क़लम से ही क़ातिलों के सर क़लम करें लेखक

कुमार सर्वेश तेंदुआ गुर्राता है, तुम मशाल जलाओ। क्योंकि तेंदुआ गुर्रा सकता है, मशाल नहीं जला सकता। सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

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पहले शौचालय या देवालय… एक बार ‘जनार्दन’ से पूछिए

पुष्यमित्र जहानाबाद शहर से सिर्फ चार किमी दूर है बरबट्टा गांव। मुख्य सड़क के किनारे बसा यह गांव मखदूमपुर विधानसभा के

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नेताजी! किसानों से सीखें बिना ‘ज़हर’ के वोटों की ‘खेती’

 पुष्यमित्र जीतेगा भाई जीतेगा लालटेन छाप जीतेगा… हमारा नेता कैसा हो अजै प्रताप जैसा हो… फलां छाप पर मोहर लगा

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