Author Archives: badalav - Page 152

ओ शहर, गांव से बड़े भय के साथ लौटता हूं

अमित शर्मा अब यहां की धूल में पहले-सी वो महक नहीं। अब यहां के ‘राम-राम’ वाले संबोधन में पहले-सा अपनापन नहीं। अब यहां की बर्फी में पहले-सा वो स्वाद नहीं।…
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टेलीविजन की तरह उन्माद नहीं फैलातीं पुस्तकें

संजीव कुमार सिंह रविवार को दिल्ली बुक फेयर का आख़िरी दिन। दिल्ली पुस्तक मेले से खट्टा मीठा अनुभव लेकर लौटा। खट्टा इसलिए कि इस बार पुस्तक मेले का स्वरूप बदला…
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मेरा गांव, मेरा देश

24 X 7… ये फ्री सेवा तो गुरुओं की ही है!

सत्येंद्र कुमार माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों के मिलन की तस्वीर। लोग कहते हैं कि ज्ञान घोलकर नहीं पिलाया जा सकता लेकिन मेरी ज़िंदगी में ऐसे कई गुरु…
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रेगिस्तान की रेत से उम्मीदों की बूंद निचोड़ते हैं, मेरे गुरुवर

सुमित शर्मा प्रोफेसर टी के जैन, जो पढ़ लेते हैं मन।चे गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पांव/बलिहारी गुरु आपनौ, गोविंद दियो बताय। आज गोविंद का दिन भी है और…
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वो जिन्होंने ‘बदलाव’ का ज्ञान और मान बढ़ाया

हरदोई के प्रधानाचार्य के मन की बातें बिजनौर के शिक्षक निशांत यादव की रिपोर्ट। रामपुर इंटर कॉलेज में शिक्षक शरत कुमार की रिपोर्ट वो जो पढ़ने और सीखने की ललक…
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अजीत, सलाखों में कैसे गुन लेते हो हसीन सपने?

रविकांत चंदन बनारस के कैदी अजीत कुमार सरोज ने इग्नू के एक डिप्लोमा कोर्स में टॉप स्थान हासिल किया। प्रतिशोध, नफरत और ना उम्मीदी के बीच आयी एक अच्छी खबर…
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गाँवन के गुनहगार अपने, आ कोसेला गाँव के

डॅा० जयकान्त सिंह 'जय' हमार गतर-गतर गँवई गरिमा के गवाही देला। रोंआँ-रोंआँ ओकरे रिनी (ऋणी) बा। हमार मन-मिजाज आ दिल-दिमाग हर घरी ओही गँवई गंध-सुगंध में बोथाइल-गोताइल रहेला। नोकरी-चाकरी के…
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चौपाल

सरकारी स्कूल- केवल ढोल पीटने से ढोल फट जाएगा

मृदिक व्रतेश सरकारी और गैर-सरकारी, दो स्कूली दरबार। यहां व्यवस्था-अव्यस्था एवं सुविधा-असुविधा के अंतर का विभाजक बीज बोकर एक अद्भुत खेल खेला जा रहा है। यहां उपभोक्ता को लुभाने के…
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खुश हो लो… सड़क प्रवीण तोगड़िया के नाम तो नहीं की

देवांशु झा के फेसबुक वॉल से औरंगजेब रोड पर संग्राम छिड़ा है। भला सड़क का नाम औरंगजेब से बदल कर एपीजी अब्दुल कलाम क्यों किया जा रहा है? इसमें मुसलमानों…
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