महामना! इन्हें माफ़ कर देना…

महामना एक्सप्रेस की दुर्दशा- मुसाफ़िरों की मेहरबानी

भूपेंद्र सिंह

कोई भी देश अपने शासक से महान नहीं बनता है, वह महान बनता है अपने लोगों से, अपने समाज से। यदि जनता ही अपने दायित्व का पालन सही तरीके से नहीं करेगी, तो सरकार में बैठे लोग भी लापरवाह हो जाएंगे। एक तरफ तो हम सरकार पर आरोप लगाते रहते हैं कि सरकार कुछ नहीं कर रही है। वहीं दूसरी तरफ हम सरकारी संपत्तियों के साथ जो व्यवहार करते हैं, वह निंदनीय है। मोदी सरकार के स्वच्छता अभियान की मुसाफिर खुद धज्जियां उड़ा रहे हैं। सरकार लाख प्रयास कर ले, जब तक हम खुद को नहीं सुधारते, सभी नियमों का पालन नहीं करते हैं, तब तक कोई अभियान स्वच्छता नहीं ला सकता। सरकारों की आलोचना करना तो आसान है। पर सरकार का सहयोग करना मुश्किल।

mmexpप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली से वाराणसी के लिए देश की सबसे मॉडर्न ट्रेन महामना एक्सप्रेस को फ्लैग ऑफ किया। नई दिल्ली से महामना एक्सप्रेस हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को चलती है। वाराणसी से हर मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को चलती है। इस ट्रेन में सरकार ने यात्रियों की सुविधाओं का भरपूर ख्याल रखा है। इसमें सभी बोगियां फायर प्रूफ हैं। बाहर आग अगर लगी भी, तो अंदर तक ये नहीं पहुंचेगी। पैसेंजर्स के लिए बायो टॉयलेट और एक्जॉस्ट फैन भी। ट्रेन में एलईडी लाइटिंग सिस्टम लगाए गए हैं। बुजुर्ग लोगों के लिए बोगियों में घर जैसी सीढ़ियां बनाई गई हैं। हर सीट पर आसानी से खुलने वाला स्नैक्स टेबल भी दिया गया है। केबिन में फायर सिस्टम (सिलेंडर) लगे हैं। ऐसी कई और खूबियों से लैस है यह ट्रेन। पहली बार मॉडर्न पेंट्रीकार में इलेक्ट्रॉनिक चिमनी (एक्जॉस्ट) लगाई गई है। पानी के लिए आरओ (RO) सिस्टम लगाया गया है। कर्मचारियों के आराम करने के लिए कंफर्ट केबिन बनाया गया है। पेंट्रीकार, लोको पायलट और गार्ड के पास इमरजेंसी के लिए एनाउंसमेंट टूल्स लगे हैं।

1पर जब यह ट्रेन दिल्ली पहुंची तो उसका क्या हाल था, यह आप तस्वीरें देखकर समझ सकते हैं। लोगों ने पानी का नल खुला छोड़ दिया था। कूड़ा डस्टबिन की जगह बाहर ही फेंक दिया। नल का टैप उखाड़ दिया। वॉस बेसिन में गंदगी कर दी। बेसिन जाम कर दिया। लाइट तोड़ दिए। खबर तो यहां तक है कि कुछ सामान चोरी भी हुआ। सामान छोड़िए जनाब, यहां लोगों ने साबुन तक नहीं छोड़ा।एक तरफ सरकार और रेलमंत्री रेल यात्रियों की सुविधाओं के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। सुरक्षा कर्मचारी दिन रात ड्यूटी करके यात्रियों की सुरक्षा करते हैं। सरकार नई योजनाएं बना रही है, जिससे यात्रियों की परेशानियों को कम किया जा सके और उन्हें एक सफल, सुखद और मंगलमय यात्रा मिले। वहीं दूसरी तरफ, कुछ लोग इस तरह की हरकतों से देश की जनता को शर्मशार कर रहे हैं।

