Archives for चौपाल - Page 19

अजीत अंजुम और मीडिया की ‘बैताल’ कथा

फेसबुक पर अजीत अंजुम की पोस्ट-एक वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम। टीवी न्यूज़ चैनल्स पर भूत /प्रेत /रहस्य /रोमांच/ डायन/ चुड़ैल और परियों की वापसी हो गई है। कोई भूतों की…
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हम ये कैसी पत्रकारिता कर रहे हैं?

 दैनिक भास्कर के ग्रुप एडिटर कल्पेश याग्निक पत्रकारिता में रहते हुए पत्रकारिता धर्म निभाने की ललक पता नहीं कितने पत्रकारों में बची रह गई है? लेकिन ऐसे में जब कोई…
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सम्मान वापसी- भावना और तर्क में किसका पलड़ा भारी?

प्रणव मुखर्जी, राष्ट्रपति दिवाकर मुक्तिबोध देश में बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में नामचीन साहित्यकारों, फिल्मकारों, संस्कृतिकर्मियों और वैज्ञानिकों द्वारा राष्ट्रीय सम्मान लौटाने की घटनाओं पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की प्रतिक्रिया…
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गोयनका सम्मान का ‘राम नाम सत्य’

बाबा असहिष्णु आनंद जैसे विश्व भर में सिनेमा प्रेमियों को, खुद अभिनेता-अभिनेत्रियों को, फिल्म समीक्षकों को और सिनेमा के क्षेत्र में सृजनात्मक काम कर रहे लोगों को ऑस्कर पुरस्कारों की…
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बिना बिजली के चुनावी ‘करंट’ दौड़ रहा है!

अरविंद पांडेय बाहर लालटेन जल रही है...जो छज्जे पर लगे हुक के सहारे टांग दी गई है। रोशनी इतनी ही है कि चेहरे के अलावा कुछ देखने के लिए आंखों…
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‘जनता की राजधानी’, ये लड़ाई इतनी आसान भी नहीं

गैरसैंण, उत्तराखंड पुरुषोत्तम असनोड़ा उत्तराखण्ड की 'जनता की राजधानी' के नाम से विख्यात गैरसैंण में 2 नवम्बर से आयोजित विधान सभा सत्र पक्ष-विपक्ष के हो-हल्ले, आरोप-प्रत्यारोप से आगे नहीं बढ…
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इस ‘घाव’ को अब पक ही जाने दें!

सचिन कुमार जैन फोटो-सचिन कुमार जैन के फेसबुक वॉल से मैं दिल से चाहता हूँ कि बिहार में उनकी जबरदस्त जीत (विजय नहीं) हो। मैं चाहता हूँ कि वे मांस पर…
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चुनावी महाभारत ‘बेईमान’… फिर भी नेताजी ‘अच्छे आदमी’ !

पुष्यमित्र शिकवा शिकायत क्या बतियाएं, वोटिंग कर दे रहे हैं। फोटो साभार- बीबीसी “हमारे यहां के चुनावी माहौल के बारे में क्या जानना है? यह बात तो लगभग जग-जाहिर है…
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सुनपेड की ‘दबंग कथा’ पर मीडिया से ‘दबंग’ सवाल

धीरेंद्र पुंडीर हर घटना एक दम LIVE। आंखों के सामने। सच का सच। दूध का दूध, पानी का पानी। शीशे की तरह साफ। ये सब अलग अलग मीडिया की टैगलाइन…
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