Archives for चौपाल - Page 19

विचारों के ‘खिचड़ी युग’ में अपने मन की बात सुनना ज़रूर

जेएनयू प्रकरण और मीडिया। इस मुद्दे पर बदलाव की ओर से आयोजित विचार गोष्ठी के लिए रविवार की शाम 4 बजे से वैशाली के जज कॉलोनी पार्क में पत्रकारों के…
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इस्तीफ़ा कुबूल करें ‘जहांपनाह’

एक इस्तीफ़ा, हमेशा एक व्यक्ति का नहीं होता। वो उन तमाम लोगों की भावनाओं की अभिव्यक्ति होता है, जो अपनी सीमाओं की वजह से ख़ामोशी ओढ़े रखते हैं। पत्रकारिता के…
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जौनपुर से बह चली ‘बदलाव’ की बयार

'बदलाव की चौपाल' मेें नेवादा गांव के लोग गांव में बदलाव का मतलब होता है कच्ची सड़क पक्की हो जाए। खेती में नया प्रयोग, आधुनिक यंत्रों का इस्तेमाल। गांव में…
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जौनपुर के नेवादा गांव में बदलाव की पहली ‘चौपाल’

बिहार के मधेपुरा से शुरू हुआ बदलाव का सफर अब अपने अगले मुकाम की ओर बढ़ चला है। आप सभी के सहयोग से 'बदलाव' ने अब तक गांवों और वहां…
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जेएनयू को ‘राष्ट्रद्रोही’ कहना, ‘देशभक्ति’ नहीं है!

विकास दिव्यकीर्ति (एक हज़ार से ज़्यादा शेयर और करीब 3000 लाइक्स। विकास दिव्यकीर्ति ने जेएनयू प्रकरण पर संतुलित राय रखी है। सोशल मीडिया पर साथियों ने अपने अंदाज में ये…
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इंसाफ़ के मंदिर में ये ‘राष्ट्रदूत’ कौन हैं?

गांधी के इस देश में हम कहें चाहें कुछ भी लेकिन जब बड़े मौके आते हैं तो हम अहिंसा के धर्म का पालन नहीं करते। हिंसा के बूते ही अपनी…
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‘उन्माद’ की आग में अपने-अपने चेहरे देख लो

जेएनयू पर चर्चाओं का दौर जारी है। सोशल मीडिया पर जंग चल रही है। आपसे किए वादे के मुताबिक टीम बदलाव संवाद की प्रक्रिया को जारी रख रही है। बस…
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जेएनयू में हंगामा क्यों बरपा है… सबको पता है!

जेएनयू में 'देशद्रोह' पर हंगामा बरपा है। हंगामा ऐसा कि दो गुट बंट गए हैं। अब वैचारिक स्तर पर बातचीत की बजाय गाली-गलौच और लाठी के बल पर बात मनवाने…
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‘स्टार्ट अप’ से ‘स्टैंड अप’ तक… कहीं वो तमाशबीन ही न रह जाएं?

राजेंद्र तिवारी आलेख में इस्तेमाल सभी फोटो- राजेंद्र तिवारी के फेसबुक वॉल से साभार। अस्सी के दशक में जब आर्थिक ‘ट्रिकल डाउन’ थ्योरी आयी थी और नब्बे के दशक में…
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मालदा से पूर्णिया तक ‘आग’ पर कोई न सेंके अपनी ‘रोटी’

कहां छिप गए वे सेक्युलर, मानवतावादी... ! पद्मपति शर्मा (फेसबुक वॉल पर) पद्मपति शर्मा मालदा के बाद पूर्णिया ! यह हो क्या रहा है ? क्या सहिष्णुता सिर्फ उस बहुसंख्यक…
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