विकास मिश्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्णय साहसिक है। देशहित में है, इसमें किसी को कोई शक नहीं है। उनके इस एक फैसले ने ब्लैक मनी वालों की नींद उड़ा दी है ये भी सच है, आर्थिक स्थिति मजबूत होगी ये भी सच है। महंगाई पर लगाम भी लग सकती है, लेकिन मुझे लगता है कि इस फैसले के अमल में व्यावहारिक पक्ष नहीं देखा गया। मोदी को या तो सलाह नहीं दी गई या फिर उन्होंने किसी की सलाह नहीं सुनी। मैं कोई अर्थशास्त्री नहीं हूं, रायचंद भी नहीं हूं कि बिना मांगे सलाह हूं। लेकिन मुझे लगता है कि मोदी को सबसे पहले 1000 रुपये के नोट बंद करने चाहिए थे, ये ऐलान भी करना था कि आगे 500 के पुराने नोट भी बंद करेंगे, ताकि 1000 के नोटों को 500 के नोटों में बदलवाने का खेल न चल पाता। खैर ये तो सरकार का काम था कैसे करना है वही जाने लेकिन जनता को परेशानी हो रही है इसमें कोई शक नहीं ।

crowd-at-atm-1नोटबंदी से सबसे ज्यादा परेशान दिहाड़ी मजदूरों को उठानी पड़ रही है । मेरे घर जो काम करती हैं, वो पिछले पांच-छह दिनों से परेशान थीं, दो दिन बैंक की लाइन में लगी, लेकिन नोट नहीं बदले। सुबह लाइन में लग नहीं सकती थीं, क्योंकि लोगों के घरों में काम करना था। खैर, आज सुबह आईं तो मैंने बुलाकर पूछा। बोलीं-2500 रुपये लेकर घूम रही हूं, सब पांच सौ के नोट हैं। बेटी का टेस्ट करवाना है, बेटे की दवा लानी है, कल किसी तरह चीनी लेकर आई, राशन वाले ने उधारी बंद कर दी है। खैर, मैंने उनसे 5 सौ के सारे नोट लिए और बदले में सौ-सौ के नोट दे दिए। नोटबंदी के बाद कल रात ही सौ सौ के नोटों के दर्शन हुए थे। चेक से 24 हजार रुपये निकले थे। एक शुभेच्छु ने लाइन में लगने से बचा लिया था। काम वाली बाई के हाथ जब 100-100 के ताजे नोट पहुंचे तो खुशी के मारे आंखें बरसने लगीं, बातें खनक रही थीं, आंखें बरस रही थीं। महसूस हुआ जैसे आंखों से आंसू नहीं, दुआएं बरस रही हैं। मैंने उनसे और पैसे लेने की बात कही, बोलीं- नहीं भइया काम चल जाएगा। दफ्तर में मेरी एक महिला मित्र को एक शादी में जाना था, कैश के लिए बहुत परेशान थीं, 10 हजार रुपये उन्हें भी दिए, गड्डी देखकर उनका चेहरा खिल गया। ये दास्तान मेरी निजी थी, लेकिन सार्वजनिक सिर्फ इस नाते कर रहा हूं कि अगर ऐसे वक्त में किसी की किसी भी तरह से मदद कर सकते हों तो जरूर कीजिए। नहीं कुछ तो लाइन में लगे हैरान परेशान लोगों को एक बोतल पानी देकर तो देखिए, रिटर्न में जो खुशी मिलेगी, वो दिल में समाएगी नहीं। ये भी मेरा आजमाया हुआ सच है।


विकास मिश्रा। आजतक न्यूज चैनल में वरिष्ठ संपादकीय पद पर कार्यरत। इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन के पूर्व छात्र। गोरखपुर के निवासी। फिलहाल, दिल्ली में बस गए हैं। अपने मन की बात को लेखनी के जरिए पाठकों तक पहुंचाने का हुनर बखूबी जानते हैं।