बांदा से आशीष सागर दीक्षित

बांदा- बट को बेटे की तरह पालने का संकल्प।
बांदा- बट को बेटे की तरह पालने का संकल्प।

बुंदेलखंड की ख़तम होती जा रही हरियाली और सरकारी पौधारोपण के साल दर साल किये जा रहे कागजी कारनामों के बीच एक नई शुरुआत बुन्देली गांववालों ने की है। चटियल बुंदेलखंड में ये पहल भी बानगी है कि पर्यावरण सबकी ज़िम्मेदारी है। बाँदा के नरैनी तहसील के दोआबा की पट्टी में हरियाली चौपाल का सोलह पेड़ एक जिंदगी अभियानचल रहा है। बडोखर खुर्द और गुरेह गाँव में बरगद के पौधों को पिछली सर्दियों में रोपा गया था।

अधिकारी और गांववाले मिलकर पौधों को नई जमीन और जीवन देते हुए।
अधिकारी और गांववाले मिलकर पौधों को नई जमीन और जीवन देते हुए।

वृक्षमित्र बारिश की राह देख रहे थे कि पानी बरसेगा तो अपने संकल्प को अमलीजामा देंगे। इसी कड़ी में वनविभाग से 200 बरगद पौधे लिए गए। गाँव के किसानों ने संकल्प पत्र भरकर इन पौधों को पुत्र माना। ये गांव वाले तीन साल तक इनकी पूरी सेवा और देखभाल करेंगे। जब तक पौधे बड़े न हो जाएं, उनके लालन-पालन की जिम्मेदारी गांववालों की होगी। पौधों का नामकरण किया गया, मसलन बरनंदन, वटगोपाल, वटेश्वर नाथ आदि।

200 बरगद के पेड़ लग जाने के बाद इनका बारहों संस्कार भी किया जायेगा। हरियाली चौपाल का ये अभियान लगातार चल रहा है। वन रेंजर जेके जयसवाल और प्रभागीय वन अधिकारी प्रमोद गुप्ता ने इसमें सहयोग किया। साथ ही हरियाली चौपाल के संयोजक आशीष सागर और अध्यक्ष अध्यापक यशवंत पटेल, डाक्टर विवेक पाण्डेय सहित ग्रामीण इस अभियान को गांव-गांव फैला रहे हैं। किसनीपुरवा, बरसड़ा मानपुर, मोहनपुर, रानीपुर आदि गांव इस मुहिम का हिस्सा बन चुके हैं।