आधुनिक भव्यता के बीच पौराणिक परंपरा का दर्शन… ऐसा पहली बार हो रहा है!

आधुनिक भव्यता के बीच पौराणिक परंपरा का दर्शन… ऐसा पहली बार हो रहा है!

फोटो सौजन्य- RELIGION WORLD डॉट कॉम

दिव्य कुंभ, धर्म-अध्यात्म का कुंभ, प्रयागराज की पौराणिक परंपरा जिससे जुड़ी हैं समुद्र मंथन की अद्भुत कहानियां, अक्सर सुनाया जाता है और अधिकांश लोग जानते भी हैं । दान-परोपकार के इस पर्व पर इस बार कुछ नया है, कुछ दिव्य है । कुछ अद्भुत चीजें जिसे बहुत कम लोग जानते हैं । कुछ भव्य तस्वीरें जो आज तक संगम के तट पर कभी नहीं दिंखी। कुछ रोचक कहानियां जिसे शायद ही आप जानते होंगे । कहते हैं कि कल्पनाओं का कोई दायरा नहीं होता । जो कुंभ मेला सदियों से प्रयागराज की धरती पर लगता रहा है उसकी रौनक बढ़ाने के लिए इस बार कुछ खास किया गया है । वैदिक नगरी को एक बार फिर बसाया गया है। दुनिया को दिव्य कुंभ की भव्यता दिखाने के लिए ऐसी अनोखी नगरी तैयारी की गई है जिसे देखकर आपको गुजरात का कच्छ याद आ सकता है । रेती पर बने भव्य कॉटेज आपका मन मोह लेंगे । उसकी कुछ झलक हम आपसे साझा कर रहे हैं ।

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संगम तट पर 5 स्टार भव्य कॉटेज यानी वैदिक सिटी बसाई गई है। 54 एकड़ में 5 स्टार की सुविधाओं से लैस ऋषियों के नाम पर ये नगरी है, जहां मिलेगा धर्म-अध्यात्म का अनुभव । बिल्कुल आपकी कल्पनाओं से परे यहां सबकुछ है और संगम तट पर ऐसा पहली बार हो रहा है । 45 करोड़ की लागत ये ऐसे 1000 स्विस कॉटेज बनाए गए हैं । पर्यटन को बढ़ावा देने और वैदिक परंपराओं को दुनिया तक पहुंचाने के लिए गंगा की रेती पर प्राइवेट सेक्टर की सहयोग से इंद्रप्रस्थम सिटी बसाई गई है, जिसमें विदेशी मेहमान… एनआरआई और वो लोग रहेंगे जो कुंभ को नजदीक से देखना चाहते हैं । जो पैसे खर्च कर यहां अपने हिसाब से सुविधाएं चाहते हैं । जो हिंदुस्तान की परंपरा को महसूस करना चाहते हैं और जो हजारों रुपए खर्च कर गंगा किनारे अध्यात्म के इस पर्व का लुत्फ उठाना चाहते हैं, वो इस शानदार कॉटेज में रुकेंगे। इंद्रप्रस्थम टेंट सिटी के निदेशक सत्येंद्र ने बताया कि अब तक करीब 50-60 फीसदी कॉटेज बुक हो गए हैं और 10 जनवरी से मेहमान इस भव्य विलास में ठहरेंगे ।

हवन के लिए कुंड। फोटो सौजन्य- RELIGION WORLD डॉट कॉम

जिस जगह पर ये वैदिक नगरी बसाई जा रही है, ये बारिश के पानी में महीनों तक डुबा था । पानी हटने के बाद से यहां पर काम शुरू हुआ और 6 हफ्तों में इस पूरी नगरी को बसा दिया गया । घास दिल्ली से मंगाई गई है और जो गेट बना है वो दिल्ली के इंद्रप्रस्थ किला जैसा है। बताया जाता है कि राज इला ने जब प्रयाग को अपनी राजधानी बनाई तो इसी तरह की उनकी राजधानी थी और उसी को याद कर वैदिक टेंट सिटी संगम तट पर पहली बार बनाई गई है, जिसमें भव्य यज्ञशाला भी है और बच्चों के खेलने के लिए पार्क भी ।

