भारत की समकालीन राजनीति और अविश्वसनीयता का ताना-बाना !

भारत की समकालीन राजनीति और अविश्वसनीयता का ताना-बाना !

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश के फेसबुक वॉल से

कभी-कभी भारतीय राजनीति और उस पर अपने नियमित लेखन से मन उचटने लगता है! वैसे ही जैसे ज्यादातर न्यूज चैनलों और क्रिकेट से उचट चुका है! राजनीति पर लिखने का मन नहीं करता! शायद, इसकी वजह ये है कि बीते 35 सालों से राजनीति और राजनेताओं को बड़े करीब से देखता आ रहा हूं। मीडिया धंधेबाज(धंधेबाज, सिर्फ बुरे अर्थ में नहीं!) की तरह नहीं, मीडिया प्रोफेशनल यानी एक पत्रकार की तरह! जिन नेताओं को आज की युवा पीढ़ी दूर से जानती है और उनमें ‘देवता’ या ‘दैत्य’ का रूप देखती है, उनमें कइयों को मैंने अपने पत्रकारिता जीवन में बड़े नजदीक से देखा है! उनके साथ सड़क मार्ग या हवाई मार्ग से यात्राएं की हैं, साथ में नाश्ता या भोजन किए हैं, कुछ अच्छे औपचारिक-अनौपचारिक संवाद और झगड़े किए हैं! जो अपने को समझ में आया, उसे रिपोर्ट किया है! इनकी नापसंदगी और कोप भी झेला है, कुछेक की कुछ समय के लिए पसंदगी भी! इन सबकी संभावनाएं और सीमाएं भी देखी हैं! सिर्फ बुर्जुआ, कांग्रेसी या भाजपाई राजनीति ही नहीं, वामपंथी, बहुजनवादी और सामाजिक न्यायवादी राजनीति को भी नजदीक से देखने का मौका मिला! इनमें तरह-तरह के लोग दिखे। कुछ अच्छे, कुछ यूं ही, कुछ बुरे और कुछ बहुत बुरे! सामाजिक न्याय और बहुजन राजनीति का बुरा हाल आज यूं ही नहीं हुआ है!

यह सही है कि भारत की समकालीन राजनीति आज बहुत अविश्वसनीय और एक हद तक संदिग्ध नजर आती है! लगता है, मानो इसका भी कोई ‘अंडरवर्ल्ड’ है! पर इस बेहाल समाज को जो कुछ अच्छा या बुरा हासिल हुआ, राजनीति और राजनेताओं से ही तो! यही कारण है कि दगाबाज राजनीति से चाहे जितनी कोफ्त हो, इसे नजरंदाज करना मुनासिब नहीं! इसका विकल्प क्या है? यही सब सोचकर भरोसा करना शुरू कर देता हूं कि क्या करेंगे, जो सामने है, उसी में बहुत बुरे, कम बुरे, कुछ अच्छे और ले-देकर ठीक-ठाक की सूची बनानी होगी! इनके बारे में लिखना, पढ़ना और बोलना होगा! और फिर एकेडमिक्स, मीडिया, व्यापार, न्याय जगत, खेल, सिनेमा और नौकरशाही; इनमें क्या कुछ कम गंदगी है? अच्छे-बुरे, बहुत बुरे और कम बुरे तो हर जगह हैं! मैं भी कुछ के लिए अच्छा तो कुछ के लिए कम बुरा या बहुत बुरा हो सकता हूं! यही सोचकर समकालीन भारतीय राजनीति पर फिर लिखना शुरू कर देता हूं! पर भविष्य में ज्यादा ठोस और विस्तार से लिखने का इरादा है! पता नहीं, दिल्ली की इस आपाधापी भरी कठिन जिंदगी में यह सब संभव होगा या नहीं!


उर्मिलेश/ वरिष्ठ पत्रकार और लेखक । पत्रकारिता में करीब तीन दशक से ज्यादा का अनुभव। ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘हिन्दुस्तान’ में लंबे समय तक जुड़े रहे। राज्यसभा टीवी के कार्यकारी संपादक रह चुके हैं। दिन दिनों स्वतंत्र पत्रकारिता करने में मशगुल।

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