Archives for माटी की खुशबू - Page 11

‘भिखारी’ का जन्मदिन है… आजा नच ले

एम अखलाक यह बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि भिखारी ठाकुर का कलाकार मन आखिर जागा कैसे? वाक्या कुछ यूं है- किशोरावस्था में ही उनका विवाह मतुरना के साथ…
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हिंदु तुरक हम एके जाना- दरिया साहब

सुधा निकेतन रंजनी मध्ययुग में बहुत सारे पंथों और सम्प्रदायों की स्थापना हुई। भारत में इस समय व्यापारों और दस्तकारों का उदय हो रहा था। व्यापार के कारण लोगों की…
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बिना बिजली के चुनावी ‘करंट’ दौड़ रहा है!

अरविंद पांडेय बाहर लालटेन जल रही है...जो छज्जे पर लगे हुक के सहारे टांग दी गई है। रोशनी इतनी ही है कि चेहरे के अलावा कुछ देखने के लिए आंखों…
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चलो ‘गुइयां’, अपन भी अखबार निकालें

सचिन श्रीवास्तव मध्य प्रदेश विज्ञान सभा के पातालकोट स्थित गैलडुब्बा गांव में दीवार अखबार ‘‘गुइयां’’ के विमोचन का साझीदार बनना अपने तरह का सुख रहा।  अखबार बच्चों ने तैयार किया…
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बीफ

विवेक मिश्रा अरे यार। नहीं...नहीं...धत। छि:। दुष्यंत श्रीवास्तव ये क्या किया तुमने। यह कहते हुए नाक सिकुड़ी हुई थी मोहन पांडेय की। दुष्यंत - हैरान और अवाक था...जाने कौन सा…
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काए गुड़िया नईं चिन्हो का?

कीर्ति दीक्षित काफी सोच विचार के बाद शहर के शोरगुल से दूर अपनी कलम को आवाज देने के लिए मैंने अपने गाँव को चुना। बैग में चन्द कपड़े डाले और निकल…
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पिंडी में गांव की गरिमा का महोत्सव

  सत्येंद्र कुमार पिंडी महोत्सव, फोटो- बृजेश धर दुबे तेरे शहर से तो कहीं अच्छा है मेरा गांव। चमक रहा है, दमक रहा है, महक रहा है। दिल्ली में रहकर…
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माटी की खुशबू

ऑस्ट्रेलिया में पूर्णिया के ‘ईयान बाबू’!

दीवार पर रेणु, चौकी पर ईयान बाबू। सभी चेहरों पर मुस्कान। ये पूर्णिया की माटी है भाई। सत्येंद्र कुमार शानदार, जबरदस्त, जिंदाबाद इनके लिए भी आप बोल सकते हैं। बहुत…
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फेसबुकिया दोस्तों, दो लफ़्ज़ों में नहीं होती कोई ‘क्रांति’

धीरेंद्र पुंढीर आज़ादी की जंग इतनी आसान नहीं थी जितनी वो फेस बुक पर दिखाई देती है। तिंरगा लगाने या फिर एक नारा दे देने से हासिल नहीं हुई है…
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अराधना, मीठी यादें और सखियों से ठिठोली यानी ‘मधुश्रावनी’

विपिन कुमार दास की रिपोर्ट सखियों संग शिव शक्ति की पूजा। फोटो- विपिन कुमार दास सावन जिसे सिंगार और भक्ति का अदभुत महीना माना जाता है। मिथिलांचल के सांस्कृतिक जीवन…
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