Archives for माटी की खुशबू - Page 11

फागुन के महिना में खेत के खेत खाली डरे… छाती फटत

कीर्ति दीक्षित ‘का बताएं बेटा मर रहे... सब सरकार तो सरकार इसुर तक दुश्मन बनो बैठो किसान को तो , देख लेओ फागुन के महिना में खेत के खेत खाली…
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छोटा कर के देखिए जीवन का विस्तार- निदा फ़ाजली

अनिमेष पाठक बात दिसंबर 2015 के पहले हफ्ते की है। ऑफिस से काम जल्दी निबटाकर लगभग दौड़ता हुआ मैं मुनव्वर राणा के मुशायरे में पहुंचा था। पर ये क्या -मुनव्वर भाई…
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खुद से झूठ बोलती औरतें

बिहार के प्रसिद्ध चित्रकार राजेंद्र प्रसाद गुप्ता की कलाकृति। पिता द्वारा आपने आस पास खींचे गए वृत्त में बंधी गाय की तरह पगहे में लवराई लड़कियां जा सकती हैं दूर…
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सोनपुर मेला… बस कहने को सबसे बड़ा पशु मेला?

 पुष्यमित्र सोनपुर मेला- पशु गायब, खाली हिस्सों में परंपरा तो निभाई जा रही है। फोटो-पुष्यमित्र बैल बाजार बिल्कुल खाली है। गाय बाजार में मुश्किल से 40-50 गायें और बछड़े हैं।…
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‘भिखारी’ का जन्मदिन है… आजा नच ले

एम अखलाक यह बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि भिखारी ठाकुर का कलाकार मन आखिर जागा कैसे? वाक्या कुछ यूं है- किशोरावस्था में ही उनका विवाह मतुरना के साथ…
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हिंदु तुरक हम एके जाना- दरिया साहब

सुधा निकेतन रंजनी मध्ययुग में बहुत सारे पंथों और सम्प्रदायों की स्थापना हुई। भारत में इस समय व्यापारों और दस्तकारों का उदय हो रहा था। व्यापार के कारण लोगों की…
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बिना बिजली के चुनावी ‘करंट’ दौड़ रहा है!

अरविंद पांडेय बाहर लालटेन जल रही है...जो छज्जे पर लगे हुक के सहारे टांग दी गई है। रोशनी इतनी ही है कि चेहरे के अलावा कुछ देखने के लिए आंखों…
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चलो ‘गुइयां’, अपन भी अखबार निकालें

सचिन श्रीवास्तव मध्य प्रदेश विज्ञान सभा के पातालकोट स्थित गैलडुब्बा गांव में दीवार अखबार ‘‘गुइयां’’ के विमोचन का साझीदार बनना अपने तरह का सुख रहा।  अखबार बच्चों ने तैयार किया…
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बीफ

विवेक मिश्रा अरे यार। नहीं...नहीं...धत। छि:। दुष्यंत श्रीवास्तव ये क्या किया तुमने। यह कहते हुए नाक सिकुड़ी हुई थी मोहन पांडेय की। दुष्यंत - हैरान और अवाक था...जाने कौन सा…
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काए गुड़िया नईं चिन्हो का?

कीर्ति दीक्षित काफी सोच विचार के बाद शहर के शोरगुल से दूर अपनी कलम को आवाज देने के लिए मैंने अपने गाँव को चुना। बैग में चन्द कपड़े डाले और निकल…
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