पीएम मोदी पूरे देश में स्वच्छता अभियान चला रहे हैं । यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी पीएम मोदी के अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं । ताजमहल से तालकटोरा तक सफाई अभियान। कभी बाल्मीकि बस्ती तो कभी नालियों को साफ कराया जा रहा है । लेकिन नोएडा अथॉरिटी को लगता है इस अभियान की अभी तक भनक नहीं लगी है । या इतनी बहरी हो गई है कि तीन साल से सफाई और स्वच्छता का नारा उसे सुनाई ही नहीं दिया। लोगों की सेहत के लिए स्वच्छता अभियान पर जोर दिया जा रहा है लेकिन नोएडा अथॉरिटी एनजीटी से बचने के लिए नोएडा सेक्टर 123 के सोसायटियों को ही डंपिंग ग्राउंड बनाने पर तुला है । आबादी के बीच डंपिंग ग्राउंड बनाने की जिद पर अड़ी है ।
भारी स्मॉग के बीच लोग नोएडा अथॉरिटी के इस फैसले के खिलाफ सड़क पर कई दिन से उतर रहे हैं लेकिन अभी तक इसका कोई ठोस हल नहीं निकला है ।

प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते केंद्रीय मंंत्री महेश शर्मा।

केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने तो आश्वसन देकर अपना पल्ला झाड़ लिया लेकिन जिस सोसायटी में डंपिंग ग्राउंड बनाया जा रहा है वो क्या करें ?  कहां जाएं ? कूड़े के ढ़ेर में कैसे रहेंगे ? क्या इसकी जानकारी सूबे में सफाई का झंडा उठाने वाली योगी सरकार को नहीं है ? मान लीजिए कि ये डंपिंग ग्राउंड पहले से तय था तो फिर वहां सोसायटी बनाने की अनुमति नोएडा अथॉरिटी ने क्यों दी ? क्यों नहीं रोका गया कि यहां पर कूड़े रहेंगे आप मत रहिए? जब लोगों ने करोड़ों रुपए खर्च कर अपने सपनों का फ्लैट बना लिया तो वहां पर कूड़े डंप करने की योजना बना ली गई । सफाई, सुरक्षा और सुविधा को देखकर लोग सोसायटियों में रहते हैं । नोएडा सेक्टर 121, 123 में और उसके आस पास करीब 1 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं । अगर नोएडा अथॉरिटी यहां कूड़े डालती रही तो यहां के लोगों की जिंदगी नरक बन जाएगी । सांस लेना मुश्किल हो जाएगा और लोग बीमार भी होने लगेंगे । स्थानीय लोगों की मांग है कि डंपिंग ग्राउंड को खेल का मैदान बना दिया जाए और कहीं दूर कूड़ा डंप करने की व्यवस्था की जाए।

सेक्टर 123 में प्रस्तावित वेस्ट टू एनर्जी प्लांट को लेकर नोएडा अथॉरिटी का दावा है कि ये प्लांट विश्वस्तर का है लेकिन लोग इस दावे से संतुष्ट नहीं है, क्योंकि ऐसे 8 प्लांट में से 4 बंद हो चुके हैं । रिसर्च में पता चला है कि ऐसे डंपिंग ग्राउंड के आस पास रहने वाले लोग कई बीमारियों के चपेट में भी आ रहे हैं । सेंट्रल ऑफ साइंस एंड एनवायरमेंट के मुताबिक हिंदुस्तान में ऐसे प्लांट कामयाब नहीं है । क्योंकि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट की गाइडलाइन की अनदेखी की जा रही है । गाइडलाइन न मानने से ऐसे प्लांट से कैंसर को बढ़ावा देने वाले डायोक्सीन व फ्लूरल तत्व निकते हैं जो करीब 6 वर्ग किमी के दायरे को प्रभावित करते हैं । इन्हीं सभी मुद्दों को देखते हुए नोएडा के लोग सड़को पर हैं और प्लांट को बंद कराने की मांग कर रहे हैं ।

13 नवंबर 2017 को सीएनजी गोलचक्कर पर मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन किया गया । लोग अपना काम धाम छोड़कर कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन नोएडा अथॉरिटी कोई ठोस उपाय नहीं निकाल रही है । वहीं राज्य सरकार भी अभी तक इस मामले में ज्यादा संजिदा नहीं दिख रही है । केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा नोएडा में ही रहते हैं उनका बड़ा अस्पताल चलता है । अपनी जनता की चिंताऔं का ख्याल रखने का दावा वो बार बार करते हैं लेकिन इस मामले में उन्होंने आश्वसन देने के अलावा अभी तक कुछ किया नहीं है । जरा सोचिए मंत्री के अस्पताल में पूरे इलाके का कूड़ा डाल दिया जाए तो क्या होगा ? क्या तब भी वो सक्रीय नहीं होगे ? गाय, ताजमहल, हिंदू-मुस्लिम का मामला होता तो अभी तक ये नेता क्या-क्या नहीं करते लेकिन यहां तो जनहित का मामला है, वोटहित का होता तो शायद कोई नेताओं की आवाज निकलती । बसपाई, सपाई, कांग्रेसआई भी सफाई से विरोध प्रदर्शन में लगे हैं । सत्ता में रहते हैं तो ये सब याद नहीं रहता ।


– सत्येंद्र कुमार यादव,  एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय । माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र । सोशल मीडिया पर सक्रिय । मोबाइल नंबर- 9560206805 पर संपर्क किया जा सकता है।

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