डबल बेडरूम का विला। टीवी, गरम, ठंडा पानी की व्यवस्था। फोटो सौजन्य- RELIGION WORLD डॉट कॉम

इन तस्वीरों को ध्यान से देखेंगे तो आपको वैदिक परंपराओं की झलक दिखेगी । पीपीपी मॉडल के तहत गंगा किनारे तीन तरह के 1 हजार कॉटेज तैयार किये गए हैं । इसकी सुरक्षा का भी पुख्ता इंतजाम किया गया है । विदेशी मेहमानों की सुरक्षा में कोई चूक ना हो इसके लिए हर कॉटेज के बाहर गार्ड्स हैं और ये पूरा इलाका बाउंड्री के अंदर है । कॉटेज के अंदर आपको ठंडा, गरम पानी, 5 स्टार शौचालय और बहुत कुछ ।
अगर आप यहां ठहरना चाहते हैं तो डीलक्स कॉटेज के लिए आपको 11 हजार 999 रुपए खर्च करने होंगे । सुपर डीलक्स कॉटेज में रुकने के लिए 15 हजार 999 रुपए और विला में ठहरने के लिए 32 हजार 999 रुपए खर्च करने पड़ेंगे । विला में डबल बेड है और काफी स्पेस भी है । सबसे बड़ी बात ये है कि जो भी टूरिस्ट इस संन्यास विलास में ठहरेंगे वो सीधे गंगा आरती का दर्शन कर सकते हैं । गंगा किनारे टहल सकते हैं। यही नहीं यहां से मेले में जाने के लिए क्रूज की भी व्यवस्था की गई है । नई सड़कें, साज सज्जा और टेंट सिटी के साथ संगम पर अद्भुत और अविश्वसनीय तैयारी देश ही नहीं बल्कि विदेश से आने वाले सैलानियों का भी मन मोह लेंगी ।

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15 जनवरी से शुरू हो रहे कुंभ मेले को लेकर कई चीजें नई हो रही है । 3200 हेक्टेयर क्षेत्र में पूरा मेला क्षेत्र बसाया गया है । जिसमें वैदिक ग्राम सबके आकर्षण का केंद्र है । यही नहीं.. रिसेप्शन से लेकर कॉटेज के अंदर भी प्रसिद्ध मंदिरों की छाया है। गोरखनाथ मंदिर की रिप्लिका भी है ।

गुरू कृष्णी महाराज जी कैंपस । फोटो सौजन्य- RELIGION WORLD डॉट कॉम

RELIGION WORLD डॉट कॉम ने ये तस्वीरें उपलब्ध करवाई हैं । मित्र और वरिष्ठ पत्रकार भव्य श्रीवास्तव ने इंद्रप्रस्थम टेंट सिटी की तस्वीरों के साथ साथ कुंभ के सेक्टर 7 में बने गुरू कृष्णी महाराज जी कैंपस की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा किया है । बताया जा रहा है कि इस कुटिया में कुंभ के दौरान बौद्ध धर्म गुरू दलाई लामा भी ठहरेंगे।

कुंभ का बेहद खास आध्यात्मिक महत्व है । शोर और प्रकाश के बीच पूजा-पाठ और साधनाएं होती हैं । ऐसे में इन दिव्य कॉटेज में ठहरने का आनंद अलग होगा । दुनिया भर से आए विदेशी मेहमान यहां से अच्छी तस्वीरें ही नहीं, बिल्कुल नया अनुभव लेकर जाएंगे ।
यहां पर साधु संतों की कुटिया पहले से काफी आकर्षक बनाई गई हैं । हर कुटिया में हवन कुंड की खास व्यवस्था की गई है । अस्थाई भव्य मंदिर भी बनाए गए हैं । और बहुत कुछ है जो आपके कोतुहल की वजह बनेंगे ।

विदेशी मेहमानो, एनआरआई और पैसे वालों के लिए 5 स्टार कॉटेज।

एस के यादव, टीवी पत्रकार ।

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