबरों से बावस्ता मेरे फूफाजी। तस्वीर बुआ के बारहवीं का कार्यक्रम संपन्न होने के बाद अलसुबह की…
और पढ़ें »
माटी की खुशबू

असली किसान कौन ?

जब जब किसान अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरता है तब किसान विरोधी सोच वाले तमाम फेसबुकिया ब्रिगेड झूठ फैलाने के लिए तैयार खड़ी हो जाती है । कोई…
और पढ़ें »
चौपाल

बनपुरी के डिजिटल स्कूल बनने की कहानी गजब-दिलचस्प है!

शिरीष खरे बारह साल पहले जब यहां यह स्कूल नहीं था तब एक आदमी ने अपनी जमीन दान कर दी। लेकिन, स्कूल के लिए जब भवन उपलब्ध नहीं था तब…
और पढ़ें »