2किसी भी व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार और जनता, दोनों की सहभागिता जरूरी है। सोशल मीडिया के बढ़ते चलन से अब रेलवे भी अछूता नहीं है। रेलवे भी अब सोशल मीडिया पर सक्रिय है, जहां से तमाम सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु और लगभग सभी बड़े अधिकारी सोशल मीडिया पर (ट्वीटर) सक्रिय हैं। रेल मंत्रालय के ट्रवीटर से जानकारी आसानी से जनता के बीच पहुंच रही है। इससे कई लोगों की समस्याओं का समाधान भी हुआ है।

कुछ उदाहरणों से आप समझ सकते हैं। गत दिसंबर में पत्रकार का परिवार दिल्ली आ रहा था। ट्रेन के लेट होने पर दूध ना होने से उनका बच्चा रोने लगा। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। तो उन्होंने सीधे रेल मंत्री को ट्वीट के माध्यम

ट्वीट पर किसी को व्हीलचेयर मिला तो किसी को खाना
ट्वीट पर किसी को व्हीलचेयर मिला तो किसी को खाना

से जानकारी दी। रेलमंत्री को ट्वीट करके कहा कि ‘ट्रेन काफी लेट है, मेरे 18 महीने के बेटे को दूध चाहिए.’ ट्वीट पर ही सत्येंद्र यादव ने रेलमंत्री को ट्रेन में सवार अपने भाई का मोबाइल नंबर दिया। उस वक्त ट्रेन उत्तर मध्य रेलवे के इलाहाबाद मण्डल से गुजर रही थी। रेल मंत्री ने तुरंत संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया। कानपुर के पास फतेहपुर स्टेशन पर स्टापेज ना होने के बावजूद दो मिनट का स्पेशल स्टापेज करवाया गया और ट्रेन रोककर अधिकारियों ने दूध परिवार को उपलब्ध कराया। यही नहीं कानपुर स्टेशन पहुंचने पर भी दूध उपलब्ध कराया गया।

दूसरी घटना में बोकारो निवासी एक दंपत्ति 55 वर्षीय अभय सिंह व मधु सिंह नई दिल्ली-पुरी नीलांचल एक्सप्रेस से बोकारो लौट रहे थे। ट्रेन ग्यारह घंटे लेट थी। दंपत्ति के बेटे अभय आनंद ने कई बार बात करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं हो पाई। परेशान होकर उन्होंने रेलमंत्री से सहायता मांगी। रेलमंत्री के निर्देश के बाद रेलवे बोर्ड ने ट्रेस कर पता किया कि ट्रेन कहां है। उसके बाद कोडरमा में अधिकारियों के निर्देश पर स्टेशन प्रबंधक एमके सिंह ने ट्रेन में जाकर दंपत्ति की बात उनके बेटे से कराई। इसी साल जनवरी में ही राघव झा अपनी पत्नी प्रतिभा और बेटे के साथ बिलासपुर जा रहे थे। बच्चे ने पैंट गीली कर दी। गीली होने की वजह से बच्चा लगातार रो रहा था। राघव ने रेल मंत्रालय और रेल मंत्री सुरेश प्रभू से ट्विटर पर अपील की और मदद मांगी। बोकारो स्टेशन पर जब ट्रेन रुकी तो आरपीएफ के जवान डायपर लेकर पहुंचे। बच्चे के पिता हैरान रह गए।

ऐसी कई घटनाएं इधर सामने आई जब रेलमंत्री और उनके मंत्रालय ने यात्रियों की मदद की। इसके लिए बाकायदा एक स्पेशल टीम काम कर रही है। जो इस तरह की सूचना पर एक्शन में आ जाती है और जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुचाती है। रेलमंत्री खुद अपने ट्विटर पर निगाह रखते हैं और अधिकारियों से समय-समय पर फीडबैक लेते रहते हैं। लेकिन कुछ यात्री क्या कर रहे हैं?

bhupendra+singh+final


भूपेंद्र सिंह, आजमगढ़ के बगहीडाड़ गांव के निवासी।  इन दिनों इंडिया टीवी में कार्यरत हैं। आप से 07827597770 पर संपर्क किया जा सकता है।